WTC Final: दो बड़े मौके, दो कप्तान, दोनों के दोनों ही हो गए फेल
भारतीय टीम दो बार WTC फाइनल तक पहुंचकर ख़िताब नहीं जीत पाई।
ऐसा नहीं है भारतीय क्रिकेट टीम टेस्ट मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही। दो साल तक टेस्ट सीरीज खेलने के बाद यह फैसला होता है कि कौन सी दो टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जाएगी। जाहिर है अधिक जीत और अंक हासिल करेगी वाली टीम ही फाइनल का सफर तय करेगी। पिछले चार साल में भारत दो बार विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचा। क्या ये कम बड़ी उपलब्धि है ? क्या बिना अच्छा खेले ही ये संभव हो पाया ? खिताब जीतने वाली टीमें न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रलिया भी ऐसा । बस कसक इस बात की है कि भारत आखिरी पड़ाव पर पहुंच कर खाली हाथ रह जाता है।
ऐसा क्यों होता है ? ऐसा इस लिए होता है क्यों कि भारतीय बल्लेबाजी को अचानक सांप सूंघ जाता है। कोई एक बल्लेबाज भी बड़ी पारी खेलने का बीड़ा नहीं उठा पाता। जब कि ऑस्टेलिया के खेमे में कम से कम एक ऐसा बल्लेबाज (स्टीव स्मिथ) है जो हर बड़े मैच में टीम का संबल बन जाता है।

कप्तान वही जो फ्रंट से लीड करे
सफल कप्तान वही है जो फ्रंट से लीड करे। आगे बढ़ कर टीम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाये। लेकिन दुर्भाग्य से 2021 और 2023 में भारतीय कप्तान ऐसा नहीं कर सके। 2021 में विराट कोहली भारत के कप्तान थे। उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में एक माना जाता है। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट 75 शतक बना कर कोहली ने अपनी काबिलियत साबित की है। लेकिन जब कोहली को अपने करियर में इतिहास रचने का समय आया तो वे चूक गये। 2021 के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल भारत की न्यूजीलैंड से भिड़ंत हुई थी। यह मैच इंग्लैंड के साउथेम्पटन में हुआ था। महीना भी जून का ही था। इस मैच में तो भारत ने पहले बैटिंग की थी। कोहली ने 44 और अंजिक्य रहाणे ने 49 रन बनाये। यही दो बड़ी परियां रहीं। क्या ऐसी बैटिंग से ही चैंपियन बनेंगे ?
दो मौके, दो कप्तान, दोनों फेल
2021 के फाइनल में भारत का दूसरी पारी में 170 रनों पर सिमटना जाना हार का कारण बन गया। इस पारी में भी कोहली 13 रन बना कर आउट हुए। अगर आपका नाम चट्टान सिंह हो और आप जीवन-मरण के समय रास्ते का पत्थर भी न हिला सकें तो फिर आपके इस नाम का क्या फायदा ? इस मैच में मौजूदा कप्तान रोहित शर्मा भी खेल रहे थे। उनकी बल्लेबाजी भी फीकी रही। उन्होंने 34 और 30 रन बनाये थे। रोहित शर्मा की कप्तानी में टीम इंडिया को 2023 में फिर इतिहास रचने का मौका मिला। लेकिन रोहित भी फ्रंट से लीड नहीं कर सके। वे न तो अच्छी रणनीति बना पाये और न ही रन बना पाये।
अब रोहित की चमक फीकी
एक जमाना था जब रोहित 30 रना बना लेने के बाद बड़ी पारियां खेलते थे। चाहे वह टेस्ट हो या फिर सीमित ओवरों का क्रिकेट। 2019 के विश्वकप में रोहित ने पांच शतक लगा कर तहलका मचा गिया था। लेकिन इसके बाद उनकी चमक फीकी पड़ने लगी। जब से वे भारत के कप्तान बने हैं उनका दायरा 30-40 रनों के बीच सिमट गया है ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर टेस्ट में उन्होंने जरूर शतक लगाया था। लेकिन अब वे 'फ्लाइंग स्टार्ट’ की रणनीति पर चल रहे हैं जो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में फेल गो गयी। वे दूसरी पारी में 43 रना बना कर लय में दिख रहे थे लेकिन नाथन लियेन की गेंद को बैकफुट पर खेलने की गलती कर बैठे। कोहली भी अपने नाम के अनुरूप नहीं खेले।
अब भविष्य की टेस्ट टीम चाहिए
क्या अब वो समय आ गया है कि भारत को भविष्य की टेस्ट टीम बनानी चाहिए ? आखिर कब तक कोहली और रोहित के भरोसे बैठे रहेंगे ? ऐसे में ऋषभ पंत की कमी बहुत खल रही है। विदेशी जमीन पर पंत ने टेस्ट मैच में कई जिताऊ पारियां खेली हैं। वे अकेले दम पर मैच जिताने वाले खिलाड़ी हैं। लेकिन ये भारत का दुर्भाग्य है कि वे गंभीर रूप से घायल होने के बाद क्रिकेट से दूर हैं। कई लोगों का यह मानना है कि आइपीएल 2023 में जिन युवा बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन किया है उन्हें टेस्ट टीम में मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा सोचना जल्दबाजी है। शुभमन गिल ने आइपीएल 2023 में सबसे अधिक रन बनाये थे। तीन शतक भी जड़े थे। लेकिन वे विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में तो ये प्रदर्शन नहीं दुहरा सके। कम से कम बल्लेबाजी में तो आइपीएल की शैली टेस्ट में सफलता का कारण नहीं बन सकती। अगर टेस्ट मैच के खिलाड़ियों का चयन करना है तो एक बार फिर पुराने दौर में लौटना होगा। रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी के सफल बल्लेबाजों पर गौर करना होगा। टेस्ट मैच के लिए वैसे बल्लेबाज चाहिए जो विकेट पर टिक कर खेलने की योग्यता रखते हों। इस मामले में यशस्वी जायसवाल ही कसौटी पर खरे उतरते हैं।
घरेलू क्रिकेट में यशस्वी ने बरसाये रन
यशस्वी जायसवाल ने 2022 में दिलीप ट्रॉफी के फाइनल में दोहरा शतक लगाया था। उन्होंने 60 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा था। इसके अलावे उन्होंने दिलीप ट्राफी के क्वार्टर फाइनल में दोहरा शतक लगाया था। रणजी ट्राफी के क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में शतक लगाया था। यहां तक कि आइपीएल 2023 में भी अच्छा प्रदर्शन किया। वे टेस्ट टीम में जगह पाने के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं। शुभमन गिल भी बेशक प्रतिभाशाली बल्लेबाज हैं लेकिन उन्हें आइपीएल में नहीं बल्कि घरेलू क्रिकेट में अपनी क्षमता साबित करना होगी। उन्हें पिच पर चार-पांच घंटे खड़े होने की क्षमता विकसित करनी होगी। अब समय आ गया है कि भारत को भी ऑस्ट्रेलिया की तरह टेस्ट और लिमिटेड ओवर्स के लिए अलग अगल टीम बनानी होगी। ऑस्ट्रेलिया के ट्रेविस हेड ने 2022 के बाद से टी-20 इंटरनेशनल नहीं खेला और उन्होंने फाइनल में 163 रन बनाये।
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