WTC FINAL : क्या टीम इंडिया के ‘पुराने चावल’ लगाएंगे जीत का ‘भोग’ ?
चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे ड्रॉप होने के बाद टेस्ट टीम में लौटे हैं। इन दोनों से ही फाइनल में बड़ी पारी की उम्मीद होगी।

रोहित शर्मा, विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे की उम्र अब 34 साल से अधिक हो चुकी है। इनके पास क्रिकेट खेलने का अपार अनुभव है। अनुभव और योग्यता को देखते हुए इन्हें टीम इंडिया का पुराना चावल कहा जा सकता है। किसी भी घर में पुराने चावल को इसलिए तरजीह मिलती है क्यों कि वह सुपाच्य, स्वादिष्ट और बरकत वाला होता है। अब क्या विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में ये 'पुराने चावल' जीत का भोग लगाएंगे ? भारत के करोड़ों क्रिकेटप्रेमी इस छप्पन भोग की तरफ टकटकी लगा कर देख रहे हैं। वह इसलिए क्यों कि भारत को 2013 के बाद से किसी आइसीसी प्रतियोगिता में जीत का प्रसाद नहीं चख पाया है। इस बार क्रिकेट के भक्त पंचामृत और प्रसाद, दोनों के आकांक्षी हैं।
पुजारा-रहाणे मिले मौका का फायदा उठाएंगे !
चेतेश्वर पुजारा और अंजिक्य रहाणे ड्रॉप होने के बाद टेस्ट टीम में लौटे हैं। खराब फॉर्म के कारण इन्हें 2022 में टीम से हटा दिया था। पुजारा ने काउंटी खेलकर तो रहाणे ने आइपीएल खेल कर टीम में वापसी की है। पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पिछली घरेलू श्रृंखला खेली थी। लेकिन रहाणे डेढ़ साल बाद टेस्ट मैच खेलेंगे। बहुत खास मौके पर दोनों टेस्ट टीम में हैं। इस मैच के नतीजे से ही तय होगा कि टेस्ट क्रिकेट का सरजात कौन है ? इनकी वापसी तभी सफल हो पाएगी जब ये बल्ले से बड़ा योगदान देंगे। अगर ये अच्छा नहीं खेले तो इनकी जगह लेने के लिए प्रतिभावान युवा खिलाड़ियों की एक लंबी लाइन लगी हुई है। जाहिर है पुजारा और रहाणे इस मौके को जाया नहीं करेंगे। दिसम्बर 2020 से अब तक पुजारा ने 25 टेस्ट मैचों में 1314 रन, कोहली ने 22 टेस्ट मैचों में 1176 रन और अंजिक्य रहाणे ने 17 टेस्ट मैचों में 728 रन बनाये हैं। इनमें विकेट पर टिक कर खेलने की क्षमता है। लेकिन ओवल में इन्हें अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना होगा।
रोहित- ऑस्ट्रेलिया देख चुका है हमारा आत्मबल
कप्तान रोहित शर्मा ऑस्ट्रेलिया को लेकर क्या सोचते हैं ? भारतीय टीम 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गयी थी। भारत पहले टेस्ट की दूसरी पारी में केवल 36 रनों पर आउट हो गया था। यह एक एक शर्मनाक प्रदर्शन था। टीम इंडिया 8 विकेट से यह मैच हार गयी थी। बहुत लोग ये सोच रहे थे कि अगले तीन टेस्ट मैचों में भी भारत की मिट्टीपलीद होने वाली है। लेकिन भारत ने इन 36 रनों की टीस को भूला कर दूसरे टेस्ट मैच में न केवल वापसी की बल्कि चमत्कार कर दिया। दूसरे टेस्ट में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से हरा कर पिछली हार का बदला ले लिया। इस टेस्ट में अंजिक्य रहाणे ने शतक (112) और रवीन्द्र जडेजा ने अर्धशतक (57) लगाया था। शुभमन गिल ने 45 रन बनाये थे। गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, अश्विन, जडेजा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। पहले दो टेस्ट मैच रोहित शर्मा नहीं खेल पाये थे। रोहित के मुताबिक, दूसरा टेस्ट मैच जीत कर हमने दुनिया के सामने वापसी की एक नयी मिसाल रखी थी। 36 के भयानक सपने के बाद हमने ऑस्ट्रेलिया को उसी की जमीन पर हराया। ये बात आज भी हमें प्रेरित करती है।
रोहित के आने के बाद बढ़ी टीम की ताकत
रोहित शर्मा तीसरे टेस्ट में शामिल हुए। सिडनी में खेला गया तीसरा टेस्ट मैच ड्रॉ रहा। रोहित शर्मा ने पहली पारी में 26 और दूसरी पारी में 52 रन बनाये। पहली पारी में शुभमन गिल और पुजारा ने अर्धशतक लगाया था। दूसरी पारी में भारत को जीत के लिए 407 रनों का लक्य़ मिला था। रोहित और पुजारा के अर्धशतकों से भारत ने दूसरी पारी में अच्छी शुरुआत की। ऋषभ पंत 3 रनों से शतक चूक गये। आखिरकार भारत 5 विकेट के नुकसान पर 334 रन ही बना सका और मैच ड्रॉ हो गया। सीरीज 1-1 से बराबरी पर चल रही थी।
चौथी पारी में 329 रन बना कर भारत ने रचा इतिहास
तीसरे टेस्ट मैच में रोहित शर्मा ने पहली पारी में 44 रन बनाये। लोअर ऑर्डर में शार्दुल ठाकुर और वाशिंगटन सुंदर ने 67 और 62 रन बनाये। भारत का स्कोर 336 तक पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 369 रन बनाये थे। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया के 294 रन बने। अब भारत को मैच की चौथी पारी में जीत के लिए 328 रन बनाने थे। भारत ने शुभमन गिल के 91 और पुजारा के 56 रनों के दम पर ठोस शुरुआत की। इस मैच के हीरो रहे ऋषभ पंत। उन्होंने विषम परिस्थितियों में साहसिक बल्लेबाजी करते हुए 89 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत को जीत के लक्ष्य (328) तक पहुंचा दिया। भारत ने यह टेस्ट सीरीज 2-1 से जीत ली। उसने यह कमाल ऑस्ट्रेलिया की तेज पिच पर किया था। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल इंग्लैंड में है। इंग्लैंड में अगर आकाश में बादल छा जाएं तो मैच की परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के अनुकूल हो जाती हैं। लेकिन भारत तेज और स्विंग वाली पिचों पर अच्छा प्रदर्शन कर चुका है।












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