स्वदेशी तकनीक से बनी मुश्किल रास्तों पर चलने वाली अनोखी कार
बीएचयू आईआईटी के छात्रों ने एक अनोखी कार बनाई है जो पथरीले, दलदली या रेतीले रास्तों पर आसानी से चल सकती है। यह सेना और किसान, दोनों के लिए उपयोगी है।
वाराणसी। रेगिस्तान हो या कोई उबड़-खाबड़ रास्ता, आईआईटी बीएचयू के छात्रों ने एक ऐसी पहली स्वदेशी स्पोर्ट्स कार तैयार की है जो हर तरह के रास्ते पर आसानी से दौड़ सकती है। इसका सस्पेंशन इस तरह बनाया गया है कि दुर्गम रास्तों पर भी उसे आसानी से ले जाया जा सके। इतना ही नहीं दलदल और रेत पर भी अच्छी रफ़्तार से चल सकती है। इसके अलावा बार्डर पर पेट्रोलिंग और सामानों को ले जाने में ये कार बेहद कारगर साबित हो सकती है।

जाने कैसी है ये कार
आईआईटी बीएचयू के मेकेनिकल इंजीनयरिंग के छात्रों की टीम ने 'मेकिंग इंडिया' के तहत पहली बार भारत में ऐसी स्पोर्ट्स कार ONYX बनायी है जो बॉर्डर पर देश के जवानों और कृषि के काम आ सकेगी। 3. 5 लाख में बनी कार पहाड़ों पर 45 डिग्री पर भी आसानी से चढ़ सकती है। ढांचे से लेकर इंजन तक की पूरी बनावट में स्वदेशी तकनीक अपनाई गई है।

क्या कहा इसे बनाने वाले छात्रों ने?
ड्राइवर आदित्यन ने बताया कि कार चलाने में कम्फर्ट है। ये कार इंदौर के वर्चुअल कम्पटीशन में 400 टीमों में चौथे नंबर पर है। एक्सीडेंट में कार को क्या नुकसान होगा इसकी हम सभी ने साफ्टवेयर के जरिये ग्राफिक्स से टेस्ट किया है। साहिल ने बताया कि अमूमन कारें 25 से 30 डिग्री पर ऊंचाई में पहाड़ों पर चल पाती हैं । 45 डिग्री पर चढ़ाई करना इसका सबसे मजबूत पहलू है। देश के जवान अपनी जरूरत के सामानों को लेकर आसानी से पहाड़ों पर चढ़ाई कर सकते है । बार्डर पर रेत या दलदल में भी आसानी से ले जा सकते हैं। सारे पार्ट्स वर्कशॉप में बनाए गए हैं। कुछ पार्ट्स पुणे से मंगाया गया है।

क्या कहा एक्सपर्ट ने?
आईआईटी के निदेशक राजिव सेंगल ने बताया कि इस तरह की कार काफी हद तक हमारे देश के किसानों के काम आ सकती है। अगर इसके आइडिया को अपनाया जाए तो स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।












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