12 साल बाद बेहतरीन कमबैक करने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया सीरीज में जगह पाने की नहीं सोच रहे उनादकट
बांग्लादेश के खिलाफ बेहतरीन टेस्ट वापसी करने वाले जयदेव उनादकट आगे कुछ भी उम्मीद नहीं कर रहे हैं और सौराष्ट्र के लिए आगामी रणजी ट्रॉफी मैचों पर ध्यान लगा रहे हैं।

भारत के बाए हाथ के तेज गेंद जयदेव उनादकट बदले से नजर आ रहे हैं। वे फिट और सटीक दोनों लगे हैं। भारत के पास टेस्ट क्रिकेट में जिस बाए हाथ के पेसर की कमी है वे उस जगह को भी कुछ साल के लिए भरने की उम्मीद जगाते हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में इतना बेहतरीन प्रदर्शन किया कि टेस्ट में 12 साल बाद सिलेक्शन हो गया। 12 साल का इंतजार लंबा रहा लेकिन उन्होंने बांग्लादेश में टेस्ट टीम में शानदार वापसी के साथ इसको खत्म किया। अब उनादकट कुछ भी उम्मीद नहीं कर रहे हैं और सौराष्ट्र के लिए आगामी रणजी ट्रॉफी मैचों पर ध्यान लगा रहे हैं।
इस समय पीक पर हैं उनादकट
उनादकट ने एमएस धोनी की कप्तानी में 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। फिर इंटरनेशनल लेवल पर गायब होने के बाद वे आईपीएल में उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहे। फिर उनादकट ने 2019-20 में एक रणजी सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड भी बनाया, जब उन्होंने 67 विकेट लिए। अब जाकर 31 वर्षीय सौराष्ट्र के तेज गेंदबाज को जगह मिली जब उन्हें दूसरे टेस्ट में कुलदीप यादव की जगह बुलाया गया। उन्होंने मीरपुर टेस्ट की पहली पारी में 2 विकेट चटकाए और दूसरी पारी में एक और विकेट लिया। वे अपने कद और वैरिएशन का अच्छा इस्तेमाल करते हुए हर स्पैल में खतरनाक दिखे।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज के बारे में नहीं सोच रहे
अगर फरवरी-मार्च में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी की टीम में वापसी होती है तो उनादकट के लिए प्लेइंग 11 में अपनी जगह बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। हालांकि वे इतनी आगे नहीं देख रहे हैं।
उनादकट ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "मैं चीजों की उम्मीद नहीं करना चाहता। मैं रणजी के अगले दौर (दिल्ली के खिलाफ) के लिए उत्सुक हूं, और मैं बस यही सोच रहा हूं। अगर ऐसा होना है, तो यह होगा। मुझे उम्मीद है कि भारत ऑस्ट्रेलिया पर हावी रहेगा। यह एक शानदार सीरीज होने जा रही है।"
31 साल के उनादकट मानते हैं कि अगले चार से पांच साल वे करियर के चरम पर होंगे। उन्हें विश्वास था कि वह वापसी करने में सक्षम होंगे।
भारतीय पेस क्रांति से प्रभावित हुए
वैसे ये सब काफी मुश्किल था क्योंकि 2016 से 2021 तक, भारत ने बुमराह, शमी, उमेश यादव और ईशांत शर्मा का उभार देखा। भारत कोहली के अंडर में टॉप की पेस बैटरी वाली टीम बना जिसमें उनादकट के लिए तब कोई जगह नहीं थी। लेकिन उनादकट उस दौर की भारतीय तेज गेंदबाजी क्रांति से काफी मोटिवेट हुए।
उनादकट ने कहा, "मुझे हमेशा विश्वास था कि मुझे एक और मौका मिलेगा। पिछले चार सालों में भारतीय तेज गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे। मैं उन्हें देखकर प्रेरित हो रहा था।"
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