संन्यास के 7 साल बाद छलका सहवाग का दर्द, बोले- ड्रॉप न होता तो 10,000 से ज्यादा टेस्ट रन बनाता

अपनी तूफानी बल्लेबाजी से टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदलने वाले टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) ने अपने करियर को लेकर बड़ा बयान दिया है।

Virender sehwag

नई दिल्ली, 24 मई: अपनी तूफानी बल्लेबाजी से टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदलने वाले टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) ने अपने करियर को लेकर बड़ा बयान दिया है। सहवाग का ऐसा कहना है कि अगर उन्हें टीम से ड्रॉप ना किया जाता, तो वह 10,000 से ज्यादा टेस्ट रन बना सकते थे। बता दें कि, सहवाग ने साल 2015 में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया था।

स्पोर्ट्स 18 के 'होम ऑफ हीरोज' के शो में वीरेंद्र सहवाग ने कहा, ''अचानक मुझे अहसास हुआ कि मैं टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हूं, मैं बहुत निराश हो गया। अगर मुझे उस एक साल के लिए ड्रॉप नहीं किया जाता, तो मैं अपना टेस्ट करियर 10 हजार से ज्यादा रनों के साथ खत्म करता।''

द्रविड़ की कप्तानी में हुए थे ड्रॉप

द्रविड़ की कप्तानी में हुए थे ड्रॉप

राहुल द्रविड़ की कप्तानी में कार्यकाल में खराब फॉर्म के चलते चयनकर्ताओं ने सहवाग को भारतीय टेस्ट टीम से बाहर कर दिया था। 2006-07 के साउथ अफ्रीका के दौरे पर भी सहवाग को टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं बनाया गया था। हालांकि, वह उस दौरान वनडे और टी-20 टीम का हिस्सा थे।

2007-08 में जब अनिल कुंबले की कप्तानी में भारत, ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गया था, तब सहवाग की टीम में वापसी हुई थी। एडिलेड ओवल में खेले गए आखिरी टेस्ट की पहली पारी में वीरू ने 63 और दूसरी पारी में 151 रन बनाए थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

संन्यास के बारे में सोच रहे थे वीरू

संन्यास के बारे में सोच रहे थे वीरू

इंटरव्यू में सहवाग ने बताया कि राष्ट्रीय टीम से ड्रॉप किए जाने के बाद वह संन्यास के बारे में सोचने लगे थे, लेकिन सचिन तेंदुलकर के कहने पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। टेस्ट क्रिकेट में वापसी के बाद उन्होंने मार्च में साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज की एक पारी में 319 रन की धमाकेदार पारी भी खेली थी। 2010 में सहवाग आईसीसी टेस्ट रैंकिग में पहले पायदान पर भी पहुंचे।

कुंबले ने दिखाया था भरोसा

कुंबले ने दिखाया था भरोसा

सहवाग ने कहा कि, ''उस दौर के बाद अनिल कुंबले ने मुझसे वादा किया था कि मैं जब तक टेस्ट टीम का कप्तान रहूंगा, तुम टेस्ट टीम से बाहर नहीं होगे। खिलाड़ी को इस तरह कप्तान से कॉन्फिडेंस मिलता है। करियर की शुरुआत में सौरव गांगुली ने मुझ वह भरोसा दिखाया था और बाद में कुंबले ने।''

अनिल कुंबले की कप्तानी में सहवाग ने 9 टेस्ट मैचों में 65 के औसत से कुल 1040 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 3 शतक देखने को मिले। इन 3 शतकों में एक दोहरा शतक और एक तिहरा शतक शामिल है।

शानदार रहा सहवाग का करियर

शानदार रहा सहवाग का करियर

वीरेंद्र सहवाग ने 104 टेस्ट मैचों में लगभग 50 के औसत और 82 के स्ट्राइक रेट से 8586 रन बनाए। वहीं, 251 एकदिवसीय मैचों में उनके बल्ले से 35 के औसत से 8273 रन निकले। 19 टी-20 आई मैचों में पूर्व भारतीय ओपनर ने 145 के स्ट्राइक रेट से 394 रन बनाए। तीनों फॉर्मेट में उनके नाम पर 38 शतक और 72 अर्धशतक दर्ज हैं।

सहवाग टीम इंडिया के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक नहीं बल्कि दो बार टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में 300 से ज्यादा का स्कोर बनाया है। वनडे में उनके नाम पर एक दोहरा शतक भी दर्ज है।

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