17 साल के सचिन ने शतक जड़ हार टाली, प्लेयर ऑफ़ द मैच बन देश को दिया आजादी का गिफ्ट
Sachin Tendulkar's Independence day gift: देश इस समय 76वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए तैयार है। मंगलवार को भारत में स्वाधीनता दिवस मनाया जाएगा। हर तबके के लोग स्वतंत्रता दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और क्रिकेट जगत के लोग भी इसमें शामिल हैं। इससे पहले आज यानी 14 अगस्त का दिन क्रिकेट में खास है।
सचिन तेंदुलकर आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनको क्रिकेट का भगवान कहा जाता है। इंग्लैंड के खिलाफ 1990 में ओल्ड ट्रेफर्ड टेस्ट मैच में सचिन तेंदुलकर ने 17 साल 112 दिनों की उम्र में शतकीय पारी खेली थी। सचिन के टेस्ट करियर का यह पहला शतक था।

इंग्लैंड के खिलाफ 1990 के ओल्ड ट्रेफर्ड टेस्ट मैच में तेंदुलकर ने धाकड़ बैटिंग करते हुए टेस्ट मैच ड्रॉ कराते हुए टीम की हार बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। पांचवें दिन टीम इंडिया की दूसरी पारी में तेंदुलकर ने 119 रनों की नाबाद पारी खेलते हुए मुकाबला ड्रॉ करा दिया और देशवासियों को आजादी के जश्न से पहले एक सुनहरा गिफ्ट दिया।
तेंदुलकर के लिए यह टेस्ट मैच काफी खास था क्योंकि इस मुकाबले में उन्होंने पहली पारी के दौरान 68 रनों की धाकड़ पारी खेली थी। उस समय टीम इंडिया की कप्तानी मोहम्मद अजहरुद्दीन कर रहे थे। पहली पारी में इंग्लैंड ने 519 रन बनाए थे और भारत ने 432 रन जोड़े थे। भारत की पहली पारी में अजहर ने शतक जड़ा।
दूसरी पारी में खेलते हुए इंग्लैंड की टीम ने 4 विकेट पर 320 रन बनाते हुए टीम इंडिया को बैटिंग के लिए बुलाया और 408 का लक्ष्य थमा दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया ने एक के बाद एक विकेट गंवाए। विकेट पतन के बीच तेंदुलकर दीवार बनकर खड़े जो गए और 119 रनों की नाबाद पारी खेल मैच ड्रॉ करा दिया। उनके साथ मनोज प्रभाकर भी 67 रन बनाकर क्रीज पर टिके रहे। तेंदुलकर ने देश की आजादी का गिफ्ट इस शतक और ड्रॉ के साथ दिया। तेंदुलकर की यह पारी इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई।
कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में तेंदुलकर ने कहा था कि मैंने 14 अगस्त को 100 रन जड़े और या खास थे क्योंकि अगले दिन स्वतंत्रता दिवस था। उस शतक ने अगले टेस्ट मैच तक सीरीज में हमें बनाए रखा था। टेस्ट मैच बचाने का मेरा यह नया अनुभव था।












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