IPL-2023: 18 साल की उम्र तक स्पिन गेंदबाज थे हार्दिक पांड्या, फिर कैसे बने तेज गेंदबाज?

IPL 2023: हार्दिक पांड्या आज भारतीय टीम के टॉप के तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हैं। उन्होंने आईपीएल 2022 में गुजरात टाइटंस के लिए कैसी परफॉरमेंस दी ये सब जानते हैं। लेकिन वे 18 साल की उम्र तक स्पिन बॉलर थे।

Hardik Pandya

IPL 2023 Hardik Pandya : हार्दिक पांड्या 2022 में पहली बार गुजरात टाइटंस के कप्तान बने और अपनी टीम को आइपीएल विजेता बना दिया। हार्दिक ने न केवल बल्ले से रन बनाये बल्कि अपनी तेज गेंदबाजी का लोहा भी मनवाया। हार्दिक आज तेज गेंदबाज के रूप में स्थापित हैं लेकिन शुरू में वे स्पिन गेंदबाजी किया करते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या ने एक बार बताया था कि जब वह (हार्दिक) 18 के थे तब तक वे स्पिन गेंदबाजी करते थे। जब वे बड़ौदा की टीम में शामिल हुए तो टीम के तत्कालीन कोच सनथ कुमार ने उन्हें तेज गेंदबाजी करने की सलाह दी थी।

18 साल की उम्र तक स्पिनर थे हार्दिक पांड्या

सनथ कुमार कर्नाटक के पूर्व तेज गेंदबाज थे। उन्होंने हार्दिक के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचान लिया। उनकी सलाह पर हार्दिक ने नेट प्रैक्टिस के दौरान जो पहली गेंद डाली उसकी रफ्तार ने सभी को चौंका दिया। एक स्पिनर भला इतनी तेज गेंड जाल सकता है ? उस गेंद की रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे की थी। कोच सनथ इस स्पीड को देख कर चौकें। उन्होंने हार्दिक से एक और गेंद डालने को कही। दूसरी गेंद की रफ्तार उससे भी तेज थी। इसके बाद सनथ कुमार ने हार्दिक से आगे तेज गेंदबाजी करने के लिए कहा। फिर तो हार्दिक वैसे ऑलराउंडर के रूप में उभरे तो तेज गेंदबाजी में भी अपना कमाल दिखा सकता है।

Hardik Pandya


संघर्ष के दिन

2022 में आइपीएल की खिताबी जीत ने हार्दिक को स्टारडम के शिखर पर पहुंचा दिया। लेकिन एक वो भी समय था जब उन्हें आइपीएल में जगह बनाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था। हार्दिक ने 2014 की आइपीएल नीलामी में अपना नाम डाला था लेकिन उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला था। उस समय उनकी उम्र केवल 20 साल थी और वे बड़ौदा के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला करते थे। अनसोल्ड रहने से हार्दिक को बहुत निराशा हुई थी। वो तो मुम्बई इंडियंस के तत्कालीन कोच जॉन राइट की नजर हार्दिक पर पड़ गयी और इसके बाद उनकी किस्मत पलट गयी।

जॉन राइट के कारण हार्दिक मुम्बई इंडियंस से जुड़े

2014 की नीलामी में निराश होने के बाद हार्दिक बड़ौदा के लिए क्रिकेट खेलने लगे। बड़ौदा को सैयद मुश्ताक अली टूर्नामेंट का मैच मुम्बई में खेलना था। जब हार्दिक पांड्या इस प्रतियोगिता का मैच खेल रहे थे तब संयोग से मुम्बई के कोच जॉन राइट भी स्टेडियम में मौजूद थे। वे हार्दिक की बैटिंग से बहुत प्रभावित हुए। विशेष कर उनके छक्के मारने की क्षमता से। इसके बाद जब हार्दिक ने 2015 की आइपीएल नीलामी में फिर अपना नाम डाला तो इस बार मुम्बई इंडियंस के कोच जॉन राइट और कप्तान सचिन तेंदुलकर ने उन्हें 10 लाख रुपये की बेस प्राइस पर खरीद लिया। इस मौके को हार्दिक ने दोनों हाथों से भुनाया।

