ऑक्टोपस से लेकर सटोरियों तक: विश्वकप विजेता को भांपने के टोटके

फ्रांस फ़ीफ़ा विश्वकप का मौजूदा विजेता है
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फ्रांस फ़ीफ़ा विश्वकप का मौजूदा विजेता है

सट्टेबाज़ी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इंवेस्टमेंट बैंकर और भविष्यवाणी करने वालों में कौन सी चीज कॉमन है?

ये काम करने वाले लोग अरबों डॉलर ख़र्च करके होने वाले फुटबॉल विश्वकप के नतीज़ों के सटीक अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं.

इनके मकसद भी अलग हैं. उदाहरण के लिए, सट्टेबाज़ इन सटीक अनुमानों की मदद से काफ़ी पैसे कमा सकते हैं.

वित्तीय संस्थाएं अपने फोरकास्टिंग मॉडल्स की शुद्धता दिखाने की कोशिश करती हैं जो कि सामान्य रूप से बाज़ार से जुड़े फेरबदल को लेकर अनुमान लगाते हैं.

लेकिन सामान्य रूप से 90 मिनट तक चलने वाले फुटबॉल के किसी भी मैच में अचानक होने वाले बदलावों की इतनी गुंजाइश होती है कि ऐसे फोरकास्टिंग मॉडल्स की शुद्धता प्रभावित होती है.

यही तर्क ब्राज़ील के एथोस सलोम जैसे तमाम भविष्य वक्ताओं पर लागू होता है. सलोम ने कोविड-19 महामारी से लेकर यूक्रेन पर रूसी हमले जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी करने का दावा किया है.

फुटबॉल मैच के नतीजों की ठीक-ठीक गणना उनकी कथित 'शक्तियों' को मान्यता दिला सकती है.

हमें पूर्व फुटबॉल खिलाड़ियों, कोच, और विशेषज्ञों की मंडलियों को भी नहीं भूलना चाहिए जो टीवी चैनलों पर टूर्नामेंट शुरू होते ही नज़र आने लगती हैं.

हालांकि, उनकी गणनाएं लगातार ग़लत साबित होती है.

दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से इन लोगों को एक जगह एक मंच पर लाने वाली चीज फुटबॉल विश्वकप ही है जो कि दुनिया में सबसे ज़्यादा देखा जाना वाला स्पोर्ट्स टूर्नामेंट है.

फुटबॉल विश्वकप करवाने वाली संस्था फ़ीफ़ा के मुताबिक़, इस बार पांच अरब लोग फुटबॉल विश्वकप के मैच देखेंगे.

लेनकास्टर यूनिवर्सिटी में आर्थिक विशेषज्ञ प्रोफेसर रॉबर्ट सिमन्स कहते हैं, "जुआ खेलने की आदत इंसान की आनंद की तलाश में रहने से जुड़ी हुई है, अब चाहें वो आनंद आर्थिक फायदे से जुड़ा हो या कुछ ज़्यादा रोमांच हो, फिर भले उसमें आर्थिक फायदा हो या नहीं."

विडंबना ये है कि विश्वपकप पूरी तरह से अनुमान लगाने से परे टूर्नामेंट भी नहीं है.

लेकिन अर्जेंटीना की सऊदी अरब से हार और जर्मनी की जापान से हार के बाद ये स्पष्ट हो गया है कि किसी भी अनुमान को मानना कितना जोख़िमभरा हो सकता है.

ये बात ज़हन में रखते हुए पढ़िए कि दुनिया भर में लोग किस तरह मैच शुरू होने से पहले अनुमानों को लेकर रुचि दिखाते हैं.

बीबीसी इनमें से किसी भी प्रक्रिया का समर्थन नहीं करता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुमान कितने सटीक

गणना
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गणना

एल्गोरिद्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि 18 दिसंबर को होने वाले फाइनल में किस देश की टीम ख़िताब उठाएगी.

डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र के ब्रितानी संस्थान एलन ट्यूरिंग इंस्टीट्यूट भी अनुमान लगाने वालों की फेहरस्ति में शामिल हो गया है.

हालांकि, अर्जेंटीना को लेकर लगाए गए अनुमान ठीक नज़र नहीं आ रहे हैं.

इस संस्थान ने अपने बयान में लिखा है कि 'हम किसी को भी ये सलाह नहीं देते कि वह हमारे अनुमानों के आधार पर सट्टेबाजी करे. आपका मॉडल चाहें जितना अच्छा हो लेकिन फुटबॉल का खेल आपको कभी भी चौंका सकता है.'

ये बात सही भी जान पड़ती है क्योंकि यूबीएस, आईएनजी से लेकर गोल्डमैन सैक्स जैसे वित्तीय संस्थानों के अनुमान पिछली दो विश्वकप प्रतियोगिताओं में ग़लत साबित हुए हैं.

इसमें लंदन स्थित कंपनी लिबरियम कैपिटल को अपवाद माना जा सकता है जिसके रणनीतिकार जोकिम क्लेमेंट ने एक ऐसी एल्गोरिद्म बनाई है जिसने साल 2014 में जर्मनी और 2018 में फ्रांस के जीतने का अनुमान लगाया था जो कि सही साबित हुआ.

लेकिन क्या ये सिर्फ़ चांस की बात थी. क्लेमेंट खुद कहते हैं कि चांस किसी भी दूसरी चीज़ से बड़ी भूमिका निभाता है.

