'देश के लिए मुझे अभी बहुत कुछ करना है', 19 साल की उम्र में किसान के बेटे ने तोड़ा नेशनल रिकॉर्ड
National Games, Dev Kumar Meena: नेशनल गेम्स में कई युवा एथलीट अपना दमखम दिखा रहे हैं। भारत पोल वॉल्ट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी सफल नहीं रहा है। भारत के सबसे युवा राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक 19 वर्षीय देव कुमार मीणा ने अब इस खेल में बड़ा रिकॉर्ड कायम किया है। कई खिलाड़ियों के लिए यह गेम्स करियर के लिहाज से काफी अहम है। यहां किए गए प्रदर्शन उनके भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।
देव मीणा ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड (National Games, Dev Kumar Meena)
नेशनल गेम्स 2025 में पोल वॉल्ट प्रतियोगिता की अपनी दसवीं छलांग पर देव मीणा ने एक नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने कुल तीन छलांगे लगाई। हर अगली छलांग के साथ वह गांधीनगर में 2022 के राष्ट्रीय खेलों में एस. शिवा द्वारा बनाए गए 5.31 मीटर के नेशनल रिकॉर्ड के करीब पहुंच गए। 5.25 मीटर पर दो असफल प्रयासों के बाद उन्होंने उस मार्क को पार कर लिया और फिर 5.32 मीटर पर बार सेट किया।

गोल्ड मेडल जीतकर किया बड़ा कमाल
मध्य प्रदेश के देव कुमार मीणा ने सोमवार को पुरुष पोल वॉल्ट में 5.32 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ राष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इससे पहले देव का निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 5.20 मीटर था जो उन्होंने पिछले साल पटना में इंडिया ओपन अंडर-23 प्रतियोगिता जीतने के दौरान बनाया था। इस जीत के बाद देव मीणा बेहद खुश नजर आए और उन्होंने वनइंडिया से बातचीत करते हुए कुछ बातों का जिक्र किया।
देव कुमार मीणा ने कोच को लेकर कही बड़ी बात
जीत के बाद मध्य प्रदेश के देव कुमार मीणा ने कहा कि मेरा लक्ष्य इससे ज्यादा का था। मैं हमेशा उम्मीद से ज्यादा की सोचता हूं। मुझे अभी देश के लिए काफी कुछ करना है। उन्होंने कहा कि ये बस आज की खुशी है। आगे कल के लिए फिर से नई तैयारी करनी है। स्पेनिश कोच के साथ काम करने के एक्सपीरियंस के बारे में बात करते हुए मीणा ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कोई अंतराष्ट्रीय कोच उन्हें ट्रेनिंग देने का काम करेगा।
कोच के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कोच से उन्होंने काफी कुछ सीखा है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि हम दोनों को ही कम इंग्लिश आती है लिहाजा बात करने में आसानी होती है वैसे भी कोच के इशारों से ही अपनी अधिकतर बात को समझा देते हैं। बता दें कि देव कुमार मीणा के पिता मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव से किसानी करते हैं। उन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए घरवालों का भी शुक्रिया अदा किया।












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