Ujjain: नए साल के पहले दिन महाकाल दर्शन का बना रिकॉर्ड, 4 लाख से ज्यादा भक्तों ने लिए दर्शन
मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मन्दिर मे सुबह 4 बजे के पूर्व से ही श्री महाकालेश्वर भगवान जी के दर्शन हेतु दर्शनार्थी गण कतारबद्ध हो गए थे।
मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अनुकूल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि, कम समय मे श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन हो, इसलिए चाक-चौबंद व्यवस्थाए की है। प्रातः चलित भस्मआरती में लगभग 18 हज़ार दर्शनार्थियों ने दर्शन किये।

प्रातः 04 से अभी तक लगभग 04 लाख 38 हज़ार दर्शनार्थियों ने श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन किये।अभी तक प्रोटोकॉल दर्शन में शीघ्र दर्शन से रुपये 03 लाख 67 हजार 750 रुपये की आय हुई है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा दर्शनार्थियों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है। श्री महाकालेश्वर मंदिर दर्शन व अन्य जानकारी एवं शिकायत के लिये मंदिर प्रबंध समिति की वेबसाइट www.shrimahakaleshwar.com के साथ मंदिर के टोल फ्री नंबर 18002331008 से संपर्क कर सकते है।
उज्जैन में नए साल की शुरुआत बाबा महाकाल की भस्मारती से की गई। देश भर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्मारती में शामिल होकर नए वर्ष की मंगलकामना की है।
नव वर्ष के अवसर पर बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया और महाआरती हुई। ऐसी मान्यता है की बाबा महाकाल की भस्मारती की एक झलक पाने से हर व्यक्ति, विशेष हो जाता है।
उज्जैन में नए साल के पहले दिन श्री महाकालेश्वर मन्दिर में सुबह 6 बजे के पूर्व से ही श्री महाकालेश्वर भगवान जी के दर्शन हेतु दर्शनार्थी गण कतारबद्ध हो गए थे। मंदिर प्रबंध समिति ने जानकारी देते हुए बताया कि, कम समय मे श्री महाकालेश्वर भगवान के दर्शन हो, इसलिए चाक-चौबंद व्यवस्थाए की है।
महाकाल दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त दूर दराज से मंदिर पहुंचे थे, जहां भक्तों ने बताया कि, उनके दर्शन होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। इतनी भीड़ में इतने आराम से दर्शन महाकाल के हुए हैं, जैसे मानों यह भगवान की ही कोई लीला या चमत्कार हो।
विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में नया साल अनूठे अंदाज में मनाया गया। यहाँ देश के कोने-कोने से आए श्रधालुओ ने सुबह 4 बजे महाकाल की भक्ति में लीन होकर अपने नए साल की शुरुआत की है। नए साल की पहली सुबह में बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक हुआ अर्थात् दूध, दही, घी, शकर व शहद से बाबा को नहलाया गया। उसके बाद चंदन का लेपन कर सुगन्धित द्रव्य चढ़ाए और भाँग से शृंगारित किया गया। इस बीच पंडितो द्वारा मंत्रोचारण किए गए।
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