वित्तीय क्षेत्र की ख़बरें देने वाले संस्था मार्केट वॉच से बात करते हुए उन्होंने कहा है कि उनका मॉडल किसी भी टीम के जीतने की सिर्फ़ 45 फीसद चांस तय करता है, शेष 55 फीसद सिर्फ किस्मत पर टिका होता है.

'भविष्यवाणी करने वाले' जानवर

पॉल नामक ऑक्टोपस
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पॉल नामक ऑक्टोपस

विश्वकप मैचों के नतीजों के लिए पांडा, अल्पाकास, फेरेट्स और ऊंटों जैसे जानवरों से सलाह ली जा रही है.

और इस चकल्लस के लिए पॉल नामक ऑक्टोपस को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

साल 2010 के विश्वकप में ऑक्टोपस 'पॉल' ने कुछ सटीक भविष्यवाणियां की थीं जिनमें स्पेन का विश्वकप जीतना भी शामिल था.

जर्मनी के शहर ओबेहॉज़न शहर का ऑक्टोपस पॉल को खाने के दो डिब्बे दिए जाते थे. दोनों डिब्बों में उन टीमों के झंडे लगे होते थे जिनका मैच होने वाला होता था.

इस ऑक्टोपस ने 14 में से 12 मौकों पर सही अनुमान लगाया था. दुख की बात ये है कि पॉल का विश्वकप के कुछ समय बाद निधन हो गया था.

हालांकि, वैज्ञानिक लगातार इस तरह की कथित शक्तियों पर सवाल उठाते रहे हैं. पॉल को लेकर भी वैज्ञानिकों में शक बना रहा.

आशंका ये है कि ऑक्टोपस संभवत: सीधी पट्टियों की बजाए आड़ी पट्टियों के प्रति आकर्षित होते हैं जो कुछ देशों के झंडों के प्रति उसके रुझान का कारण बयां कर सकती है.

सट्टेबाज़ों के अनुमान अक्सर ठीक होते हैं

ये किसी भी तरह से विश्वकप के नतीजों पर की जाने वाली सट्टेबाज़ी का समर्थन नहीं है.

लेकिन प्रोफ़ेसर सिमंस जैसे विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सट्टेबाज़ी करवाने वाली कंपनियां मैचों के नतीजों को समझने में काफ़ी तेज़ होती हैं.

वह कहते हैं, "कोई भी अनुमान पूरी तरह ठीक नहीं होता है. लेकिन बुकमेकर सूचनाओं के बेहतर स्रोत होते हैं. क्योंकि अगर उनके अनुमान ग़लत होंगे तो उन्हें इसका बड़ा आर्थिक ख़ामियाजा भुगतना होगा."

प्रोफ़ेसर सिमंस किसी भी मैच के संभावित नतीज़ों को वरीयता देने की ओर इशारा कर रहे थे.

उदाहरण के लिए, कुछ वेबसाइटों पर ब्राज़ील के जीतने की संभावनाएं ज़्यादा जताई जा रही हैं. और क्रोएशिया की सौ में से एक और क़तर की जीत संभावनाएं हज़ार में से एक हैं.

इन संभावनाओं का मकसद ये होता है कि सट्टेबाज़ जुआरियों से ज़्यादा पैसे कमाएं. ऐसे में संभावनाओं पर दांव खेलना भी सफ़लता की गारंटी नहीं है.

जीत में इतिहास और भूगोल की भूमिका

ब्राज़ील
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ब्राज़ील

साल 1930 में उरूग्वे में हुए पहले वर्ल्ड कप से लेकर अब तक काफ़ी बदलाव आ चुके हैं. अब ये किसी भी खेल के होने वाल वैश्विक टूर्नामेंटों से सबसे बड़ा है. एक नज़र डालिए इन तथ्यों पर

  • बीते 21 विश्व कपों में 79 टीमें हिस्सा लेती आ रही हैं. लेकिन सिर्फ़ आठ ही टीमें इसे जीतती रही हैं. ये हैं - ब्राज़ील (पांच बार), फ़्रांस, उरूग्वे और अर्जेंटीना ( दो बार) और इग्लैंड, स्पेन (एक बार).
  • 1978 के बाद सिर्फ़ तीन फ़ाइनल मुकाबलों में ऐसी टीमें पहुँची हैं जिन्होंने कभी विश्व कप नहीं जीता
  • लगातार दो बार सिर्फ़ ब्राज़ील जीता है.
  • सिर्फ़ ब्राज़ील, स्पेन और जर्मनी ने अपने महाद्वीप के बाहर विश्व कप जीता है.
  • कोई अफ़्रीकी टीम कभी क्वार्टरफाइनल से आगे नहीं गई है.
  • दक्षिण कोरिया एकमात्र एशियाई टीम है जो किसी सेमीफाइनल में पहुंची है.
  • स्पेन एकमात्र टीम जिसने अपना पहला मैच हारने के बावजूद 2010 में वर्ल्ड कप जीत लिया था.

मदद इटली और जर्मनी से मांगें

अर्जेंटीना
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अर्जेंटीना

आख़िर में एक और टोटका-

हमें जर्मन क्लब बेयर्न म्यूनिख़ और इटली के क्लब इंटर मिलान के बारे चर्चा करनी चाहिए.

1982 के बाद से इन दोनों क्लबों में से कम से कम एक खिलाड़ी फ़ाइनल में खेला है.

क्या क़तर में भी ऐसा होगा?

बेयर्न म्यूनिख़ के 17 खिलाड़ी टूर्नामेंट में हैं और इंटर मिलान के छह.

अर्जेंटीना के स्ट्राइकर लॉटेो मार्टिनेज़ इंटर मिलान के टॉप खिलाड़ियों में से एक हैं.

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