जब अर्जेंटीना के तानाशाह ने अपनी दबंगई में कराया विश्वकप और जीता भी
1978 के विश्व कप का आयोजन अर्जेंटीना में हुआ था। हालांकि अर्जेंटीना को ये मेजबानी बहुत पहले मिल गयी थी लेकिन बाद में वहां विश्व कप कराने का घनघोर विरोध हुआ था।

अर्जेंटीना ने पहला विश्व कप 1978 में जीता था। उस समय अर्जेंटीना के शासक जॉर्ज रफाल विडेला थे। विडेला तानाशाह थे और 1976 में एक सैन्य तख्ता पलट से सत्ता पर कब्जा जमाया था। 1978 के विश्व कप का आयोजन अर्जेंटीना में हुआ था। हालांकि अर्जेंटीना को ये मेजबानी बहुत पहले मिल गयी थी लेकिन बाद में वहां विश्व कप कराने का घनघोर विरोध हुआ था। विडेला के जुल्म के कारण अर्जेंटीना के राजनीतिक हालात काफी खराब हो चुके थे। तब इस बात का आरोप लगा था कि फीफा को मानवाधिकार की नहीं बल्कि 'फुटबॉल के व्यापार’ की चिंता है। कहा जाता है कि जॉर्ज रफाल विडोला ने अपनी सत्ता की स्वीकार्यता के लिए विश्व कप प्रतियोगिता को जरिया बनाया था। इस विश्वकप में नीदरलैंड और आर्जेंटीना की टीम फाइनल में पहुंची थी। फाइनल से पहले नीदरलैंड ने कहा था, अगर उनकी टीम विश्वकप जीतती है तो वह विडेला के हाथ से विजेता ट्रॉफी ग्रहण नहीं करेंगे। नीदरलैंड के इस रुख से दुनिया भर में तहलका मच गया था। लेकिन संयोग कहिए कि फाइनल में अर्जेंटीना को जीत मिल गयी जिससे कोई अंतर्राष्ट्रीय विवाद नहीं हुआ। अर्जेंटीना के पहले विश्व कप विजय की कहानी विवादों से भरी हुई है।
राजनीति हित साधने के लिए विश्व कप फुटबॉल
सैन्य तानाशाह जॉर्ज रफाल विडेला पर आरोप था कि उन्होंने अपनी सत्ता को बरकार रखने के लिए करीब 30 हजार विरोधियों को गायब करा दिया था। जेल में बंद महिलाओं का शारीरिक शोषण किया गया था। उनके बच्चों को छीन लिया गया था। हत्या और अन्य गंभीर अपराधों के अंतहीन आरोप थे। अर्जेंटीना में उस समय उथल-पुथल की स्थिति थी। जिन माताओं के बच्चे गायब थे वे राजधानी ब्यूनस आयर्स में लगातार प्रदर्शन कर रहीं थीं। सेना का दमन भी उन्हें डरा नहीं पाया था। अर्जेंटीना में विश्वकप के बहिष्कार के लिए कई फुटबॉल खिलाड़ियों ने भी प्रदर्शन किया था। इस राजनीतिक अराजकता के बीच भी फुटबॉल की दीवानगी अपनी जगह कायम थी। अर्जेंटीना के लोगों के लिए फुटबॉल ही सब कुछ है। यह एक नशा है जिसके सुरूर में वे सब कुछ भूल जाते हैं। तानाशाह विडेला से ये बात छिपी नहीं थी। तब उन्होंने अपनी सत्ता को देश और दुनिया में मान्यता दिलाने के लिए विश्व कप फुटबॉल का सहारा लिया।
आधी-अधूरी तैयारी
