Video : नदी में तैरते हुए पुजारी तक आती है साढ़े 7 किलो की नृसिंह मूर्ति, देखने के लिए उमड़ता है जनसैलाब
देवास, 6 सितंबर : धार्मिक मान्यताओं में ऐसा कहा जाता है कि, भगवान अपने भक्त की एक पुकार पर उस तक पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं भगवान से जुड़े कई चमत्कार हमने पहले भी देखें और सुने हैं, लेकिन मध्यप्रदेश के देवास जिले में डोल ग्यारस यानी जलझूलनी एकादशी पर धर्म और आस्था की ऐसी तस्वीर देखने मिलती है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग देवास जिले के हाटपिपलिया आते हैं। यहां भगवान नृसिंह की साढ़े 7 किलो वजनी मूर्ति है,जो पुजारी के पानी में छोड़ने के बाद तैरती हुई फिर पुजारी तक पहुंच जाती है।
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हर साल होता है चमत्कार
हाटपिपलिया के भमोरी में यह चमत्कार हर साल डोल ग्यारस के पर्व पर देखने मिलता है, जहां भगवान नृसिंह की प्रतिमा को तीन बार नदी में तैर आया जाता है। ऐसा दावा है कि, प्रतिमा पानी में तैरती है, और नदी के बहाव की उलटी दिशा में तैरते हुए पुजारी तक पहुंच जाती है। प्रतिमा के तैरने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि, प्रतिमा के तैरने पर साल की खुशहाली का अंदाजा लगाया जाता है। वहीं इस चमत्कार को देखने दूर-दूर से भक्त हाटपिपलिया पहुंचते हैं।

बेहद पुराना है प्रतिमा का इतिहास
जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों की मानें तो भगवान नृसिंह की इस प्रतिमा का इतिहास काफी पुराना है, जहां कुछ लोग इसे लगभग 100 साल पुराना इतिहास भी बताते हैं। ऐसा बताते हैं कि, भादो मास के शुक्ल पक्ष की जलझूलनी एकादशी यानी डोल ग्यारस पर भगवान नृसिंह की प्रतिमा नदी में तैरने की परंपरा वर्षों से कायम हैं, जहां इस परंपरा का निर्वहन आज भी ग्रामीणों और रियासत के पुजारी की ओर से किया जाता है।

अबकी बार भी हुआ चमत्कार
जानकारी के मुताबिक नृसिंह मंदिर के पुजारी रमेशचंद्र वैष्णव ने श्रद्धालुओं की भावना को ध्यान में रखते हुए बताया कि, भगवान नृसिंह की मूर्ति दो बार तैरी है। मंदिर के ही पुजारी गोपाल दास वैष्णव के मुताबिक करीब 250 वर्षों से हमारे पूर्वजों द्वारा भगवान नृसिंह की मूर्ति नदी में तैराई जाती रही है। इस चमत्कार को देखने दूर-दूर से श्रद्धालु हाटपिपलिया आते हैं। इतना ही नहीं इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं, जहां जनप्रतिनिधि भी नजर आते हैं।












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