तीर्थक्षेत्र कुंडेश्वर: नीलगाय—चीतलों के घर खैराई के जंगल में बनेगा ईको पर्यटन क्षेत्र

खैराई के जंगलों में लोग अब चीतल और नीलगाय को नजदीक से निहार सकेंगे। यहां पिकनिक स्पॉट, नौकायन और साइकिलिंग भी जल्द ही कर सकेंगे। मप्र सरकार टीकमगढ़ के इस इलाके को जल्द ही ईको पर्यटन क्षेत्र बनाएगी।

प्रतिकात्मक फोटो

Kundeshwar: बुंदेलखंड में टीकमगढ़ जिले के कुंडेश्वरधाम के से सटे खैराई के जंगलों को जल्द ही देश-प्रदेश स्तर पर पहचान मिल सकेगी। इस इलाके को चीतल और ​नीलगाय के घर के रुप में पहचाना जाता है। सरकार इस क्षेत्र को अब ईको पर्यटन क्षेत्र के रुप में विकसित करने जा रही है। इसके लिए वन विभाग ने करीब 4 करोड़ 9 लाख रुपए का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। बता दें कि यहां ईको पर्यटन क्षेत्र के लिए कई वर्षो से मांग उठती रही है।

केंद्रीय सामाजिक एवं अधिकारिता न्याय विभाग के मंत्री वीरेंद्र खटीक और स्थानीय विधायक राकेश गिरी ने तीर्थक्षेत्र कुंडेश्वरधाम के पास स्थित 150 हेक्टेशर के जंगलों को ईको पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को पत्र लिखे थे, इसके बाद मप्र शासन ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। शासन ने स्थानीय वन विभाग से उसके अधीन इन जंगल और यहां की विशेषताओं, भौगोलिक स्थिति सहित तमाम जानकारी के साथ प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। वन विभाग ने करीब 150 हेक्टेयर में फैले खैराई के जंगलों को ईको पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।

neelgai

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      पूर्व में यहां अनुभूति पार्क बनाया जा रहा था
      विभाग से मिली जानकाीर अनुसार खैराई के जंगलों को पूर्व में अनुभूति पार्क बनाया जा रहा था। स्थानीय स्तर पर वन विभाग यहां पहले से काम करता रहा है। यह इलाका करीब 150 हेकटेयर में फैला है और यहां नीलगाय और चीतल काफी संख्या में मौजूद हैं। पूर्व में यहां से चीतलों को ओरछा भी शिफ्ट किया जा चुका है। यहां उनका प्राकृतिक आवास है। जिला मुख्यालय से महज इसकी दूरी महज 8 किलोमीटर के आसपास होगी। यहां लोग पहले से ही पिकनिक व वन्य नजारों का आनंद लेने के लिए आते रहे हैं।

      प्रस्ताव में यह शामिल किया गया है
      खैराई के जंगलों को ईको पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिए प्रस्ताव में वन विभाग ने कई चीजों को शामिल किया है। मसलन यहां पिकनिक स्पॉट विकसित करने की योजना है। यहां की बेस्ट लोकेशन पर ऐसे स्थान विकसित करना जहां से वन्य जीवों को डिस्टर्व किए बगैर देखा जा सके। यहां पक्षी दर्शन, वन्य प्राणी दर्शन, तालाब इलाके में नौकायन, फोटोग्राफी स्पॉट, सेल्फी प्वाइंट, ​साइकिलिंग के लिए ट्रैक जैसी व्यवस्थाएं की जाएंगी।

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