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Anant Ambani-Radhika Merchant का सगाई समारोह श्रीनाथजी मंदिर राजस्थान में ही क्‍यों हुआ?

सगाई के बाद अनंत अंबानी व राधिका मर्चेंट ने अपनी होने वाली शादी के लिए भगवान श्रीनाथजी से आशीर्वाद लिया। पूरा अंबानी परिवार की लंबे समय से श्रीनाथजी मंदिर में गहरी आस्‍था है। अंबानी परिवार किसी भी शुभ काम करने से पहले र

Anant Ambani-Radhika Merchant Love Story

Anant Ambani-Radhika Merchant Engagement : राजस्‍थान के राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी और उनके परिवार के लिए एक बार फिर से विशेष दिन का गवाह बना है। श्रीनाथजी परिसर में गुरुवार को मुकेश अंबानी व नीता अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी की राधिका मर्चेंट से सगाई हुई। अंनत अंबानी व राधिका ने परिवार के सदस्‍यों व दोस्‍तों की मौजूदगी में मंदिर में पारम्‍परिक रोका (सगाई) समारोह हुआ।

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    अनंत अंबानी व राधिका मर्चेंट की शादी जल्‍द

    अंबानी परिवार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि सगाई के बाद अनंत अंबानी व राधिका मर्चेंट ने अपनी होने वाली शादी के लिए भगवान श्रीनाथजी से आशीर्वाद लिया। पूरा अंबानी परिवार की लंबे समय से श्रीनाथजी मंदिर में गहरी आस्‍था है। अंबानी परिवार किसी भी शुभ काम करने से पहले राजस्थान के नाथद्वार जरूर आते हैं।

    ambani family

    श्रीनाथजी परिवार में अंबानी परिवार की आस्‍था

    मुकेश अंबानी के नाना बनने पर गुरुवार को नाथद्वारा में बधाई गान हुआ, जिसमें आदिवासियों को अंबानी परिवार की ओर से विशेष भोजन करवाया गया। अटूट आस्था के चलते हर शुभ काम से पहले श्रीनाथ मंदिर के दर्शन करते हैं। इसी साल अक्‍टूबर में रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड ने 5जी सेवा की शुरुआत भी श्रीनाथजी मंदिर से की थी।

    इससे पहले बेटी ईशा अंबानी की शादी का पहला न्योता भी श्रीनाथ जी को दिया। इतना ही नहीं उदयपुर में हुए प्री वेडिंग सेरेमनी की शुरुआत में श्रीनाथ की प्रतिमा के सामने भजन पर नीता अंबानी ने नृत्य किया।

    Anant Ambani-Radhika Merchant Roka

    श्रीनाथजी मंदिर नाथद्वारा का इतिहास

    मंदिर की वेबसाइट के अनुसार श्रीनाथजी की मूर्ति को साल 1665 में वृंदावन के पास गोवर्धन से राजस्थान लाया गया था। तब मूर्ति की पूरे मेवाड़ 32 माह तक यात्रा निकाली गई थी। इसके बाद मूर्ति की नाथद्वारा में स्‍थापना का फैसला लिया गया है, जो आज श्रीनाथजी मंदिर के नाम से पहचानी जाती है।

    Shrinathji temple Rajasthan

    नाथद्वारा में श्रीनाथजी की प्रतिमा स्‍थापित करने के फैसले के बारे में एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि जब रथ में रखी भगवान की प्रतिमा मेवाड़ की यात्रा पर थी तब रथ का पहिया सीहर नामक स्थान पर कीचड़ में फंस गया था। राणा ने इसे एक दिव्य संकेत के रूप में देखा कि भगवान कृष्ण यहाँ बसना चाहते हैं, और इस प्रकार इस स्थान पर एक मंदिर और पवित्र नगरी का निर्माण किया गया, आज नाथद्वारा के नाम से जाना जाती है।

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