Sambhal Violence: संभल हिंसा मामले में अब तक 100 दंगाइयों की पहचान, आरोपियों के पोस्टर जारी करेगी यूपी पुलिस
Sambhal Violence: उत्तर प्रदेश में हाल ही में जामा मस्जिद के सर्वेक्षण को लेकर भड़की हिंसा ने संभल शहर को हिला कर रख दिया। संभल में रविवार 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के बाद योगी आदित्यनाथ प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए 8 एफआईआर दर्ज की हैं। जिनमें समाजवादी पार्टी के कई राजनीतिक चेहरों के नाम शामिल हैं। इनमें एक सांसद और एक विधायक के बेटे पर लोगों को भड़काने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
हिंसा में गंभीर खुलासे
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और प्रारंभिक जांच से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दंगाइयों ने हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों से हथियार छीनने और उन्हें क्षति पहुंचाने के प्रयास किए। इस दौरान एक सब-इंस्पेक्टर की पिस्तौल को आग लगाने की कोशिश की गई। दंगाइयों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से सीसीटीवी उपकरणों को नुकसान पहुंचाया। हिंसा के दौरान 29 स्मोक बम और 15 कारतूस चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं।

तकनीक से दंगाइयों की पहचान
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन कैमरा रिकॉर्डिंग के माध्यम से सौ से अधिक आरोपियों की पहचान की है। इस मामले में अब तक 27 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की साइबर सेल इस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
आरोपियों के पोस्टर होंगे जारी
दंगाइयों पर शिकंजा कसते हुए संभल पुलिस और प्रशासन ने आरोपियों की तस्वीरों के पोस्टर सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। मुरादाबाद के संभागीय आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि यह कदम दंगाइयों को सजा दिलाने और जनता के बीच शांति बहाली के लिए उठाया गया है। \
मुरादाबाद के डिविजनल कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि कल तक इस मामले में शामिल नाबालिगों की संख्या 3 थी। लेकिन यह संख्या बदल सकती है। नाबालिग आरोपियों की काउंसलिंग की जा रही है। हम उन्हें शिक्षित करने और बनाने की कोशिश कर रहे हैं कुशल। हमने एक चाकू बरामद किया है। अगर इसे भीड़ के बीच इस्तेमाल किया जाए तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। हम समाज में असामाजिक तत्वों की पहचान करेंगे और उन सभी को बेनकाब करेंगे। जो इस साजिश में शामिल थे।
संभल के एसपी और मुरादाबाद के डीआईजी मुनिराज डी ने आश्वासन दिया कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारा फोकस केवल हिंसा में शामिल लोगों पर है।
जामा मस्जिद के सर्वेक्षण से उपजा तनाव
संभल में भड़की हिंसा जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के कारण हुई। जो हरिहर मंदिर के ऊपर मस्जिद बनाए जाने के आरोपों पर आधारित याचिका का हिस्सा थी। अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण करने गई टीम को स्थानीय विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ा।
इस हिंसा में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि एक दर्जन पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हुए हैं। हिंसा ने क्षेत्र में व्यापक क्षति पहुंचाई और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।
हिंसा के बाद प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस गश्त और निगरानी बढ़ाई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की सक्रिय निगरानी शुरू की गई। स्थानीय समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयास किए गए। सुरक्षा बलों की तैनाती और जनता में विश्वास बहाल करने के लिए बैठकें आयोजित की गईं।
जीवन सामान्य होने के संकेत
संभल में मंगलवार को स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिखी। दुकानें और बाजार फिर से खुले। यातायात फिर से बहाल हो गया। स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई। हालांकि उपस्थिति कम रही।
सरकार की चेतावनी और भविष्य की योजना
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की घटनाओं को दोहराने नहीं दिया जाएगा। आरोपियों पर एनएसए लगाने की तैयारी है। न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त रमेश राघव और उनकी टीम को सुरक्षा मुहैया कराई गई है। भविष्य में इस प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए समुदाय आधारित शांति समितियां बनाई जाएंगी।
संभल हिंसा ने कानून और व्यवस्था की बड़ी चुनौती पेश की है। प्रशासन और पुलिस की तेज कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि योगी सरकार दंगाइयों और हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएगी।
शांति और स्थिरता की दिशा में उठाए गए ये कदम न केवल स्थिति को सामान्य बनाने में मदद करेंगे। बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक नजीर भी बनेंगे।












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