'मैं साहा की बातों से हर्ट नहीं हूं', द्रविड़ ने कहा- चुप रहने से अच्छा है खिलाड़ी से कड़वा सच कह दो

नई दिल्ली, 21 फरवरी: भारत के हेड कोच राहुल द्रविड़ ने इस मामले पर रोशनी डाली है कि उनके और रिद्धिमान साहा के बीच हुई बातचीत के पीछे की वजह क्या थी। भारत के अनुभवी विकेटकीपर रिद्धिमान साहा ने राहुल द्रविड़ पर आरोप लगाया था कि हेड कोच ने उनको संन्यास लेने की सलाह दी है और कहा है कि अब वे टीम में नहीं लिए जाएंगे। यह सब बातें लीक होने के बाद राहुल द्रविड़ के ऊपर सबकी नजरें चली गई जिसका जवाब हेड कोच ने अब दिया है।

साहा को किसी तरह के भ्रम में नहीं रखना चाहते थे

साहा को किसी तरह के भ्रम में नहीं रखना चाहते थे

रिद्धिमान साहा को भारत ने श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए नहीं चुना है और राहुल द्रविड़ इस बात से इनकार नहीं करते कि उन्होंने रिद्धिमान साहा को संन्यास लेने वाली बात नहीं कही थी। साहा के साथ हुई बातचीत पर राहुल द्रविड़ कहते हैं कि वह साहा को किसी तरह के भ्रम में नहीं रखना चाहते थे और खिलाड़ियों से बातचीत करने में ऐसी स्पष्टता का होना बहुत जरूरी है। भारत द्वारा वेस्टइंडीज को t20 सीरीज में हराने के बाद द्रविड़ ने कहा, 'मुझे रिद्धिमान साहा द्वारा कही गई बात से कोई दुख नहीं पहुंचा है। मैं उनकी तहे दिल से इज्जत करता हूं और जो भी उन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए योगदान दिया है उसकी भी मैं सराहना करता हूं। मेरी बातचीत उनसे स्पष्टता और ईमानदारी के आधार पर की गई थी।'

मेरा काम स्पष्ट बातचीत करना है- राहुल द्रविड़

मेरा काम स्पष्ट बातचीत करना है- राहुल द्रविड़

द्रविड़ कहते हैं कि ऋषभ पंत पहले से ही भारतीय टीम के नंबर 1 विकेटकीपर बन चुके हैं और बंगाल के दिग्गज कीपर साह के लिए आगे अब मौके नहीं बनते दिख रहे। द्रविड़ आगे कहते हैं, 'मैं यह बताने की कोशिश कर रहा था कि ऋषभ पंत हमारे नंबर 1 विकेट कीपर बल्लेबाज के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं और मेरे कहने का मतलब यह भी था कि अब हम पंत के बैकअप के तौर पर केएस भरत जैसे युवा विकेटकीपर को तराशने की ओर देख रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं साहा की इज्जत नहीं करता या उनको निराश करना चाहता था। द्रविड़ मानते हैं कि उनका काम स्पष्ट बातचीत करना है चाहे वह खिलाड़ियों को पसंद आए चाहे ना आए।

जरूरी नहीं खिलाड़ियों को मेरी बात पसंद आए-

जरूरी नहीं खिलाड़ियों को मेरी बात पसंद आए-

द्रविड़ का मानना है कि वे खिलाड़ियों से उम्मीद भी नहीं करते कि जो बातचीत वे उनसे करेंगे वह खिलाड़ियों को हमेशा पसंद आएगी। कई बार बातचीत करना मुश्किल होता है लेकिन स्पष्ट बात करना उससे ज्यादा जरूरी होता है। ऐसे में आप आसान रास्ता नहीं सुन सकते। आपको बात करनी ही होगी और यही हेड कोच की बातचीत का स्टाइल है। द्रविड़ कहते हैं कि जब भी कोई प्लेइंग इलेवन चुनी जाती है तो उससे पहले भी हर खिलाड़ी के साथ बात करते हैं और यह उनके काम करने का तौर तरीका है।

 कड़वा सच बोलना बात को छुपाने से कहीं ज्यादा बेहतर

कड़वा सच बोलना बात को छुपाने से कहीं ज्यादा बेहतर

उन्होंने कहा, "मैं हमेशा इस तरह की बातचीत में विश्वास रखता हूं चाहे हम किसी भी तरह की प्लेइंग इलेवन को चुन रहे हो और खिलाड़ी को इस बात का पूरा अधिकार है कि वह पूछे उसको क्यों नहीं चुना गया है। खिलाड़ी के लिए ना चुने जाने पर अपसेट होना स्वाभाविक है। कड़वा सच बोलना बात को छुपाने से कहीं ज्यादा बेहतर विकल्प है। सबसे आसान तरीका है कि मैं खिलाड़ियों से इस बारे में बातचीत ही ना करूं लेकिन मैं ऐसा नहीं करने जा रहा हूं। लेकिन एक स्टेज पर खिलाड़ी खुद समझ पाते हैं कि मैंने उनसे वो बात क्यों कही थी।"

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