Explained: क्या है फोर्स मेज्योर? इसका इस्तेमाल कर पाकिस्तान बैन से बच सकता है, ICC के सामने संकट
What is Force Majeure: भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच न सिर्फ खेल है, बल्कि भावनाओं का सैलाब है। लेकिन इस बार टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेल के बजाय बॉयकॉट की चर्चा ज्यादा है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने से मना कर दिया है, लेकिन वह आईसीसी (ICC) के जुर्माने से भी बचना चाहता है।
इसके लिए वह एक नियम का सहारा ले सकता है, जिसका नाम है 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure)। लोगों को इसके बारे में ज्यादा मालूम नहीं होगा। अब पाकिस्तान इसका इस्तेमाल कर सकता है। इससे बीसीसीआई और आईसीसी का केस कमजोर हो जाता है।

आखिर क्या है 'फोर्स मेज्योर'?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने अपने दोस्त से वादा किया कि आप उसकी शादी में हलवाई का काम करेंगे। लेकिन शादी वाले दिन शहर में कर्फ्यू लग गया या भारी बाढ़ आ गई और आप वहां नहीं पहुंच पाए। ऐसे में दोस्त आप पर मुकदमा नहीं कर सकता, क्योंकि आप 'मजबूर' थे।
कानून की भाषा में इसी 'मजबूरी' को 'Force Majeure' कहते हैं। इसका मतलब है ऐसी घटना जो आपके हाथ में न हो। इसमें कुदरती आपदा या सरकार का सख्त आदेश शामिल हो जाता है। पाकिस्तान के पीएम इस मामले में पहले ही कूद गए हैं, ऐसे में पीसीबी को राहत मिल सकती है।
पाकिस्तान का 'गेम प्लान' क्या है?
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) कह रहा है "हम तो भारत से खेलना चाहते हैं, लेकिन हमारी सरकार ने हमें मना कर दिया है। चूंकि सरकार का आदेश मानना हमारी मजबूरी है, इसलिए आईसीसी हम पर जुर्माना न लगाए और न ही हमें वर्ल्ड कप से बाहर करे।"
भारत (BCCI) ने क्या कहा?
भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान की इस दलील की धज्जियां उड़ा दी हैं। बीसीसीआई के पास इसके पीछे 2 बड़े कारण हैं। भारत का कहना है कि जिस दिन पाकिस्तान सरकार ने 'बहिष्कार' का लेटर जारी किया, उसी दिन अंडर-19 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की टीम भारत के खिलाफ खेल रही थी। अगर सरकार का आदेश था, तो वो मैच कैसे हुआ?
बीसीसीआई का मानना है कि पाकिस्तान में बोर्ड और सरकार अलग-अलग नहीं हैं। वहां के प्रधानमंत्री ही क्रिकेट बोर्ड के सर्वेसर्वा होते हैं। ऐसे में खुद ही आदेश देना और फिर उसे 'मजबूरी' बताना गलत है।
अब आगे क्या होगा?
अगर आईसीसी ने पाकिस्तान की 'मजबूरी' (Force Majeure) को नहीं माना, तो पाकिस्तान को करोड़ों रुपये का हर्जाना भरना पड़ सकता है। साथ ही, अगले कुछ सालों के लिए उन पर बैन भी लग सकता है।












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