अरुण लाल और बुलबुल की हल्दी रस्म की तस्वीरें वायरल, उम्र के अंतर के चलते जोड़ी हुई मशहूर
कोलकाता, 26 अप्रैल: भारत के पूर्व क्रिकेटर अरुण लाल ने 66 साल की उम्र में अपने से बहुत छोटी बुलबुल साहा के साथ शादी करने का फैसला किया है। बुलबुल साहा अरुण की लंबे समय से दोस्त रही हैं और वह केवल 38 साल की है। यह जोड़ी 2 मई को शादी करने जा रही है और यह शादी कोलकाता में होने जा रही है। इस जोड़ी की शादी से पहले रस्में शुरू हो चुकी है उसमें से ही एक मुख्य रस्म माने जाने वाली हल्दी रविवार 24 अप्रैल को संपन्न हुई है।
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हल्दी की रस्म की कई फोटो वायरल-
इस जोड़े की हल्दी की रस्म की कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और दोनों की उम्र के बीच बड़े फासले के चलते इन तस्वीरों पर फैंस का तरह-तरह का रिएक्शन भी आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अरुण लाल को उनकी पहली पत्नी ने यह शादी करने के लिए सहमति दे दी है और इस विशेष अवसर पर अरुण लाल की फैमिली के अधिकतर सदस्य नई जोड़ी को आशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहेंगे।

हल्दी के पूरे हो जाने के बाद दावत
जाहिर है इस जोड़ी ने अपनी आगे की जिंदगी चुन ली है और इनकी हल्दी की रस्म भी संपन्न हो गई है। हल्दी के पूरे हो जाने के बाद दावत भी दी गई और इस दौरान अरुण लाल व उनकी होने वाली पत्नी बुलबुल को मुस्कुराते चेहरे के साथ देखा गया। बताया जा रहा है कि यह दोनों कोलकाता के एक होटल में निजी तौर पर शादी कर रहे हैं जिसमें कुछ चुनिंदा लोग ही शामिल होंगे। अरुण लाल ने अपनी पहली पत्नी रीना को तलाक दिया है।

पहली पत्नी की देखभाल जारी रखेंगे-
रीना काफी बीमार चल रही हैं जिसके चलते उनको देखभाल की जरूरत है और भारतीय क्रिकेटर ने उनकी देखभाल करने का फैसला किया है। रिपोर्टों के अनुसार अरुण लाल और बुलबुल शादी के बाद एक साथ मिलकर रीना की देखभाल करना जारी रखेंगे। अरुण लाल भारत के पूर्व क्रिकेटर भी रह चुके हैं लेकिन उन्होंने आज की पीढ़ी में अपनी कमेंट्री के जरिए काफी नाम कमाया है।

खुद भी कैंसर से जंग जीत चुके हैं-
हालांकि 2016 में जब उन्हें कैंसर हो गया तो उन्हें कमेंट्री भी छोड़नी पड़ी। अच्छी बात यह है कि अरुण लाल कैंसर से जंग जीत गए और आज भी वे 66 साल की उम्र में काफी दुबले लगते हैं। अरुण लाल ने भारत को 16 टेस्ट मैचों में भी प्रजेंट किया है और वे 13 एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले भी खेल चुके हैं। अरुण लाल ने भारतीय क्रिकेट टीम के साथ अपने 1982 से लेकर 1989 तक के समय के बीच 7 अंतर्राष्ट्रीय अर्धशतक बनाए।

अब कोचिंग के जरिए खेल में सक्रिय-
हालांकि वह भारतीय क्रिकेट टीम से अंदर और बाहर भी होते रहे लेकिन उनके फर्स्ट क्लास आंकड़े बहुत अच्छे हैं। बाद में कमेंट्री स्टार्ट हो गई थी। लाल ने कैंसर से उबरने के बाद बंगाल की टीम को कोचिंग देने के लिए क्रिकेट में वापसी की। लाल की कोचिंग में बंगाल की टीम 2019-2000 में रणजी ट्रॉफी में सौराष्ट्र के खिलाफ फाइनल तक का सफर तय करने गई हालांकि वे खिताब को लेने से चूक गए थे।












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