रामनवमी के दिन इस बैंक में चुकाना पड़ता है सालभर का कर्ज, राम नाम की करेंसी लेकर आते हैं विदेशी भी

इस बैंक के अपने कुछ नियम और कानून हैं जिसे सभी खाताधारकों को पालन करना होता है। भक्त बैंक से सवा लाख राम नाम का कर्ज ले सकते है, जिसे एक साल में जमा करना होता है।

वाराणसी। त्रिपुरा भैरवी गली में राम के नाम का ऐसा बैंक है जहां मुस्लिम देशों समेत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर से भी लोग जुड़े हैं। यहां राम रमापति बैंक में 91 सालों में भक्तों ने 19 अरब 22 करोड़ 62 लाख 75 हजार श्रीनाम का नाम और सवा करोड़ शिव नाम जमा है। दूसरे बैंकों की तरह यहां मैनेजर, एकाउंटेंट, कैशियर सभी हैं। 21 लाख से ज्यादा लोग इस बैंक से जुड़े हैं। प्रबंधक सुमित मेहरोत्रा ने बताया की 1926 में उनके पूर्वजों ने इस बैंक की स्थापना की थी। रामनवमी के पूरे दिन और दूसरे दिनों में तीन घंटे राम बैंक खुला रहता है।

रामनवमी के दिन इस बैंक में चुकाना पड़ता है सालभर का कर्ज, राम नाम की करेंसी लेकर आते हैं विदेशी भी
रामनवमी के दिन इस बैंक में चुकाना पड़ता है सालभर का कर्ज, राम नाम की करेंसी लेकर आते हैं विदेशी भी

कुछ ऐसे नियम हैं बैंक के खाताधारकों के लिए

इस बैंक के अपने कुछ नियम और कानून हैं जिसे सभी खाताधारकों को पालन करना होता है। भक्त बैंक से सवा लाख राम नाम का कर्ज ले सकते है, जिसे एक साल में जमा करना होता है। इस दौरान मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज से दूर रहना होता है। कलम, स्याही, कागज ये सब बैंक खुद निःशुल्क देता है। लोन लेने से पहले शपथ पत्र, मनोकामना विवरण देना पड़ता है। यही नहीं भक्तों की प्रवेसी का ख्याल रखते हुए नाम और प्रक्रिया गुप्त रखी जाती है। यहां भक्तों के जमा किए हुए राम नाम को खास प्लास्टिक कवर में रखा जाता है। भक्तों को 365 दिनों में सवा लाख राम का नाम करंसी लिखना होता है।

रामनवमी के दिन इस बैंक में चुकाना पड़ता है सालभर का कर्ज, राम नाम की करेंसी लेकर आते हैं विदेशी भी
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91 सालों में 19 अरब 22 करोड़ 62 लाख 75 हजार श्रीराम नाम हुए हैं जमा

राम नवमी के दिन 19 अरब 22 करोड़ 62 लाख 75 हजार श्रीनाम नामों को फेरी के लिए रखा जाता है। ताकि भक्त परिक्रमा कर सके। यही नहीं मंदिर के पुजारी और प्रबंधन से जुड़े हुए लोगों ने बताया की बैंक को इतनी बड़ी राम नाम की संपत्ति इकट्ठा करने में भक्तों ने 91 सालों से उनका साथ दिया है जिसे वो संभालकर रखते हैं।

रामनवमी के दिन इस बैंक में चुकाना पड़ता है सालभर का कर्ज, राम नाम की करेंसी लेकर आते हैं विदेशी भी
रामनवमी के दिन इस बैंक में चुकाना पड़ता है सालभर का कर्ज, राम नाम की करेंसी लेकर आते हैं विदेशी भी

1926 में खुला था ये बैंक

कुंभ मेले में सतराम दास से दास छन्नू लाल की 1926 में मुलाकात हुई थी। छन्नू लाल को राम के नाम का बोध सतराम दास ने कराया और जगत कल्याण के लिए राम बैंक खोलने की सलाह दी थी, इसके बाद विश्व कल्याण के मकसद से शुरुआत की गई। जिसकी आस्था राम नवमी के दिन विशेष रूप से दिखाई देती है। आज के दिन भक्तों को अपनी करेंसी जमा करनी होती है जिसे वो एक वर्ष पहले कर्ज लिए रहते हैं। इसके अलावा आज तीन पहर की विशेष आरती का भी आयोजन किया जाता है। जिसके लिए देश के अलग-अलग शहरों से भक्त आज के दिन आते हैं।

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भक्तों की राम नाम में है अटूट आस्था

ऑस्ट्रेलिया से आए साइंटिस्ट सतेंद्र कुमार ने बताया की बैंक के बारे में उन्होंने सुना था। इसी की उत्सुकता उन्हें यहां लाई और वो अब भगवान श्री राम का नाम कल्याण की दृष्टि से कर्ज के रूप में ले जा रहे हैं। वहीं शोभा कपूर तो कर्ज लेने यहां लगातार आयी हैं। उन्होंने खुद बताया की उनकी चार बार मनोकामनाएं यहां से पूर्ण हुई हैं।

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