'गोल्डन गर्ल' अवनी लेखरा ने लगातार 2 गोल्ड जीतकर रचा इतिहास, पहले टोक्यो अब पेरिस में लहराया तिरंगा
Paralympics 2024 Avani Lekhara: भारत ने पेरिस पैरालिंपिक 2024 में शानदार शुरुआत की है। दूसरे दिन निशानेबाज अवनी लेखरा ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है। यह उनका लगातार दूसरा पैरालिंपिक है, जिससे वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गई हैं। यहां तक पहुंचने का अवनी का सफर आसान नहीं रहा है। इस दौरान उन्होंने रास्ते में आने वाली कई चुनौतियों को पार किया है।
11 साल की उम्र में हुई थी चोटिल
11 साल की उम्र में अवनि एक कार दुर्घटना में घायल हो गई थी, जिसके कारण उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी। जिसके कारण उन्हें व्हीलचेयर पर निर्भर होना पड़ा। इस झटके के बावजूद उनके पिता ने उनकी पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा 'ए शॉट एट हिस्ट्री' से प्रेरित होकर अवनि को शूटिंग में रुचि पैदा हुई और उसने इसे अपना करियर बनाने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया।

साल 2015 में ट्रेनिंग शुरू की
अवनि ने साल 2015 में अपनी ट्रेनिंग शुरू की और पहली बार राजस्थान स्टेट चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। उनका प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने अपनी पहली ही प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। साल 2016 से 2020 तक उन्होंने शानदार प्रदर्शन जारी रखा और नेशनल चैंपियनशिप में पांच गोल्ड मेडल जीते।
टोक्यो ओलंपिक में भी किया था कमाल
अपनी राष्ट्रीय सफलता के अलावा अवनि ने टोक्यो ओलंपिक में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल (SH1) स्पर्धा में स्वर्ण और 50 मीटर एयर राइफल (SH1) में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 2022 में विश्व कप में दो स्वर्ण और उसी वर्ष पैरा एशियाई खेलों में एक और स्वर्ण पदक भी जीता।
पेरिस पैरालिंपिक में रचा इतिहास
अवनि लेखरा ने पेरिस पैरालिंपिक 2024 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्पर्धा में 249.7 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता। इस जीत ने न केवल भारत की पदक तालिका में इज़ाफा किया, बल्कि वैश्विक मंच पर अवनि की शीर्ष पैरा शूटर के रूप में स्थिति को भी मजबूत किया। SH1 श्रेणी में वे एथलीट शामिल हैं जिनके हाथ या पैर में कोई विकलांगता है या जिनके हाथ नहीं हैं। इन चुनौतियों के बावजूद अवनि ने लगातार दमदार प्रदर्शन किया है।












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