पिता की बरसी पर भोज न देकर उन पैसों से शिक्षक ने बनवाया स्कूल का फर्नीचर

शाहजहांपुर। यूपी के शाहजहांपुर में प्राथमिक विद्यालय के एक टीचर ने पिता की बरसी पर खर्च होने वाले पैसों से अपने सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए फर्नीचर बनवा डाला। टीचर के इस कदम से स्कूल के बच्चे उनका शुक्रिया अदा कर रहे है तो वहीं उनके इस जज्बे से खुश होकर शिक्षा अधिकारी उन्हें सम्मानित करने की बात कर रहे हैं।

पिता की जगह पर मिली थी नौकरी

पिता की जगह पर मिली थी नौकरी

बहादुरगंज उच्च प्राथमिक विद्यालय में अपनी क्लास के छात्रों को तालीम दे रहे इस टीचर का नाम इमरान सईद है। इमरान के शिक्षक पिता की 1997 में मृत्यु हो गई। अपने पिता की जगह पर ही उन्हें भी शिक्षक पद पर नौकरी मिल गई। इमरान के परिवार वालों ने इस साल पिता की बरसी यानी श्राद्ध मनाने की बात कही। श्राद्व पर खाने और दान दक्षिणा में लगभग 25 से 30 हजार का खर्च आना था।

स्कूल का फर्नीचर बनवाकर पिता को दी श्रद्धांजलि

स्कूल का फर्नीचर बनवाकर पिता को दी श्रद्धांजलि

इमरान ने फैसला किया कि वो पिता की बरसी के लिए जमा किये गये पैसों से अपने क्लास के बच्चों के लिए फर्नीचर बनायेंगे। उन्होंने जमीन पर पट्टी बिछाकर बैठने वाले अपने क्लास के बच्चों के लिए फर्नीचर तैयार करा दिया जिस पर बैठकर आज बच्चे पढ़ाई करते हैं। इमरान की मानें तो इन्हीं बच्चों की बदौलत उनके परिवार को रोटी मिलती है। शिक्षक ने कहा कि फर्नीचर बनवाना ही पिता को सबसे बड़ी श्रद्वांजलि है।

'बच्चों की जरूरत पर हर साल खर्च करूंगा पैसे'

'बच्चों की जरूरत पर हर साल खर्च करूंगा पैसे'

छात्र जितिन ने कहा कि अपने टीचर के इस काम से सभी खुश हैं क्योंकि इससे पहले वो सर्दी में ठंडी जमीन पर पढ़ते थे लेकिन आज उन्हें फर्नीचर पर बैठकर पढ़ना का मौका मिल रहा है। वो इसके लिए अपने टीचर को थैंक्यू बोल रहे हैं। इमरान का कहना है कि वो हर साल अपने पिता की बरसी मनाते थे और रिश्तेदारों को दावत देते थे लेकिन अब उन्होंने फैसला किया है वो बरसी पर खर्च होने वाले पैसों को अपने क्लास के बच्चों की जरूरत के लिए खर्च करेंगे। उनके इसी जज्बे को देखते हुए अब बेसिक शिक्षा विभाग उन्हें कार्यक्रम के जरिए सम्मानित करने की बात कर रहा है।

टीचर के जज्बे को सभी कर रहे सलाम

टीचर के जज्बे को सभी कर रहे सलाम

अपने स्कूल के बच्चों को लिए इमरान का ये जज्बा उन्हें सलाम करने के लिए काफी है। इससे टीचरों को प्रेरणा लेने की जरूरत है ताकि इमरान जैसे और शिक्षक स्कूल में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की मदद को आगे आ सकें।

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