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दहेज विरोधी कानून पर अपने ही फैसले से सहमत नहीं सुप्रीम कोर्ट, गिरफ्तारी से नहीं मिलेगी राहत

Written By: Mohit
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    नई दिल्लीः दहेज विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले से खुश नहीं है। कोर्ट ने अपने ही आदेश की समीक्षा करने को कहा है। शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय बेंच ने उस फैसले पर असहमति जताई, जिसमें पति और ससुरालवालों को गिरफ्तारी से राहत दी गई थी।

    Supreme Court To Review Its Verdict Which Diluted Anti-Dowry Law Sec 498A

    बता दें, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की दो सदस्यीय बेंच ने 27 जुलाई को सेक्शन 498 ए के तहत आरोपों की जांच के बिना तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी।

    शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे उत्पीड़न का शिकार महिलाओं के अधिकार कमजोर हुए हैं। अपने ही आदेश के खिलाफ बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून महिलाओं के अधिकारों को कम कर देता है।

    इस साल जुलाई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करेगी, इस फैसले में कहा गया था दहेज उत्पीड़न के मामलों में एक पैनल की पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद ही गिरफ्तारी की जा सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट की एक बैंच ने राजेश बेंच ने राजेश शर्मा बनाम यूपी राज्य मामले में गाइडलाइंस जारी की थी, जिसमें बेंच ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए।

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    English summary
    Supreme Court To Review Its Verdict Which Diluted Anti-Dowry Law Sec 498A

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