अंपायर की गलती ने छीना SRH से मैच, आवेश खान की बेवकूफी को किया नजरअंदाज, कैसे पेनल्टी से बचे ऋषभ पंत

SRH vs LSG: क्रिकेट में बाउंड्री को पार करने के बाद ही गेंद पर चौका या छक्का माना जाता है। फील्डर को पूरा अधिकार होता है, कि वह सीमा रेखा पार करने से गेंद को रोक ले। इसके अलावा अन्य किसी व्यक्ति के पास यह अधिकार नहीं होता। यहां तक कि सीमा रेखा पर गेंद वापस पहुंचाने के लिए बैठे बॉल बॉय भी चौका जाने के बाद गेंद टच कर सकते हैं। इस बीच आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच हुए मैच में कुछ ऐसा हुआ, जो चर्चा का विषय बन गया है।

मामला 20वें ओवर की 5वीं गेंद का है, जब लखनऊ को जीत के लिए सिर्फ 1 रन की दरकार थी। ऋषभ पंत ने शॉट खेला, लेकिन गेंद बाउंड्री लाइन पार करती, उससे पहले ही डगआउट से दौड़कर आए आवेश खान ने उसे रोक दिया। ICC रूल्स के अनुसार, यह एक ऐसी गलती थी जो लखनऊ को जीत की दहलीज से वापस खींच सकती थी।

srh vs lsg

फील्डर के अलावा कोई और गेंद रोके तो क्या होगा?

क्रिकेट की मर्यादा और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए ICC लॉ 20 और लॉ 41 बहुत सख्त हैं। नियम के अनुसार, मैदान पर मौजूद 11 फील्डरों, एक्टिव बल्लेबाजों और अंपायर (अनजाने में) के अलावा कोई भी बाहरी फैक्टर गेंद नहीं रोक सकता।

  • Law 20: अगर कोई कुत्ता, पक्षी या डगआउट का खिलाड़ी (जो उस समय खेल नहीं रहा है) गेंद रोकता है, तो अंपायर उसे डेड बॉल घोषित कर सकता है।
  • Law 41 (अनुचित खेल): यह नियम सबसे खतरनाक है। अगर अंपायर को लगता है कि डगआउट के खिलाड़ी ने जानबूझकर खेल में बाधा डाली है, तो वह फील्डिंग टीम को 5 पेनल्टी रन दे सकता है।

SRH vs LSG मैच में क्या होता?

  • हैदराबाद को मिलते 5 रन: नियम के अनुसार आवेश खान का बर्ताव लॉ 41 में रखने से पेनल्टी के 5 रन विपक्षी टीम (SRH) के खाते में जुड़ते। मान लीजिए हैदराबाद का स्कोर 156 था, तो वह बढ़कर 161 हो जाता।
  • लक्ष्य में बदलाव: हैदराबाद का स्कोर बढ़ते ही लखनऊ के लिए जीत का लक्ष्य भी 5 रन बढ़ जाता।
  • गेंद का हिसाब: आवेश ने गेंद बाउंड्री से पहले रोकी थी, इसलिए अंपायर उसे डेड बॉल करार देते और वह रन काउंट नहीं होता।
  • नया समीकरण: 5वीं गेंद पर कोई रन नहीं मिलता और लक्ष्य 5 रन बढ़ जाता। ऐसे में लखनऊ को अंतिम गेंद पर जीत के लिए 1 के बजाय 6 रनों की जरूरत होती।

ऋषभ पंत और लखनऊ के लिए सबक

आवेश खान का यह व्यवहार भले ही जीत की खुशी में था, लेकिन तकनीकी रूप से इसने खेल की भावना और नियमों को ताक पर रख दिया। अगर मैच रेफरी इस पर कड़ा संज्ञान लेते हैं, तो आवेश पर भारी जुर्माना लगना तय है। खुशकिस्मती यह रही कि उस समय अंपायरों ने इसे नजरअंदाज कर दिया, वरना लखनऊ को आखिरी गेंद पर छक्का मारना पड़ता, जो लगभग असंभव हो सकता था। हो सकता है कि पंत उस अंतिम गेंद पर छक्का नहीं मार पाते और हैदराबाद मैच अपने नाम कर लेता।

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