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PKL: गांव का 'नन्हा' कैसे बन गया कबड्डी का स्टार, जोश और जुनून से भर देगी नरेंद्र के संघर्ष की कहानी

हरियाणा के एक छोटे से गांव में नरेंद्र नाम का एक युवा लड़का, जिसे उसके छोटे कद के कारण प्यार से 'नन्हा' कहा जाता है, चुपचाप कबड्डी में भविष्य के लिए नींव रख रहा था। उसके शुरुआती दिन स्थानीय खिलाड़ियों को देखने और उनसे सीखने में बीते, उसने कभी नहीं सोचा था कि वह जल्द ही खेल में एक प्रमुख खिलाड़ी बन जाएगा।

नरेंद्र की जुनून और प्रतिभा ने न केवल उसे तमिल थलाइवाज के लिए एक प्रमुख खिलाड़ी बनाया, बल्कि प्रो कबड्डी लीग (PKL) में एक उभरता हुआ स्टार भी बनाया है, जो टीम के साथ अपने तीसरे सीज़न के लिए तैयार है। उनका सीज़न 19 अक्टूबर को तेलुगु टाइटन्स के खिलाफ मैच के साथ शुरू होगा।

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समर्पण और जुनून का प्रमाण है नरेंद्र की कहानी
नरेंद्र की कहानी समर्पण और जुनून की शक्ति का प्रमाण है। अपने गांव के कबड्डी के मैदानों पर एक शांत दर्शक से लेकर एक प्रसिद्ध एथलीट तक, उनकी यात्रा किसी प्रेरणादायक स्पोर्ट्स फिल्म की स्क्रिप्ट की तरह है।

नरेंद्र ने यूट्यूब पर पीकेएल के 'राइज ऑफ ए स्टार' इंटरव्यू में कहा कि, 'आज भी गांव में मेरे साथ खेलने वाले सभी लोग मुझे मेरे निकनेम 'नन्हा' से बुलाते हैं।' 'मैं बचपन में बहुत लंबा नहीं था, इसलिए यह नाम मेरे साथ जुड़ गया। अब मेरी लंबाई ठीक-ठाक है, लेकिन नाम अभी भी वही है।'

नरेंद्र ने बताया कि, वह बचपन में कबड्डी के मैदानों की ओर आकर्षित हुए, जहां बड़े लड़के खेलते थे, उनकी ये दिलचस्पी जल्द ही जुनून में बदल गई। नरेंद्र ने बताया कि पहले, मैं सिर्फ़ एक दर्शक था, जिसके ज़्यादा दोस्त नहीं थे, लेकिन इससे पहले कि मैं समझ पाता, कबड्डी ने मुझे एक परिवार दे दिया।'

नरेंद्र की लगन ने स्थानीय कबड्डी कोच संदीप कंडोला का ध्यान आकर्षित किया। कंडोला बताते हैं कि, 'एक छोटा बच्चा सीनियर खिलाड़ियों को बहुत लगन से अभ्यास करते हुए देखने आता था।' 'उसे खेल में इतनी दिलचस्पी दिखाते देखकर, मैंने उसे हर दिन खेलने के लिए प्रेरित किया।'

नरेंद्र ने बताया कि, 'मेरे परिवार और मेरे कोच ने एक कबड्डी खिलाड़ी के रूप में मेरे विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है,' उन्होंने बताया कि, 'मेरे कोच, जो सरकारी नौकरी करते थे, वह भी कबड्डी खिलाड़ी थे। उन्होंने हरियाणा के हमारे गांव में खेल खेलने की परंपरा को बनाए रखा है। वास्तव में, वह अभी भी हमारे गांव के छोटे बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं!'

जैसे-जैसे नरेंद्र की प्रतिभा बढ़ी, वैसे-वैसे उसके सपने भी बढ़े। हालांकि, पहचान की राह आसान नहीं थी। उन्होंने बताया कि, 'पहले, मैं जहां भी जाता था, कोई भी कबड्डी खिलाड़ी को नहीं पहचानता था, लेकिन प्रो कबड्डी लीग में आने के बाद सब कुछ बदल गया।'

कबड्डी से मिली नई पहचान
'अब, प्रो कबड्डी लीग और मशाल स्पोर्ट्स की बदौलत, हर कोई मुझे पहचानता है,' 'लीग ने कबड्डी खिलाड़ियों की पहचान बढ़ाने में मदद की है। इससे मुझे भी बहुत फ़ायदा हुआ है, चाहे पैसे की बात हो या पहचान की। और सिर्फ़ मेरी ही नहीं, लीग ने सभी कबड्डी खिलाड़ियों की ज़िंदगी बदल दी है।'

नरेंद्र की यात्रा चुनौतियों से भरी रही
नरेंद्र की यात्रा चुनौतियों से भरी रही है, जो कबड्डी मैच के उतार-चढ़ाव की याद दिलाती है। एक मुश्किल दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया, 'मुझे याद है कि हम चेन्नई में थे; हम एक मैच हारे थे। नरेंद्र अपने प्रदर्शन से बहुत निराश थे क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि क्या हुआ। उन्होंने कहा कि, 'मैं अपने पैर नहीं हिला पा रहा था।' हालांकि, यह झटका उनके करियर का एक महत्वपूर्ण क्षण बन गया। अपनी टीम के विश्लेषक और तमिल थलाइवाज के सीईओ शुशेन वशिष्ठ की मदद से नरेंद्र ने अपनी तकनीक को बेहतर बनाने पर काम किया, जिससे उनके प्रदर्शन में उल्लेखनीय बदलाव आया।

देश का प्रतिनिधित्व करना बहुत गर्व की बात
उनकी कहानी सिर्फ़ व्यक्तिगत सफलता के बारे में नहीं है, बल्कि खेल के विकास के बारे में भी है। सफलता की ओर अपने कदम बढ़ाने की कहानी साझा करते हुए, नरेंद्र ने आखिर में कहा कि 'देश का प्रतिनिधित्व करना बहुत गर्व की बात है," उन्होंने कहा, उनकी आवाज़ भावनाओं से भरी हुई थी। "हम जितना अच्छा प्रदर्शन करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।'

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दृढ़ संकल्प और जुनून ने बदल दिया जीवन
नरेंद्र, जो कभी बड़े सपने देखने वाला एक छोटा लड़का था, अब इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प और जुनून कहां ले जा सकते हैं। पीकेएल में एक दर्शक से एक स्टार खिलाड़ी बनने तक का उनका सफर प्रत्येक व्यक्ति के भीतर की क्षमता और खेलों की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर करता है।

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