World Cup: क्या है DLS मेथड जिसने न्यूजीलैंड को हराया, कैसे इस पेचीदा नियम में है सुधार की आवश्यकता
DLS Method in International Cricket: डीएलएस नियम के तहत क्रिकेट में बारिश के बाद स्कोर तय किया जाता है। इस नियम को दूसरी पारी में बैटिंग करने वाली टीम के लिए लागू किया जाता है। शुरुआत में इसे DL मेथड कहा जाता था। साल 1997 में डकवर्थ लुईस नियम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लाया गया था।
DLS मेथड में रिसोर्स वैल्यू के आधार पर निर्णय लिया जाता है। टीम के रन और विकेट में से कितना रिसोर्स इस्तेमाल हुआ है, इस आधार पर लक्ष्य का निर्धारण किया जाता है। वैल्यू कम्प्यूटर प्रोग्राम के तहत निर्धारित के जाती है और यह सार्वजनिक नहीं है।

न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मैच के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला था। पाकिस्तान ने बारिश के समय 402 रनों का पीछा करते हुए 1 विकेट पर 200 रन बनाए। अगर विकेट ज्यादा होते, तो रिसोर्स वैल्यू ज्यादा खर्च मानी जाती।
DLS मेथड में एक ओवर या एक विकेट का परसेंटेज निकालने के लिए लिमिटेड ओवर्स के स्कोरिंग पैटर्न को देखा जाता है, हर साल जुलाई में नया डेटा रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है। इससे DLS को और ज्यादा विकसित बनाने का प्रयास किया जाता है।
डकवर्थ लुईस नियम को फ्रेंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने बनाया था। इसके बाद इस फॉर्मूले को स्टीव स्टर्न ने अपडेट कर दिया था। साल 2015 में ऐसा हुआ था। यहाँ से DL मेथड DLS मेथड बन गया। बारिश के बाद ओवर और विकेट कितने खर्च हुए है, इसे देखते हुए विपक्षी टीम के रिसोर्स परसेंटेज और स्कोरिंग पैटर्न देखकर बारिश के बाद लक्ष्य निर्धारित किया जाता है।
साल 1992 के वर्ल्ड कप में दक्षिण अफ्रीका को इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैक में बारिश के बाद 1 गेंद में 21 रनों का लक्ष्य मिला था। इसके बाद अफ्रीका को हार का सामना करना पड़ा था। लोगों को लगता है कि वह मैच डकवर्थ लुईस के कारण दक्षिण को हारना पड़ा था लेकिन ऐसा नहीं है। लोएस्ट स्कोरिंग ओवर का नियम उस समय था। पहले बैटिंग करने वाली टीम के सबसे कम स्कोर वाले ओवरों के अनुपात में बाद में बैटिंग वाली टीम के ओवर कटते थे। इस मैच के बाद डकवर्थ लुईस जैसा नियम बनाने की चर्चा हुई और पांच-छह साल बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनाया गया।












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