Kanwar yatra 2023 की तैयारी, भगवान महाकाल को जल अर्पित करने के मिलने लगे आवेदन
धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण माह की तैयारी शुरू हो गई है, जहां इसी के मद्देनजर लगातार शासन-प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। अबकी बार श्रावण मास की शुरुआत 4 जुलाई से होगी, जहां श्रवण का पहला सोमवार 10 जुलाई को आ रहा है। अबकी बार अधिक मास होने के चलते श्रावण माह दो महीने तक का रहेगा।
श्रावण माह में कावड़ यात्री भगवान महाकालेश्वर को जल अर्पण करने के लिए पहुंचते हैं, जहां कावड़ यात्रियों की ओर से मंदिर में प्रवेश को लेकर अनुमति के आवेदन दिए जाने शुरू हो चुके हैं। वहीं अबकी बार कावड़ यात्रियों के लिए मंदिर में किस तरह की व्यवस्था रहेगी, फिलहाल इसे लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन अबकी बार बड़ी संख्या में कावड़ यात्रियों के महाकालेश्वर मंदिर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

तैयारियों का सिलसिला जारी है
धार्मिक नगरी उज्जैन में कलेक्टर कुमार पुरूषोत्तम और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बुधवार को प्रशासनिक संकुल भवन के सभाकक्ष में आगामी श्रावण-भादौ मास-2023 में भगवान महाकालेश्वर के दर्शन, भगवान महाकालेश्वर की निकलने वाली सवारी और नागपंचमी पर्व पर की जाने वाली दर्शन व्यवस्था की समीक्षा हेतु बैठक की थी। उल्लेखनीय है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भादौ मास 4 जुलाई 2023 से प्रारंभ होकर 11 सितम्बर 2023 तक मनाया जाएगा। बैठक में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक संदीप सोनी द्वारा पावर पाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
अबकी बार निकलेंगी 10 सवारियां
आयोजित बैठक में बताया गया कि, इस बार अधिकमास होने के कारण भगवान महाकालेश्वर की 10 सवारियाँ निकाली जायेंगी। आगामी 10 जुलाई को श्रावण मास की प्रथम सवारी निकाली जायेगी। आगामी 21 अगस्त सोमवार को नागपंचमी पर्व भी रहेगा तथा सवारी भी निकाली जायेगी और 11 सितम्बर को शाही सवारी निकाली जायेगी। बैठक में जानकारी दी गई कि श्रावण-भादौ मास में भगवान महाकालेश्वर की भस्मार्ती 4 जुलाई 2023 से 11 सितम्बर 2023 तक प्रात: कालीन पट खुलने का समय प्रात: 3 बजे होगा तथा प्रत्येक सोमवार प्रात: 2.30 बजे होगा। भस्मार्ती के दौरान कार्तिकेय मण्डपम् की अंतिम 3 पंक्तियों से श्रद्धालुओं के लिये चलित भस्मार्ती दर्शन व्यवस्था की जायेगी ताकि अधिक से अधिक लोगों को दर्शन हो सके।
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