T-20 का बाजीगर है वेस्टइंडीज, दो बार हारी हुई बाजी जीत कर बना वर्ल्ड चैंपियन

नई दिल्ली, अगस्त 02। वेस्टइंडियन क्रिकेट का चाहे कोई भी दौर रहा हो उसके खेल में एक 'किलर इंस्टिंक्ट’ रहा है। जब यह मारक क्षमता सुसुप्ता अवस्था में होती है तब वह किसी से भी हार सकता है। लेकिन जब उसका 'किलर इंस्टिंक्ट’ जागृत होता है तो वह मजबूत से मजबूत विपक्षी को भी धूल चटा देता है। तब कोई साधारण खिलाड़ी भी बाहुबली के अवतार में टीम को अकेले दम पर जीत दिला देता है। 2011 में वेस्टइंडीज की टी-20 में वर्ल्ड रैंकिंग नम्बर 8 थी। लेकिन उसने करिश्मा करते हुए 2012 का टी-20 विश्वकप जीत लिया था। फाइनल में तो उसने हारी हुई बाजी जीती थी। वेस्टइंडीज टी-20 का नया विश्व विजेता बना था। 1979 के बाद वेस्टइंडीज ने पहली बार कोई आसीसी वर्ल्ड कप जीता था। इस समय वेस्टइंडीज को बहुत कमजोर माना जाता था। 2012 में उसका विश्वकप चैंपियन बनना किसी चमत्कार से कम नहीं था। चमत्कार पर चमत्कार तब और हुआ जब वेस्टइंडीज ने एक बार फिर 2016 में टी-20 वर्ल्डकप जीत लिया। उसने दूसरी बार हारी हुई बाजी जीत कर अपने किलर इंस्टिक्ट का प्रदर्शन किया। किसी ने सोचा न था कि कार्लोस ब्रेथवेट फाइनल के आखिरी ओवर में लगातार चार छक्के मार कर इंग्लैंड के जबड़े से जीत छीन लेंगे। लेकिन जो कई सोच नहीं सकता वह काम वेस्टइंडीज के खिलाड़ी कर डालते हैं।

Champion west indies

क्रिकेट का बाजीगर है वेस्टइंडीज

कई बार वेस्टइंडीज को कमजोर समझने की भूल भारी पड़ जाती है। एक पल उसकी टीम धाराशायी नजर आती है। लेकिन तभी वह पूरी ताकत के साथ उठती है और झन्नाटेदार वार करती है कि विरोधी हिल जाता है। 2012 के टी-20 विश्वकप में सुपर 8 के मुकाबले शुरू हुए तो वेस्टइंडीज की टीम नये रंग में आ गयी। सभी मतभेद भुला कर खिलाड़ी एक हो गये। कप्तान डेरेन सैमी ने टीम को एक सूत्र में बांध दिया। वेस्टइंडीज का इंग्लैंड से मुकाबला था। 2011 में इंग्लैंड नम्बर एक पर था और वेस्टइंडीज नम्बर 8 पर। लेकिन कैरेबियन टीम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। विस्फोटक बल्लेबाजी में क्रिस गेल का तो पहले से नाम था लेकिन उस दिन जॉनसन चार्ल्स ने कहर ढा दिया। उन्होंने 56 गेंदों पर 84 रनों की शानदार पारी खेली। गेल ने भी 35 गेंदों पर 58 रन बनाये। वेस्टइंडीज ने 20 ओवरों में 5 विकेट पर 179 का स्कोर खड़ा किया। कैरिबियन टीम में उस समय सुनील नरेन को छोड़ कर गेंदबाजी में रवि रामपाल, सैमुअल बद्री, क्रिस गेल और मर्लिन सैमुअल्स का कोई खास नाम नहीं था। लेकिन इन्ही गेंदबाजों ने इंग्लैंड को 20 ओवरों में 164 पर रोक दिया। वेस्टइंडीज ने 15 रनों से यह मैच जीत लिया। इसके बाद उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

क्रिस गेल का तूफान

इसके बाद वेस्टइंडीज ने न्यूजीलैंड को सुपर ओवर में हराया। इस मैच में क्रिस गेल और सुनील नरेन ने शानदार खेल दिखाया। इस जीत से वेस्टइंडीज सेमीफाइनल में पहुंच गया। सेमीफाइनल में उसका मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से हुआ। सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया, क्रिस गेल के तूफान में उड़ गया। गेल ने आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। 41 गेंदों पर 5 चौके और 6 छक्कों की मदद से 75 नबाद की पारी खेली। किरोन पोलार्ड ने भी अपन जलवा दिखाया और मात्र 15 गेंदों पर 38 रन कूट डाले। वेस्टइंडीज ने 20 ओवरों में 205 का विशाल स्कोर खड़ा किया। ऑस्ट्रेलिया की टीम बड़े टारगेट के दबाव में आ गयी। सिर्फ कप्तान जॉर्ज बेली ने 29 गेंदों पर 63 रन बनाये। वार्नर, माइक हसी, शेन वाटसन जैसे दिग्गज सस्ते में निबट गये। कंगारू टीम 16.4 ओवर में ही 131 पर ऑलआउट हो गयी। वेस्टइंडीज 74 रनों से जीत कर फाइनल में पहुंच गया। पार्ट टाइम बॉलर किरोन पोलार्ड ने एक ही ओवर किया और उसमें दो विकेट ले लिये। रवि रामपाल को 3, सुनील नरेन और सैमुआल बद्री को 2-2 विकेट मिले। एक विकेट सैमुअल्स को मिला।

हैरतअंगेज खिताबी जीत

दूसरे सेमीफाइनल में श्रीलंका ने पाकिस्तान को हरा कर फाइनल में जगह बनायी। वेस्टइंडीज और श्रीलंका के बीच कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में फाइनल शुरू हुआ। सबको उम्मीद थी कि गेल फिर तूफानी पारी खेलेंगे। लेकिन वेस्टइंडीज का टॉप ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। चार्ल्स 0, गेल 3 पर लुढ़क गये। 15.3 ओवर में वेस्टइंडीज के पांच विकेट पर 87 रन ही बने थे। लेकिन एक छोर पर मर्लिन सैमुअल्स तेजी से रन बना रहे थे। उन्होंने वेस्टइंडीज की पारी को संभाला। 56 गेंदों पर 78 रनों की तेज-तर्रार पारी खेली। आखिरी ओवरों में कप्तान डेरेन सैमी ने लंबे हाथ दिखाये। उन्होंने 15 गेंदों पर 26 रन बनाये। वेस्टइंडीज 20 ओवर में किसी तरह 137/6 रन बनाने में कामयाब हुआ। उस समय श्रींलका की टीम में महेला जयवर्धने, तिलकरत्ने दिलशान, कुमार संगकारा जैस विश्वस्तरीय बल्लेबाज थे। तिसरा परेरा जैसे पिंच हिटर थे। सब लोग यही समझ रहे थे कि श्रीलंका 138 का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। श्रीलंका की टीम 18.4 ओवरों में सिर्फ 101 रनों पर आउट हो गयी। सुनील नरेन की स्पिन का जादू सिर चढ़ कर बोला। उन्होंने 3.4 ओवर में सिर्फ 9 रन दे कर 3 विकेट लिये। सैमी ने 2 ओवरों में 6 रन देकर 2 विकेट लिये। इस तरह वेस्टइंडीज ने विपरित परिस्थितियों में असाधारण खेल दिखा कर टी-20 का विश्व खिताब जीत लिया था।

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