कौन हैं Smriti mandhana के पिता श्रीनिवास? सपना टूटा तो छोड़ दिया क्रिकेट! इस बिजनेस से कर रहे हैं बंपर कमाई
Who Is Smriti Mandhana Dad Shriniwas: भारतीय क्रिकेट टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना (Smriti mandhana) की शादी टल गई है। मंधाना के पिता को शादी वाले दिन हार्ट अटैक आ गया, जिस कारण शादी को रोक दी गई है। शादी की खबर के बीच उनके पिता श्रीनिवास मंधाना सुर्खियों में हैं। बेटी की शादी के दिन यानी 23 नवंबर को सुबह नाश्ते के दौरान उन्हें सीने में दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्मृति के पिता भी रह चुके हैं क्रिकेटर (Who Is Smriti Mandhana Dad Shriniwas)
स्मृति के मैनेजर तुहिन मिश्रा ने पुष्टि की है कि पिता की तबीयत को देखते हुए शादी को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। श्रीनिवास मंधाना स्मृति के लिए सिर्फ पिता नहीं, बल्कि उनके क्रिकेट करियर के सबसे बड़े स्तंभ रहे हैं। उनकी अपनी क्रिकेट यात्रा अधूरी रह गई थी। वह युवा अवस्था में जिला स्तर पर क्रिकेट खेलते थे और इसमें करियर बनाना चाहते थे, लेकिन उन्हें अपने माता-पिता से समर्थन नहीं मिला, जिसके कारण उनका खेल रुक गया।

बच्चों को बनाया क्रिकेटर
हालांकि, क्रिकेट के प्रति उनका प्रेम कम नहीं हुआ। उन्होंने यही सपना देखा कि उनके बच्चों को वह मौका मिले जो उन्हें नहीं मिल पाया। उन्होंने अपनी बेटी स्मृति और बेटे श्रावण दोनों को पूरा समर्थन दिया। श्रीनिवास मंधाना ने अपना अधूरा सपना बेटी स्मृति की आंखों से जिया। स्मृति के बड़े होने पर श्रीनिवास ने अपना समय, ऊर्जा और संसाधन उनकी प्रतिभा को निखारने में लगाए। वह खुद जिला-स्तरीय खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने ही अपने बच्चों को शुरूआती ट्रेनिंग दी।
कौन हैं स्मृति के पिता और क्या करते हैं
क्रिकेट के शेड्यूल को मैनेज करने के अलावा श्रीनिवास अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां भी बखूबी निभाते हैं। वह सांगली में 'SM-18 कैफे' के मालिक हैं (SM-18 स्मृति मंधाना का नाम और जर्सी नंबर है) और रिपोर्ट्स के अनुसार, एक केमिकल डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में भी काम करते हैं। श्रीनिवास और उनकी पत्नी स्मिता मंधाना ने हमेशा अपने बच्चों को प्रेरित किया। उनका बेटा श्रावण भी महाराष्ट्र अंडर-19 के लिए क्रिकेट खेल चुका है, जिसके बाद उन्होंने बैंकिंग की ओर रुख कर लिया।
खुद का टूटा सपना, फिर पूरे बच्चों के ख्वाब
एक युवा के तौर पर श्रीनिवास मंधाना ने जिला स्तर पर सांगली का प्रतिनिधित्व किया था। उनमें क्रिकेट के प्रति जबरदस्त जुनून और प्रतिभा थी, जिसने उन्हें इस खेल में करियर बनाने का सपना दिखाया। हालांकि, उन्हें अपने माता-पिता का सहयोग नहीं मिल पाया, जिसके कारण क्रिकेट के मैदान पर उनका सफर समय से पहले थम गया। यह झटका उनके खेल प्रेम को कम नहीं कर सका। बल्कि, यह उनके जीवन में एक मूक संकल्प की नींव बन गया। उन्होंने खुद से वादा किया कि एक दिन उनके बच्चों को वह सारे अवसर मिलेंगे जो उन्हें नहीं मिल पाए थे।












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