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भारत में महिला पायलटों की ऊंची उड़ान

विश्व में महिला पायलट्स की हिस्सेदारी में भारत सबसे आगे है. यानी भारत की महिलाएं आज पायलट के रूप में अपने करियर को चुनने के लिए किसी भी देश से ज्यादा आगे हैं.

किसी महिला का पायलट बनना निश्चित रूप से असामान्य माना जाता है. भारत में इतनी महिलाएं पायलट कैसे बन रही हैं? इस सवाल का जवाब दो भारतीय महिला पायलटों ने दिया है जो कई दशकों तक भारत में विमान उड़ाती रहीं.

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वे कहती हैं कि पायलट बनने वाली महिलाओं की अधिक संख्या आंशिक रूप से वित्तपोषण, छात्रवृत्ति और विस्तारित परिवारों के समर्थन के कारण है.

विमानन में आज भी बहुत कम हैं महिलाएं

हवा में भारतीय महिलाओं की ऊंची उड़ान

दुर्बा बनर्जी भारत की वाणिज्यिक एयरलाइन 'इंडियन एयरलाइंस' की पहली महिला पायलट थीं, जो बाद में 'एयर इंडिया' में विलय हो गई. उन्होंने 1966 में यह उपलब्धि हासिल की. वहीं कैप्टन निवेदिता भसीन दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला जेट कमांडर बनीं, और ड्रीमलाइनर, बोइंग 787 को उड़ाने वाली दुनिया की पहली महिला एयरलाइन पायलट बनीं. हाल ही में, कैप्टन निवेदिता भसीन 37 वर्षों से अधिक समय के शानदार एयरलाइन फ्लाइंग करियर के बाद रिटायर हुई हैं.

वह बताती हैं कि कभी-कभी उनको अपने छह साल के छोटे बच्चे को देखे हुए दो सप्ताह बीत जाते थे. भसीन कहती हैं कि उन्हें अपने आपको साबित करने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ती थी.

अब स्थिति आसान

भसीन का कहना है कि आज भारत में महिला पायलटों के लिए यह स्थिति आसान है. उनका कहना है कि कई भारतीय एयरलाइंस महिला पायलटों के लिए विशेष नीतियां लेकर आई हैं, जो उनके लिए पेशे को चुनना आसान बनाती हैं. साथ ही वे अपनी नौकरी और पारिवारिक जीवन को बैलेंस कर पाती हैं.

दक्षिण एशियाई देश भारत में महिलाओं का जीवन आसान नहीं है. महिलाओं की मृत्यु दर पुरुषों की तुलना में अधिक है. लड़कियों के अपनी शिक्षा पूरी किए बिना स्कूल छोड़ने की सबसे अधिक संभावना है और बहुत कम महिलाएं औपचारिक रूप से कार्यरत हैं. इन सभी स्थितियों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय महिला एयरलाइन पायलट सोसायटी के अनुसार, भारत में दुनिया भर में पुरुष पायलटों की तुलना में महिला पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक है.

भारत में कुल पायलट्स में से 12.4 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है, जबकि विश्व की सबसे बड़े एविएशन मार्केट माने जाने वाले अमेरिका में यह साढ़े पांच प्रतिशत है. वहीं ऑस्ट्रेलिया में साढ़े सात प्रतिशत, कनाडा सात प्रतिशत, जर्मनी में करीब सात प्रतिशत और यूके में करीब पांच प्रतिशत है. यह डेटा 100 से अधिक एयरलाइनों से जुटाया गया है.

जर्मन एयरलाइंस लुफ्थांसा इन आंकड़ों से वाकिफ है. इसके एक प्रवक्ता ने इस बारे में कहा, "दुख की बात है कि यह संख्या दशकों से एक ही स्तर पर बनी हुई है. हालांकि, हम महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव अवसर का उपयोग करते हैं."

अब विमान उड़ाएंगी सऊदी महिलाएं

जर्मनी में कम क्यों महिला पायलट

उन्होंने आगे कहा, "इस समस्या से निपटने के लिए लुफ्थांसा महिलाओं के साथ समन्वित बातचीत कर रही है. हम अधिक से अधिक महिलाओं को इस पेशे की ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि उन्हें इस पेशे को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. हम ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते हैं जहां महिला पायलट बनने की इच्छुक महिलाओं को पेशे के बारे में जानकारी दी जाती है. विशेष रूप से वे इन महिलाओं को कॉकपिट के अंदर के जीवन, माहौल और पायलटों की जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करने की कोशिश करते हैं और उन्हें हमारे फ्लाइंग स्कूल में प्रशिक्षण लेने के लिए राजी करते हैं."

एयरलाइंस देती हैं कई विकल्प

भारतीय एयरलाइन विस्तारा महिला पायलटों को 6 महीने की पैरंटल लीव देती है. वहीं इंडिगो पांच साल से कम उम्र के बच्चों वाली महिला पायलट को हर महीने दो सप्ताह की छुट्टी लेने का विकल्प देती है, जबकि स्पाइसजेट महिला पायलटों को अपना घरेलू बेस चुनने की अनुमति देती है और जिनके बच्चे छोटे हैं वे ग्राउंड स्टाफ के रूप में भी काम करने का विकल्प चुन सकती हैं.

एए/वीके (डीपीए)

Source: DW

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