पहले मैच के लिए इंतजार करना पड़ा

आइपीएल 2015 में हार्दिक अपनी क्षमता दिखाने के लिए उतावले थे। लेकिन उस समय मुम्बई इंडियंस में कई धुरंधर खिलाड़ी मौजूद थे। हार्दिक नये खिलाड़ी थे और उनके पास प्रथमश्रेणी क्रिकेट खेलने का ही अनुभव था। इसलिए उनका प्लेइंग इलेवन में शामिल होना मुश्किल था। मुम्बई इंडियंस के शुरुआती चार मैच में उन्हें लिया गया। दुर्भाग्य से मुम्बई ये चारो मैच हार गया था। अब पांचवां मैच उसके लिए जीतना जरूरी था वर्ना प्ले ऑफ में पहुंचना कठिन हो जाता। मुम्बई का पांचवां मैच रॉयल चैलैंजर्स बेंगलुरु के साथ था। लगातार चार हार से उबरने के लिए टीम में बदलाव किया गया। बेंच पर बैठे हार्दिक पांड्या को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया।

हार्दिक का IPL डेब्यू

19 अप्रैल 2015 को हार्दिक पांड्या ने आरसीबी के खिलाफ अपना आइपीएल डेब्यू किया। इस मैच में मुम्बई की तरफ से लेंडल सिमंस ने 59, उन्मुक्त चंद ने 58, रोहित शर्मा ने 42 रन बनाये। इसके बाद अंतिम ओवरों में हर्दिक पांड्या ने अपने पहले ही मैच में तेज पारी खेली। उन्होंने 6 गेंदों पर 16 रन बनाये जिसमें 2 छक्के शामिल थे। उन्होंने अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन किया और अपने चयन को सही साबित किया। लेकिन अगले मैच हार्दिक को फिर टीम से बाहर कर दिया गया। मुम्बई पांचवां मैच जीतने के बाद छठा मैच फिर हार गया। 6 में 5 हार के बाद मुम्बई के लिए अब जरूरी हो गया कि वह बाकी बचे 8 मैचों में 7 जरूर जीते। इसके बाद मुम्बई ने सबको चौंकाते हुए 14 में से 8 मैच जीत कर प्ले ऑफ में अपनी जगह बना ली।

मुम्बई को चाहिए थे 4 ओवर में 51 रन

प्रतियोगिता का 43वां मैच मुम्बई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच था। प्ले ऑफ में पहुंचने के लिए मुम्बई को यह मैच को जीतना बेहद जरूरी था। हार्दिक पांड्या प्लेइंग इलेवन में शामिल थे। चेन्नई ने पहले खेलते हुए 5 विकेट पर 158 रन बनाये। मुम्बई के लिए 159 रनों का टारगेट बहुत बड़ा तो नहीं था लेकिन उसकी पारी दबाव में आ गयी। अंतिम चार ओवर में मुम्बई को जीतने के लिए 51 रन चाहिए थे। 12 रन प्रति ओवर से अधिक का टारगेट था। लक्ष्य कठिन हो गया था। 17वें ओवर में 17 रन बने। अंबाती रायडू ने दो छक्के लगाये। रोहित शर्मा ने सिंगल से तीन रन लिये। कुल 17 रन बने। अब 18 गेंदों पर 34 रन चाहिए थे। 18वें ओवर की पहली गेंद पर रोहित आउट हो गये। उनके आउट होने पर हार्दिक पांड्या बैटिंग के लिए आये। इस ओवर में सिर्फ 4 रन ही बन पाये और एक विकेट भी गिरा। अब दो ओवर में 30 रन की दरकार थी।

6,6,6 ने हार्दिक का करियर बना दिया

19वें ओवर के लिए धोनी ने पवन नेगी को गेंद थमा दी। लेकिन उनका यह दांव गलत साबित हुआ। हार्दिक ने पहली गेंद पर छक्का लगाया। दूसरी गेंद पर कोई रन नहीं बना। तीसरी गेंद पर हार्दिक ने फिर छक्का मारा। चौथी गेंद फिर छक्का। चार गेंदों पर 18 रन बन चुके थे। हार्दिक ने तीन छक्कों से मैच को मुम्बई के पाले में कर दिया। पांचवीं गेंद हार्दिक ने एक रन लेकर स्ट्राइक रायडू को सौंप दी। अंतिम गेंद पर रायडू ने छक्का जड़ दिया। 19वें ओवर में 25 रन बने। अब अंतिम ओवर में जीत के लिए सिर्फ 5 रन चाहिए थे जो दो गेंदों पर ही बन गये। इस तरह मुम्बई ने 6 विकेट से यह मैच जीत लिया। इस पारी के बाद हार्दिक मुम्बई के भरोसेमंद खिलाड़ी बन गये। फिर तो वे कामयाबी उनके कदम चूमने लगी। जिस मुम्बई इंडियंस ने हार्दिक को 10 लाख रुपये में खरीदा था बाद में उसी ने उन्हें 11 करोड़ रुपये दिये। इसके बाद 2022 में गुजरात ने उन्हें अपनी टीम से जोड़ने के लिए 15 करोड़ रुपये दिये।

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