कश्मीर ने ओढ़ी चिनार की खूबसूरत चादर, यह कश्मीर है
श्रीनगर। कश्मीर में पतझड़ आया है और चिनार के हरे पत्ते लाल हो गए हैं और घाटी इनके साथ बेहद खूबसूरत दिख रही है। इस मौसम का लुत्फ उठाने के लिए सैलानी भी यहां पहुंच चुके हैं सच में यह जन्नत है और वादी-ए-कश्मीर है इसी लिए तो हर कोई कहता है की यह कश्मीर है यह कश्मीर है।

कश्मीर की इन हंसीन और दिलकश वादी फितरत की फयाज़ी का सजरा है ठुमक ठुमक बहती नदयां, तरल-तरल बहते नदी और नाले और संगीत बिखेरते इस सरज़मीन में हर मौसम की अपने अलग रंगत रहती है, सरमा में जहाँ जिस और भी नज़र जाये वहां तक सफ़ेद रंग की बर्फ के चादर कुदरत ने बिछा रखी होती है और उसके साथ बहार के आमद होते ही वादी गुलपोश में जहाँ टुलिप्स यानि गुले लाला के शुगुफे बहार आने की खबर देते हैं।
बहार में हर सो रंगों के फूल और पोधे मानो कुदरत के नकाशी का मानिंद नज़र आता है, वही बाहर के बाद शरू होता है मौसम इ खिजान हालाँकि बाकि जगहों में तीन मौसम ही नज़र आते है लेकिन इस वादी में खिजान बाकी तीन मौसमों से कई ऐतबार से सबकत लेता है।

जहाँ एक तरफ पाम्पोर के साथ कई इलाकों में ज़ाफ़रान के फूल अपने पुरे झोबन पे होते हैं, वहीं आसमान के साथ बातें करते कद आवर और शादाब दरख़्त हर मोड़ हर मरहले पे एक शफीक माँ की तरह हर जगह सहलाता है। बहलाता है नदी किनारा हो या मर्गुजार खीत खलयान या बाग बगीचा हर जगह यह दरख्त पहरादार के तरह नज़र आता है। यहाँ तक की जुल्सती गर्मी में भी यह अपने आंचल में सुख और चैन आता करता है, चिनार बिलकुल सही पहचाना आप ने यह कोई और पेड़ नहीं बल्कि चिनार ही है।
मुग़ल भागात हो या जील झरने, दरगाहें हो या फिर किसी और मुजाहिब के मुकाम चिनार के बिना अधूरे हैं। यहाँ तक कश्मीर के डल झील के बीचों बीच है, जजीरा नेहरु पार्क, सोना लंक कबूतर खाना और चार चिनार,चार चिनार जैसे खुद ही पता लगता है की यहाँ पे चार चिनार है।
चिनार के बारे में जहाँ यह कहा जाता रहा है के यह मुग़लों के साथ ही वरदे कश्मीर हुआ है, लेकिन उस से पहले लल देद के वाखो में भी इसका ज़िक्र है, तजरुबात और मुशादात के बुनियाद पे जो वाल्टर लॉरेंस जो कुछ लिखा है। उसकी सदाकत आज भी अपनी जगह कायम नहीं है मगर जहाँ उन्होंने सुनी सुनाई पर ऐतबार करके चिनार को मुग़लों की देन घरदान है वह पे उनको चुक हो गयी है और उसे चुक ने इस फ़रीज़े को हवा दी है कि चिनार कश्मीर में मुग़लों के वसलत से पहुंचा है।
लोगो ने भी लॉरेंस के सुनी सुनाई पर ऐतबार करके इतनी दफा दुहराया की अब झूट भी सदाक़त नज़राने लगी है हालाँकि खुद मुग़ल शहनशाहो के बयानात भी इस मफ्रोज़े की नफी करते है, मुग़लों के कश्मीर आने से पहले कश्मीर में कद अवर खायार मजूद थे।












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