पॉवरप्ले में विलेन बना बॉलर बाद में साबित हुआ हीरो, ब्रावो ने कहा था- आज तुम्हे दम दिखाना है

नई दिल्ली, 2 मई: चेन्नई सुपर किंग्स की टीम को कप्तान बदलने के साथ ही जीत मिली है। धोनी की अगुवाई में सीएसके ने सनराइजर्स हैदराबाद की टीम को हराने में कामयाबी हासिल की। यह एसआरएच की लगातार दूसरी हार है। लेकिन केन विलियमसन की टीम ने खूब लड़ाई की पर वे ऐसे लड़ते हुए लगातार दूसरी बार हार गए। पिछले मैच में उनसे गुजरात टाइटंस ने जीत छीन ली थी तो इस मैच में चेन्नई की टीम ने उनको जीत का रास्ता पूरा पार नहीं करने दिया वर्ना वे काफी करीब आ चुके थे।

सनराइजर्स की शुरुआत बहुत धाकड़ हुई

सनराइजर्स की शुरुआत बहुत धाकड़ हुई

सीएसके द्वारा दिए गए 203 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए हैदराबाद की टीम 189 रन ही बना सकी और उसको 13 रनों से हार का सामना करना पड़ा। सनराइजर्स की शुरुआत बहुत धाकड़ हुई थी। पहले पॉवरप्ले में उनका रन रेट 10 का रहा। फिर तभी अभिषेक वर्मा 39 रनों के स्कोर पर मुकेश चौधरी के हाथों आउट हुए और गेम की कहानी सीएसके के पक्ष में गिरती हुई दिखने लगी।

मुकेश चौधरी ने मैच में चार विकेट चटकाए

मुकेश चौधरी ने मैच में चार विकेट चटकाए

तेज गेंदबाज मुकेश चौधरी ने मैच में चार विकेट चटकाए। इससे पहले मोहसिन खान भी चार ही विकेट ले चुके थे। कुल मिलाकर यह फास्ट बॉलरों का दिन साबित हुआ। मुकेश ने बाद में वाशिंगटन सुंदर का भी विकेट लिया और शशांक सिंह को भी चलता किया।

गेम के बाद बात करते हु मुकेश ने स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए बताया कि जब सनराइजर्स बहुत अच्छा कर रहा था तो उनको रोकने के लिए चांस लेना जरूरी था।

मैंने चांस लिया और विकेट मिले

मैंने चांस लिया और विकेट मिले

उन्होंने कहा, जब शुरुआत के चार पांच ओवर में विकेट नहीं गिरे तो मुझे चांस लेना पड़ा। मैंने चांस लिया और विकेट मिले। जब पहला कैच ड्रॉप हुआ तब मैंने खुद से कहा कि कैसे भी करके मुझे विकेट लेना होगा।

उन्होंने बताया कि ब्रावो की अनुपस्थिति एक बड़ा अंतर थी लेकिन कहा कि दिग्गज वेस्टइंडियन क्रिकेटर चाहता था उसकी गैरमौजूदगी में मुकेश अपने गेम को आगे बढ़ाएं।

अगर ब्रावो वहां होते तो वह उनको गाइड करते रहते

अगर ब्रावो वहां होते तो वह उनको गाइड करते रहते

मुकेश ने माना कि नई गेंद के साथ जिम्मेदारी आ गई थी। पॉवरप्ले में उनसे विकेट लेने की उम्मीद की गई थी, अगर वे ऐसा करते तो स्पिनरों के लिए काम आसान हो जाता। अगर ब्रावो वहां होते तो वह उनको गाइड करते रहते।

हालांकि मैच जीतने के बाद भी सीएसके के लिए राहत की कोई बात नहीं है क्योंकि वे 9 मुकाबले खेलकर 3 ही मैच जीत पाए है और प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए उनको अपने बचे बाकी सभी मैच जीतने हैं।

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