Chandra Grahan 2022 : सूर्य हो या चंद्र ग्रहण बंद नहीं होते महाकाल मंदिर के कपाट, ये है बड़ी वजह
कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगे साल के आखिरी चंद्र ग्रहण का सूतक काल जारी है। चंद्र ग्रहण को भारत देश के कुछ हिस्से में भी देखा जा सकेगा। सूर्य हो या चंद्र ग्रहण इस दौरान पूजा पाठ करने पर भी मनाही होती है। ग्रहण के नियम सूतक काल लगते ही शुरू हो जाते हैं। ग्रहण काल के दौरान देशभर में स्थित लगभग सभी मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं, लेकिन धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर मंदिर के कपाट ग्रहण काल के दौरान बंद नहीं होते, मान्यता है कि मंदिर में ग्रहण का कोई असर नहीं होता। यही कारण है कि, ग्रहण काल के दौरान भी भगवान महाकाल मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। ग्रहण काल के बाद मंदिर का शुद्धिकरण होता है, और फिर भगवान का पूजन होता है।

कुछ ऐसी है मान्यता
ग्रहण काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद नहीं होते, लेकिन पूजा-पाठ के समय में कुछ बदलाव जरूर कर दिया जाता है, जहां गर्भ गृह में श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं दिया जाता तो वहीं इस दौरान होने वाली आरती का समय भी परिवर्तित कर दिया जाता है। वहीं ग्रहण काल समाप्त हो जाने के बाद मंदिर परिसर को धोने की भी परंपरा है, जहां ग्रहण काल समाप्त होते ही मंदिर से जुड़े कर्मचारी मंदिर परिसर को धोने का कार्य करते हैं। वहीं इसके बाद भगवान महाकालेश्वर की आरती होती है। ग्रहण काल के दौरान भले ही गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होता, लेकिन आम भक्तों के दर्शन खुले रहते हैं।
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चंद्र ग्रहण पर रहेगी ऐसी व्यवस्था
जानकारी के मुताबिक 8 नवंबर की दोपहर से चंद्र ग्रहण लग रहा है, जहां भारत में चंद्रग्रहण शाम 5:40 पर दिखाई देगा। वैज्ञानिक लिहाज से ग्रहण को खगोलीय घटना माना जाता है तो वहीं इसका धार्मिक महत्व भी होता है। यही कारण रहता है कि, ग्रहण काल के दौरान पूजा पाठ नहीं की जाती। उधर, चंद्रग्रहण होने के चलते संध्या के समय महाकाल मंदिर के गर्भ गृह में किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा, क्योंकि ग्रहण काल के दौरान भगवान को स्पर्श नहीं किया जाता है, लेकिन आम श्रद्धालुओं के दर्शन खुले रहेंगे। वहीं ग्रहण काल समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर का शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद भगवान महाकाल को भोग लगाकर संध्या पूजन होगा।

भारत के कुछ हिस्सों में दिखेगा चंद्र ग्रहण
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को भारत के ज्यादातर हिस्सों में दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण होने के चलते सूतक काल जारी है, तो वहीं भारत में ग्रहण दिखाई देने के कारण सूतक काल मान्य है। ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है, अबकी बार चंद्रग्रहण मेष राशि और भरणी नक्षत्र में लग रहा है। भारत में चंद्र ग्रहण पूर्वी क्षेत्रों जैसे ईटानगर, कोलकाता, पटना और रांची में दिखाई देगा, जहां यह चंद्रग्रहण पूर्ण रुप से दिखाई दे सकता है, तो वहीं ही भारत के अधिकतर हिस्सों में चंद्रग्रहण आंशिक रूप से होगा।












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