चैंपियंस ट्रॉफी में Pakistan की हार के बाद PCB के खर्चों का होगा हिसाब, संसद में जमकर मचेगा बवाल!
पाकिस्तान की चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में हार ने न केवल क्रिकेट फैंस को निराश किया, बल्कि देश की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने संकेत दिए हैं कि पीएम इस निराशाजनक परिणाम की गहन समीक्षा करेंगे। ऐसे में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के खर्चों और मैनेजमेंट डिसीजन पर संसद में गर्म बहस हो सकती है।
राणा सनाउल्लाह ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की फाइनेंशियल प्रायोरिटी और खर्चों पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पीसीबी का बजट बेहद बढ़ा हुआ था, जबकि इससे उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिले। लाहौर, रावलपिंडी और कराची के स्टेडियमों के कायाकल्प के लिए निर्धारित 12.3 बिलियन पाकिस्तानी रुपये के बजट में लगभग 6 बिलियन रुपये की अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई।

PCB की फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी पर सवाल
सनाउल्लाह ने पीसीबी की स्वायत्तता पर भी सवाल उठाए। यह कहते हुए कि बोर्ड ने अपनी स्वतंत्रता का सही उपयोग नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि चैंपियंस ट्रॉफी में शामिल किए गए मेंटर्स अपनी भूमिका से अनजान थे, जबकि उन्हें अच्छी सैलरी मिल रही थी। इसके साथ ही उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि देश की फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
संसद में बहस की संभावना
राणा सनाउल्लाह ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आग्रह किया कि वे इस मसले पर कैबिनेट और संसद में चर्चा करने के लिए कदम उठाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल एक घटना या एक चेयरमैन का मामला नहीं है, बल्कि यह वर्षों से चल रही स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम का परिणाम है।
टीम के प्रदर्शन में गिरावट और भविष्य के बदलाव
पाकिस्तान क्रिकेट टीम पिछले कुछ सालों से लगातार संघर्ष कर रही है। खासकर 2022 में टी20 वर्ल्ड कप फाइनल तक पहुंचने के बाद। लगातार तीन ICC टूर्नामेंटों में शुरुआती हार ने टीम के प्रदर्शन को प्रभावित किया है और अब उम्मीद की जा रही है कि पीसीबी और टीम मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं।
राणा सनाउल्लाह ने पीसीबी अधिकारियों द्वारा प्राप्त लाभों पर भी सवाल उठाया और कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले पर खुद ध्यान देना चाहिए। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही है कि चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की हार और पीसीबी के खर्चों पर संसद में जल्द ही जोरदार बहस हो सकती है।












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