जब कोचिंग स्टॉफ के कुक ने लंच किया ऑफर तो रोने लगा यह खिलाड़ी, संघर्ष जान भर आयेंगी आंखें
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के 15वें सीजन में 51 मैच खेले जा चुके हैं और धीरे-धीरे यह लीग अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। इस बीच प्लेऑफ की रेस से सबसे पहले बाहर होने वाली मुंबई इंडियंस की टीम ने जीत की राह पर वापसी कर ली है। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ लगातार 8 मैचों में हार का सामना कर पहली जीत हासिल करने वाली मुंबई इंडियंस की टीम ने शुक्रवार को टॉप पर काबिज गुजरात टाइटंस को भी रोमांचक मैच में हरा दिया। इस जीत से भले ही मुंबई इंडियंस की स्थिति में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आने वाले सीजन के लिये वो एक अच्छी टीम तैयार करने की ओर जरूर देख रही है।
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मुंबई इंडियंस की टीम ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ आखिरी ओवर के रोमांच में 5 रन से जीत हासिल की, जहां पर 12वें ओवर तक गुजरात की टीम एकतरफा अंदाज में मैच को अपने नाम करती नजर आ रही थी, हालांकि दो रन आउट और डैनियल सैम्स के आखिरी ओवर के दम पर उसने जीत हासिल कर ली। मुंबई इंडियंस की टीम के लिये पिछली दो जीत में एक और खिलाड़ी ने अहम योगदान दिया जिसने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ अपना आईपीएल डेब्यू किया था।

पहले ही मैच में कार्तिकेय ने किया खूब प्रभावित
हम यहां पर घरेलू स्तर पर मध्यप्रदेश की टीम के लिये खेलने वाले फिरकी गेंदबाज कुमार कार्तिकेय की बात कर रहे हैं जिन्होंने अपने डेब्यू मैच की दूसरी ही गेंद पर संजू सैमसन को वापस पवेलियन भेजने का कारनामा किया। इतना ही नहीं कार्तिकेय अब तक खेले गये मैचों में टीम के लिये तब किफायती साबित हुए हैं जब टीम के बाकी गेंदबाज बुरी तरह रन लुटा रहे थे। कार्तिकेय की गेंदबाजी की बात करें तो उनके पास रिस्ट स्पिन, गुगली, फिंगर स्पिन और कैरम बॉल जैसे विकल्प मौजूद हैं। कार्तिकेय खुद को मिस्ट्री स्पिनर मानते हैं जिसने न सिर्फ कप्तान रोहित शर्मा बल्कि मुंबई इंडियंस के पूरे मैनेजमेंट को खासा प्रभावित किया है।

संघर्ष से भरपूर है कार्तिकेय की कहानी
कुमार कार्तिकेय की बात करें तो उनका यहां तक पहुंचने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। ईएसपीएनक्रिकइंफो के साथ बात करते हुए कुमार कार्तिकेय के कोच संजय भारद्वाज ने उनके सफर को लेकर कई बड़े खुलासे किये हैं। संजय भारद्वाज ने बताया कि कार्तिकेय महज 15 साल के उम्र में ही उनकी अकादमी का हिस्सा बनने के लिये कानपुर से दिल्ली आगे आ गये थे। वह शुरुआत में फिंगर स्पिन गेंदबाजी करते थे लेकिन आगे चलकर उन्होंने रिस्ट स्पिन को अपनाया। कोच ने बताया कि जब कार्तिकेय अपना घर छोड़कर अकादमी आये ते तो उन्होंने अपने परिवार से वादा किया था कि जब तक वो कुछ बन नहीं जायेंगे तब तक घर वापस नहीं आयेंगे और पिछले 8 सालों से वो अपने घर नहीं गये हैं।

टैलेंट पहचान कोच ने अकादमी में दी जगह
भारद्वाज ने बताया कि कार्तिकेय ने पीएसी में सिपाही की नौकरी करने वाले अपने पिता पर आर्थिक बोझ नहीं बनने की बात कहकर दिल्ली का रुख किया जहां पर उन्होंने अपने दोस्त राधेश्याम के साथ मिलकर अकादमी में एडमिशन लेने की काफी कोशिश की, हालांकि हर अकादमी में उनसे ज्यादा फीस मांगी गई। अंत में जब वो भारद्वाज के पास पहुंचे और अपनी स्थिति के बारे में बताया तो कोच ने उन्हें ट्रॉयल देने को कहा, जहां पर उन्होंने कार्तिकेय की प्रतिभा को पहचान उन्हें मौका देने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, 'जब मैंने उसकी गेंदबाजी देखी तो उसका एक्शन काफी स्मूथ नजर आया, इतना ही नहीं उसने उंगलियों को बेहद खूबसूरती से इस्तेमाल किया जो मुझे काफी पसंद आया और मैंने उसे मौका देने का फैसला किया।'

