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UP election 2022: सात नई जाति-आधारित पार्टियां, जिनके दम पर BJP देगी SP-SBSP गठबंधन को टक्कर

लखनऊ, 9 नवंबर: 2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने यूपी में छोटे दलों से गठबंधन करके अपना जनाधार काफी मजबूत कर लिया था। इस बार समाजवादी पार्टी भी उन्हीं चुनावी तिकड़मों में लगी हुई है। उसने ओपी राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान करके पूर्वांचल की पिच पर बीजेपी के खिलाफ शुरुआती इनिंग में बढ़त बनाने की कोशिश की है। इसकी काट के तौर पर भाजपा ने भी सात से ज्यादा छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन किया है, जो अलग-अलग जातियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं। ये दल आपस में हिस्सेदारी मोर्चा के तहत जुड़े हैं, जो उत्तर प्रदेश की सत्ता में विभिन्न ओबीसी और दलित जातियों का ज्यादा दखल चाहती हैं। इन्हें उम्मीद है कि गैर-यादव पिछड़ा वोट पर फोकस कर रही भारतीय जनता पार्टी के साथ रहने पर इनका काम आसानी से बन सकता है।

भारतीय मानव समाज पार्टी

भारतीय मानव समाज पार्टी

भारतीय मानव समाज पार्टी 2017 में बनी है और केवट रामधनी बिंद इसके अध्यक्ष हैं। बिंद एक ओबीसी जाति है, जो निषादों के करीब मानी जाती है। इस पार्टी के मुखिया का मानना है कि प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र और गाजीपुर समेत 10 जिलों में उनकी खासी मौजूदगी है और पूर्वी यूपी में उनकी जनसंख्या करीब 6% है। इस पार्टी को उम्मीद है कि वह अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में चुनाव के परिणाम को बदल सकते हैं। रामधनी बिंद पहले भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल थे, जिसमें ओवैसी और राजभर भी साथ थे। उन्होंने इसी साल हिस्सेदारी मोर्चा बनाया है।

शोषित समाज पार्टी

शोषित समाज पार्टी

शोषित समाज पार्टी 2020 में ही बनी है और बाबू लाल राजभर इसके अध्यक्ष हैं। राजभर पहले ओपी राजभर के समर्थक थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद की पार्टी बना ली। बाबू लाल राजभर मानते हैं कि उनके साथ सिर्फ राजभर समाज का ही वोट नहीं है, बल्कि वह समाज की सभी जातियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका अंदाजा है कि पूर्वी यूपी में राजभरों की जनसंख्या 14 से 22% के बीच है। जाहिर है कि अगर बीजेपी इस पार्टी पर डोरे डालने में सफल रही है तो यह ओपी राजभर के लिए बहुत अच्छे संकेत नहीं हैं।

भारतीय सुहेलदेव जनता पार्टी

भारतीय सुहेलदेव जनता पार्टी

भारतीय सुहेलदेव जनता पार्टी का गठन भी पिछले साल यानी 2020 में ही हुआ है और भीम राजभर इसके चीफ हैं। इस पार्टी का प्रभाव बलिया जिले के राजभर समाज पर माना जाता है। खुद भीम राजभर भी पहले ओम प्रकाश राजभर की पार्टी में ही थे। ये भी हिस्सेदारी मोर्चा के संस्थापकों में शामिल हैं। मतलब, ओपी राजभर के खिलाफ भाजपा के लिए ये एक अलग काट उपलब्ध हो गए हैं।

भारतीय समता समाज पार्टी

भारतीय समता समाज पार्टी

भारतीय समता समाज पार्टी के मुखिया महेंद्र प्रजापति हैं और यह इन सब में सबसे पुरानी पार्टी है। यह पार्टी 2008 में ही बनी थी। नाम से ही स्पष्ट है कि यह पार्टी प्रजापति समाज पर अपनी पकड़ मानती है, जो कि यूपी की एक ओबीसी जाति है। महेंद्र प्रजापति मानकर चलते हैं कि उत्तर प्रदेश में इस समाज की जनसंख्या 5% है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक प्रजापति मुख्यत: कुम्हार होते हैं, जो सदियों से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते हैं। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुछ समय पहले ही 'माटी कला बोर्ड' का गठन किया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में यह पार्टी प्रदेश की तीन सीटों पर लड़ी थी। हालांकि, कहीं भी जमानत नहीं बचा पाई थी।

मानवहित पार्टी

मानवहित पार्टी

मानवहित पार्टी का गठन 2015 में हुआ था और कृष्ण गोपाल सिंह कश्यप इसके मुखिया हैं। यह पार्टी अपना दबदबा निषादों की एक उपजाति कश्यपों के बीच मानती है। 1998 से 2014 तक कश्यप खुद मायावती की बसपा के साथ थे। कश्यप के मुताबिक 2017 में उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा था, लेकिन 1% से भी कम वोट आए थे। 2019 में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था, लेकिन 2022 में कांग्रेस से भाव नहीं मिला तो हिस्सेदारी मोर्चा से जुड़ गए। यह पार्टी भी मानती है कि प्रदेश में 3% आबादी कश्यपों की है।

पृथ्वीराज जनशक्ति पार्टी

पृथ्वीराज जनशक्ति पार्टी

पृथ्वीराज जनशक्ति पार्टी 2018 में बनी है और चंदन सिंह चौहान इसके अध्यक्ष हैं। यह पार्टी मूलरूप से नोनिया जाति के भरोसे टिकी है, जो कि एक ओबीसी है और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इनकी जनसंख्या मौजूद है। पार्टी के एक अधिकारी के मुताबिक वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर जिले समेत पूर्वांचल में उनकी 3% आबादी है। इस पार्टी का मुख्य जनाधार वाराणसी में माना जाता है।

मुसहर आंदोलन मंच (गरीब पार्टी)

मुसहर आंदोलन मंच (गरीब पार्टी)

मुसहर आंदोलन मंच (गरीब पार्टी) 2020 में बनी थी और चंद्रमा वनवासी इसके अध्यक्ष हैं। इस पार्टी ने अपना 'गरीब पार्टी' के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आवेदन दे रखा है। मुसहर एक दलित जाति है, जिसे पूर्वी यूपी में बनबासी समाज के नाम से भी जाना जाता है। यह अत्यधिक पिछड़ी मानी जाती है और एक पार्टी कार्यकर्ता के मुताबिक मुसहर का मतलब 'चूहे खाने वाले' से है। इसी बिरादरी के जीतन राम मांझी बिहार में मुख्यमंत्री पद तक पहुंच चुके हैं। उत्तर प्रदेश में इनकी 1% आबादी है।

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