अराजकता के कारण अर्जेंटीना में विश्व कप फुटबॉल के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। बहुत से नये मैदान बनाये गये थे जो आधे-अधूरे थे। इन मैदान में नयी नयी घास लगायी गयी थी जो खेल के दौरान उखड़ जाया करती थीं। अर्जेंटीना ने अपने सभी मैच राजधानी ब्यूनस आयर्स में रखे थे। जब कि अन्य मेहमान टीमों को मैच के लिए दूर दराज के शहरों में जाना पड़ता था। 1978 के विश्व कप में 16 टीमों ने ही हिस्सा लिया था क्योंकि तब यही प्रवाधान था। मेजबान और विजेता देश को सीधे इंट्री मिल जाती थी। बाकी 14 देशों का चयन क्वालिफाइंग मैचों से होता था। हालात ठीक नहीं थे. इसके बावजूद सैन्य तानाशाह विडोला ने फीफा के समर्थन से अर्जेंटीना में विश्व कप फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित करायी। विडोला फुटबॉल के जरिये राष्ट्रीय भावना उभार कर अपना राजनीतिक हित साधना चाहते थे।
अर्जेंटीना को मिला पहला विश्वकप
अर्जेंटीना, इटली, फ्रांस और हंगरी ग्रुप ए में थे। इस विश्वकप में अर्जेंटीना ने ग्रुप मैच में फ्रांस को 2-1 से हराया था। उसने हंगरी पर भी 2-1 से जीत हासिल की थी। लेकिन तीसरे मैच में इटली ने उसे 1-0 से हरा दिया। दो जीत के साथ अर्जेंटीना दूसरे राउंड में पहुंचा जहां उसका मुकाबला पोलैंड से हुआ। इस मैच को अर्जेंटीना ने 2-0 से जीता। दूसरे राउंड में उसका मुकाबला ब्राजील से बराबर (0-0) रहा। फिर उसने पेरू को एकतरफा मुकाबले में 6-0 से रौंद दिया। दूसरे राउंड में अर्जेंटीना और ब्राजील के 5-5 अंक थे। लेकिन गोल अंतर के आधार पर वह फाइनल में पहुंच गया। फाइनल में उसका मुकाबला नीदरलैंड से हुआ। अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को 3-1 से हारा कर विश्वकप जीत लिया था।
अर्जेंटीना के मारियो केंपेस को गोल्डन बूट
1978 में अर्जेंटीना के पास एक चमत्कारी स्ट्राइकर थे मारियो केंपेस। उन्होंने इस विश्वकप में 6 गोल किये थे और उन्हें गोल्डेन बूट अवार्ड मिला था। फाइनल में उन्होंने दो गोल किये थे। जैसे अर्जेंटीना के पास आज मेसी हैं, 1986 में माराडोना थे, वैसे ही 1978 में मारियो केंपेस थे। लेकिन इस विश्व विजयी गाथा का एक दूसरा पहलू भी था। आरोप लगा था कि अर्जेंटीना के सैन्य शासक ने मैचों को प्रभावित करने के लिए ताकत और प्रलोभन का सहारा लिया था। वे अर्जेंटीना की जीत से दुनिया में अपना दबदबा बनाना चाहते थे।
मैच फिक्सिंग के आरोप
मैच फिक्सिंग के भी आरोप लगे। फ्रांस के साथ मैच में रेफरी पर आरोप लगा था कि वह अर्जेंटीना पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान था। हंगरी के कोच ने कहा था, यहां सब कुछ अर्जेंटीना के पक्ष में है। यहां तक कि हवा भी इनसे पूछ कर बहती है। फाइनल में जाने के लिए अर्जेंटीना को पेरू के खिलाफ चार गोल के अंतर से जीत जरूरी थी। जब कि उसने यह मैच 6-0 से जीता था। आरोप लगा था कि तानाशाह विडोला ने इस परिणाम को तय करने के लिए हस्तक्षेप किया था। एक कोलंबियाई ड्रग डीलर ने रिश्वतखोरी का भी आरोप लगाया था। अब सच क्या है और झूठ क्या, ये तो स्पष्ट नहीं, लेकिन उस समय अर्जेंटीना में खेले गये विश्व कप प्रतियोगिता को सबसे विवादास्पद आयोजन माना गया था।












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