द्रविड़ के चलते पाकिस्तान में नहीं बना था सचिन का दोहरा शतक, युवराज ने तोड़ी चुप्पी
नई दिल्ली। पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान टेस्ट आपको याद होगा, जिसमें सचिन तेंदुलकर के बल्ले से निकली शानदार पारी ने पाकिस्तान को उसी की धरती पर धूल चटाने का काम किया था। भारत तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए पाकिस्तान दाैरे पर था। पहले टेस्ट में भारत ने पहली पारी 5 विकेट खोकर 675 रनों पर घोषित की, जो मुल्तान में हुआ। सचिन तेंदुलकर 194 रन बनाकर नाबाद थे। सचिन को दोहरा शतक पूरा करने के लिए 6 रन चाहिए थे, लेकिन उस समय कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी घोषित कर दी। अब युवराज सिंह ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए बताया कि द्रविड़ का उस समय लिया गया फैसला हैरानी भरा था।
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बीच में मिला था तेज खेलने का संदेश
यहां तक कि कुछ सालों बाद सचिन ने भी इस मुद्दे पर बोलते हुए बताया था कि वह द्रविड़ के फैसले से कैसे परेशान थे। अपनी आत्मकथा 'प्लेइंग इट माई वे' में तेंदुलकर ने याद किया कि कैसे उन्होंने अपने पूर्व साथी द्रविड़ से कहा था कि वह पारी घोषित करने के फैसले से खुश नहीं हैं। वहीं अब युवराज ने स्पोर्ट्स18 से बात करते हुए कहा कि द्रविड़ को तेंदुलकर के 200 रन बनाने के बाद पारी घोषित करना चाहिए थी। युवराज ने कहा, "बीच में हमें संदेश मिला कि हमें तेज खेलना है और हम पारी की करने जा रहे हैं।"

नहीं करनी चाहिए थी पारी घोषित
युवराज ने कहा, ''सचिन एक और ओवर में 6 रन बना सकते थे और पारी घोषित होने के बाद दिन के अंत में हमने 8-10 ओवर फेंके। मुझे नहीं लगता कि और दो ओवर से टेस्ट मैच पर कोई फर्क पड़ता।'' युवराज ने कहा, "अगर यह तीसरा या चौथा दिन होता, तो आपको टीम के हित में फैसला पहले रखना होता और जब सचिन 150 के स्कोर पर होते तो वे पारी घोषित कर देते, लेकिन मुझे लगता है कि टीम सचिन के 200 रनों के पूरे होने के बाद पारी घोषित कर सकती थी।" युवराज ने इस मैच में 66 गेंदों में 59 रन बनाए थे। भारत यह मैच एक पारी और 52 रन से जीता था।

100 टेस्ट खेलने का था सपना
युवराज सिंह ने पाकिस्तान दाैरे पर हुई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में 230 रन बनाकर शानदार प्रदर्शन किया था, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था। हरफनमौला खिलाड़ी का औसत लगातार 40 के करीब रहा, लेकिन खेल के सबसे लंबे प्रारूप में उनका फॉर्म कम हो गया। युवराज ने अपने टेस्ट करियर का अंत 40 मैचों के साथ किया और 1900 रन बनाए, जिसमें 3 शतक शामिल हैं। युवराज ने कहा, "आखिरकार, जब मुझे दादा के संन्यास के बाद टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला, तो मुझे कैंसर हो गया था। मैंने आगे भी खेलने के लिए 24 घंटे कोशिश की। मैं 100 टेस्ट मैच खेलना चाहता था, उन तेज गेंदबाजों का सामना करना और दो दिन बल्लेबाजी करना चाहता था। मैंने सब कुछ किया, लेकिन वैसा हो नहीं सका।''












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