अखिलेश की बैशाखी की मदद से यूपी में पैर जमाने के प्रयास में आम आदमी पार्टी, जानिए पूरी सच्चाई
लखनऊ, 04 दिसंबर: उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी (आप) राजनीतिक रूप से अब तक अपनी कोई पहचान नहीं बना सकी है। लोक लुभावन घोषणाओं के बलबूते इस दल के नेता यूपी में अपने पैर फैलाने के कई प्रयास भी कर रहे हैं। हालांकि आप की ओर से लोकलुभावन वादे जरूर किए गए हैं लेकिन जनता पर इनका कितना असर पड़ेगा यह सबसे बड़ा सवाल है। ऐसे में यूपी के विधानसभा चुनावों में 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके आप के नेताओं ने समाजवादी पार्टी (सपा) का साथ हासिल करने की मुहिम शुरू की है। आप के यूपी प्रभारी संजय सिंह दो माह में तीसरी बार अखिलेश यादव से मिल चुके हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो सपा मुखिया अखिलेश यादव से संजय सिंह की मुलाकात क्या गुल खिलाएगी यह देखना रोचक होगा।

अभी भी दिल्ली से सटा उत्तर प्रदेश 'आप' के रडार से दूर ही लगता है। जबकि मुख्यमंत्री बनने से पहले तक अरविंद केजरीवाल ग़ाज़ियाबाद में ही पत्नी के सरकारी क्वार्टर में रहते थे। ऐसे में अब सियासी हलकों में यह सवाल उभरता रहता है कि यूपी और 'आप' के बीच ये दूरियां क्यों है? और इसके पीछे क्या मजबूरियां हैं? यूपी के राजनीतिक जानकार इसके दो कारण बताते हैं। पहला तो ये कि 'आप' ने यूपी की जनता से जुड़ने के लिए सत्तारूढ़ दलों पर आरोप लगाने की राजनीति की। दूसरा यूपी में अपना आधार बढ़ाने के आप नेताओं को जनता के बीच जाने के बजाए विज्ञापन पर खर्चा करना ज्यादा जरूरी लगा।
आप के यूपी में प्रभाव को लेकर संबंध में बीबीसी के पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि,
"एक क्षेत्रीय दल का दूसरे राज्य में प्रभाव कम ही दिखता है, आप के साथ भी यही दिक्कत है। यूपी में आप का कोई सोशल बेस नहीं है। यूपी में जात पात और विकास की राजनीति का बोलबाला रहा है। यह जानते हुए भी अरविंद केजरीवाल ने यूपी में पार्टी का फैलाव करने के ध्यान नहीं केंद्रित किया। उन्होंने सिर्फ छह माह पहले पार्टी के सांसद संजय सिंह को यूपी का प्रभारी बनाकर भेज दिया। यहां संजय सिंह ने पार्टी की नीति के तहत सत्तारूढ़ सरकार की योजनाओं को लेकर हवा हवाई आरोप लगाकर अखबार में खबरे छपवाने को महत्व दिया।"
प्रदेश की जनता ने आप जैसे दलों को तवज्जो नहीं दी। हालांकि यूपी में पार्टी का विस्तार करने की मंशा के तहत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अयोध्या गए। भगवान रामलला के मंदिर में माथा टेका। फिर भी यूपी विधानसभा चुनावों की 100 सीटों पर भी आप को अच्छे प्रत्याशी मिलना मुश्किल लगा तो संजय सिंह ने सपा का दरवाजा खटखटा दिया। बुधवार को वह तीसरी बार अखिलेश यादव से मिलने उनके घर पहुंच गए। दरअसल,अखिलेश यादव प्रदेश में छोटे दलों का एक गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस गठबंधन में आप को भी जगह मिल जाए, संजय सिंह का यह प्रयास हैं। ताकि आप भी सपा के सहयोग से आगामी विधानसभा चुनावों में अपनी मौजूदगी को ठीक से दर्ज करा सके।












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