10 रुपये बचाने के लिये मीलों चले पैदल
अकादमी में एडमिशन तो मिल गया लेकिन कार्तिकेय के सामने अभी भी रहने और खाने का इंतजाम करने का सवाल था। वो गाजियाबाद स्थित अकादमी से 80 किमी दूर मसूरी में रहने लगे तो साथ ही पैसे कमाने के लिये वहां पर मौजूद एक फैक्ट्री में मजदूरी भी शुरू कर दी। इस फैक्ट्री में कार्तिकेय रात भर मजदूरी किया करते थे तो वहीं पर सुबह-सुबह अकादमी के लिये निकल जाते थे। वह 10 रुपये बचाने के लिये मीलों पैदल जाया करते थे ताकि उस पैसे का इस्तेमाल वो किसी और चीज में कर सकें। एक साल बाद संजय भारद्वाज ने कार्तिकेय को अकादमी में ही रहने का ऑफर दिया और वो वहां शिफ्ट हो गये।

लंच देखकर रोने लगे थे कार्तिकेय
कोच भारद्वाज ने आगे बात करते हुए कहा,'मुझे उसका पहला दिन आज भी याद है, जब हमारे कुक ने उसे लंच दिया तो वो रोने लगा। उसने बताया कि पिछले एक साल से उसने दोपहर का खाना नहीं खाया है। इसके बाद मैंने उसका एडमिशन एक स्कूल में करवा दिया जहां पर उसने नेशनल खेला और डीडीसीए की ओर से आयोजित कराई जाने वाली लीग में 45 विकेट चटकाये। वह डीडीसीए के तीन बड़े टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बना लेकिन जब ट्रॉयल हुए तो उसे अंतिम 200 में भी नहीं रखा गया।'

मध्यप्रदेश से खेलने की दी सलाह
संजय भारद्वाज की बात करें तो वो पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के भी कोच रह चुके हैं और उन्होंने ही अमित मिश्रा को अपनी कला का सही इस्तेमाल करने के लिये दिल्ली से हरियाणा भेजा था। कार्तिकेय के साथ भी उन्हें यही स्थिति नजर आई और उन्होंने इस स्पिनर को मध्यप्रदेश भेजा।
उन्होंने कहा, "जब मैंने देखा कि कार्तिकेय की काबिलियत को दिल्ली में वो मौका नहीं मिल रहा है तो मैंने अपने दोस्त और शेडहाल क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव अजय द्विवेदी से बात की और उसे वहां भेज दिया, जहां पर उसने दो साल तक डिवीजन क्रिकेट खेला और हर साल 50 से ज्यादा विकेट अपने नाम किये। इसके बाद जब मध्यप्रदेश के ट्रायल हुए तो उसने हर मैच में 5-5 विकेट चटकाये। इस प्रदर्शन के दम पर उसका चयन मध्यप्रदेश की रणजी टीम में हो गया, जिसमें उसने साल 2018 में डेब्यू किया।'

जब भी मौका मिलता है तो करने लगता है अभ्यास
मध्यप्रदेश के लिये रणजी में डेब्यू करने के बाद उन्हें भोपाल के एक होस्टल में रहने के लिये जगह दे दी गई, जहां पर उन्होंने काफी मेहनत कर रिस्ट स्पिन सीखी। कोच भारद्वाज ने आगे बताया कि कार्तिकेय को जब भी मौका मिलता है वो गेंदबाजी करना शुरू कर देते हैं। कई बार वह इंदौर से भोपाल के हॉस्टल में देर रात से पहुंचते हैं, लेकिन इसके बावजूद वो रात में ही नेट में लाइट्स ऑन कर अभ्यास शुरू कर देते हैं। उनके अंदर का जुनून पिछले 9 सालों में सिर्फ बढ़ा है।












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