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करवा चौथ भी नहीं बचा पाता सुहाग! यहां कम उम्र में गुजर जाता है पति

आगरा। करवा चैथ 2017 की तैयारियां महिलाओं ने तेजी से शुरू कर दी हैं। शुभ घड़ी में महिलाएं ताज का दीदार कर पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखेंगी लेकिन आगरा में एक गांव ऐसा भी है, जहां महिलाएं भले ही व्रत रखें, या ताज का दीदार कर पति की लम्बी उम्र की कामना करें, उनका सुहाग उजड़ ही जाता है। इस गांव का नाम है कुकरसा। ग्राम पंचायत तांतपुर के इस गांव में 35 वर्ष की उम्र में महिलाओं का सुहाग उजड़ जाता है। हमारी टीम जब इस गांव में पहुंची, तो इन महिलाओं ने अपना दर्द खुद बयां किया।

करवा चौथ पर गांव में सन्नाटा

करवा चौथ पर गांव में सन्नाटा

करवा चौथ का त्यौहार है लेकिन इस गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिन महिलाओं के पति जीवित हैं, वे तो व्रत की तैयारी कर रही हैं लेकिन उनके आस पड़ोस की जब महिलाएं उन्हें ये व्रत करते हुए देखती हैं, तो अपनी भाग्य को कोसती हैं। यहां की रहने वाली रामवती ने बताया कि उनके पति की मृत्य इसी बीमारी की वजह से 5 वर्ष पूर्व हो गई थी। पति पत्नी के इस पावन त्योहार पर याद आती है, लेकिन दर्द को बच्चों का चेहरा देखकर छिपा लेते हैं। वहीं कांता का कहना है कि पत्थर खदान के इस काम ने सुहाग छीन लिया, अब महिलाएं परिवार चलाने के लिए इस काम को कर रही हैं, तो उनकी जान पर भी इस बीमारी का साया मंडरा रहा है।

1200 की आबादी में 200 महिलाएं विधवा

1200 की आबादी में 200 महिलाएं विधवा

गांव में घुसते ही सूनी गलियों का दीदार होता है। कुछ महिलाए गांव के चबूतरे पर बैठी हुईं थीं। उजड़ी हुई मांग और चेहरे पर पीड़ा साफ झलक रही थी। दर्द था, जीवन साथी का। महिलाओं से बातचीत की गई, तो उनका दर्द आंसू बनकर छलक पड़ा। बताया गया, कि गांव में ये श्राप है या बीमारी का प्रकोप, 35 से 40 वर्ष की उम्र में महिलाएं विधवा हो जाती हैं। हैरत की बात ये थी, कि इस गांव की आबादी लगभग 1200 की है, जिसमें से 200 से अधिक महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पति का देहांत हो चुका है।

श्राप नहीं, पत्थर के खदान की वजह से मौतें

श्राप नहीं, पत्थर के खदान की वजह से मौतें

उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष पंडित तुलाराम शर्मा ने बताया कि ये श्राप नहीं, बल्कि जानलेवा बीमारी सिलिकोसिस है। पत्थर की खदान का काम करने वाले युवाओं को ये बीमारी अपनी चपेट में लेती है। धीरे धीरे फैलने वाली ये बीमारी शरीर को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देती है। इसके लिए राजस्थान में सिलिकोसिस बोर्ड बनाया गया है, लेकिन यूपी के इन मजदूरों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, इसके चलते ये श्रमिक अकाल ही मौत के मुंह में समा रहे हैं।

क्या करवा चौथ बचा पाएगा पति?

क्या करवा चौथ बचा पाएगा पति?

इसी गांव की सुमन ने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखा है, लेकिन अगली बार वो ये व्रत रख पाएगी या नहीं, उसे खुद नहीं मालूम। सुमन की शादी 8 वर्ष पूर्व बंटू के साथ हुई थी। बंटू पत्थर की खदान में काम करता है। उसकी तबियत बेहद खराब है। पिछले आठ दिनों से उसने खाना पीना भी छोड़ रखा है। इलाज के लिए खेत बिक गया, मकान भी गिरवी रख गया है, लेकिन अब उसके जीवन का कोई ठिकाना नहीं है।

ग्राम प्रधान और विधायक को ये बात मालूम नहीं!

ग्राम प्रधान और विधायक को ये बात मालूम नहीं!

जब इस मामले में खेरागढ़ विधानसभा के भाजपा विधायक महेश गोयल से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि अब यहां ऐसा कोई मामला नहीं है। काफी वर्षों पहले श्रमिक इस बीमारी की चपेट में आते थे, लेकिन अब इस बीमारी की वजह से किसी की जान नहीं जा रही है। उन्हें बंटू का उदाहरण दिया गया, तो उन्होंने कहा कि घर-घर जाकर किसी की समस्या नहीं पूछ पाऊंगा। वहीं गांव प्रधान राजकुमार ने कहा कि उन्हें भी इस मामले की जानकारी नहीं है, जब​कि ये स्थिति तब है, जब गांव प्रधान उसी गांव के हैं।

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