खतरे में पड़ रहा है टेस्ट क्रिकेट का भविष्य, ICC प्रमुख ग्रेग बार्कले ने इसे ठहराया जिम्मेदार
नई दिल्ली। इस समय न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज जारी है। सीरीज के पहले मैच में इंग्लैंड की पहली पारी 141 रनों पर ही ढेर हो गई। एक समय भी नहीं लगा कि इंग्लिश बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट के लिहाज से खेल रहे हैं। ऐसे में आईसीसी प्रमुख ग्रेग बार्कले को टेस्ट क्रिकेट का भविष्य खतरे में लग रहा है। उन्होंने आगाह किया है कि भविष्य में टेस्ट मैच कम हो सकते हैं।

इस साल दिसंबर में अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करने वाले बार्कले ने घरेलू फ्रेंचाइजी लीग को इसका जिम्मेदार ठहराया है। बार्क्ले ने खुलासा किया कि टेस्ट क्रिकेट और फ्रेंचाइजी लीग के बीच द्विपक्षीय सीरीज को संभालना मुश्किल हो गया है। बार्कले ने बीबीसी को बताया, "घरेलू लीगों की बढ़ती संख्या कुछ चीजों को पीछे करने मजबूर कर रही है और जो बीच में निचोड़ा जा रहा है वह द्विपक्षीय क्रिकेट है, और इसलिए हम सब कुछ फिट करने की कोशिश कर रहे हैं।"
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आईसीसी प्रमुख ने कहा, "भविष्य में उन देशों को उतने मैच नहीं मिलपाएंगे, जितने की वो उम्मीद कर रहे होंगे। और उन्हें एक्सपोजर नहीं मिलेगा, खासकर भारत के खिलाफ और एक कम हद तक ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड। तो हम एक निचोड़ देखेंगे। 10-15 साल के समय में, मैं अभी भी टेस्ट क्रिकेट को खेल का एक अभिन्न अंग के रूप में देखता हूं। हो सकता है इसमें कमी भी आए।''
आईसीसी प्रमुख ने कहा कि छोटे देशों को टेस्ट मैच बहुत कम खेलने को मिलेंगे, जबकि बड़े तीन देश, भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया को फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यह खेल का सबसे छोटा प्रारूप है जो क्रिकेट के लिए प्रशंसकों और पैसे को आकर्षित कर रहा है और यह भविष्य में बहुत अहम होगा। यहां तक कि प्रसारकों को भी खेल के छोटे रूपों में अधिक रुचि होगी।
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बार्कले ने कहा, "कुछ देशों को जगह बनानी पड़ सकती है और टेस्ट क्रिकेट कम खेलने पड़ सकते हैं। कुछ छोटे पूर्ण सदस्यों को यह स्वीकार करना होगा कि वे उतनी टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल सकते जितना वे चाहते थे, इसलिए हम उसमें कमी देख सकते हैं। साल में चार या पांच मैच खेल पाएंगे,-जबकि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और भारत टेस्ट क्रिकेट वैसे ही खेल रहे होंगे जैसे वे अभी खेल रहे हैं। अगर आप रणनीतिक रूप से देखें कि क्रिकेट किस तरह से चल रहा है, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि सफेद गेंद वाला क्रिकेट भविष्य बना रहा है। यही वह खेल है जिसकी प्रशंसकों द्वारा मांग की जाती है, यही वह जगह है जहां प्रसारक अपना संसाधन लगा रहे हैं, यह वही है जो पैसा चला रहा है।"












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