ऋषभ पंत पर लगा 100% फीस का जुर्माना, आमरे को मिली और भी बड़ी सजा, शार्दुल ठाकुर भी नपे
मुंबई, 23 अप्रैल: दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान ऋषभ पंत पर मैच फीस का 100% जुर्माना लगाया गया है क्योंकि उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग के कोड ऑफ कंडक्ट को तोड़ा है। ऋषभ पंत ने यह काम तब किया जब दिल्ली कैपिटल्स की टीम वानखेड़े स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ शनिवार रात को मुकाबला खेल रही थी। ऋषभ पंत का तोड़ा गया नियम level-2 के तहत आता है जो कि आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.7 के अंतर्गत आता है। ऋषभ पंत ने अपनी अपनी सजा को स्वीकार कर लिया है। दिल्ली कैपिटल्स के ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर पर भी नियमों को तोड़ने के चलते मैच फीस का 50% जुर्माना लगाया गया है।
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जो किया उसके लिए सब नपे-
यह भी लेवल 2 का नियम तोड़ा गया है और ठाकुर ने इसको स्वीकार कर लिया है। यह आईपीएल के नियमों के अंतर्गत आर्टिकल 2.8 में आता है। इसके अलावा दिल्ली के साथ सहायक कोच प्रवीण आमरे पर उनकी मैच फीस का पूरा 100% जुर्माना लगा है। इसके अलावा उनको नियम तोड़ने के चलते एक मैच के लिए बैन कर दिया गया है। आमरे ने level-2 का किया अपराध स्वीकार कर लिया है जोकि आर्टिकल 2.2 के अंतर्गत आता है।

आपा खोना भारी पड़ा-
शनिवार रात हुए मुकाबले में जब मैदानी अंपायर ने एक गेंद को नो बॉल नहीं दिया था तो डगआउट में बैठे ऋषभ पंत अपना आपा खो बैठे थे और उन्होंने मैदान पर मौजूद रॉवमन पावेल व कुलदीप यादव की जोड़ी को वापस बुलाने का इशारा किया था। इतना ही नहीं ऋषभ पंत ने अपने कोच प्रवीण आमरे को भी मैदान में अंपायर को समझाने के लिए भेज दिया। प्रवीण आमरे दौड़ते हुए मैदान के अंदर घुसे और एंपायर के साथ बहस भी की।

तीनों शख्सियत पर बड़े-बड़े जुर्माने ठोके गए
इसके अलावा शार्दुल ठाकुर को भी ऋषभ पंत के साथ मैदानी अंपायर के फैसले पर उंगली उठाते हुए देखा गया था। इस दौरान वाटसन ने पंत का दिमाग ठंडा करने की कोशिश भी की लेकिन वह परिस्थितियों की गर्मी में पूरी तरह से पिघल गए और अपना आपा खो बैठे जिसके चलते इन तीनों शख्सियत पर बड़े-बड़े जुर्माने ठोके गए हैं।
इतना ही नहीं दिल्ली के सहायक कोच शेन वॉटसन ने बाद में मैच प्रेजेंटेशन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बात कही थी। उन्होंने कहा था कि जो भी कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण जरूर है लेकिन दिल्ली कैपिटल्स की टीम ऐसे किसी भी काम को सपोर्ट नहीं करती है जो नियमों को तोड़ने के अंतर्गत आता है।

भावनाएं हावी हुई, क्योंकि मामला था भी वैसा-
दरअसल पूरी तरह गलती ऋषभ पंत की भी नहीं थी क्योंकि रॉवमन पॉवेल अंतिम ओवर में जिस तरीके से बल्लेबाजी कर रहे थे वह कुछ भी चमत्कार कर सकते थे। अंतिम छह गेंदों पर दिल्ली कैपिटल्स को जीत के लिए 36 रनों की दरकार थी और गेंदबाज मैकॉय को शुरुआती 3 गेंदों पर बेहतरीन छक्के लगाए जा चुके थे। तीसरी गेंद कमर की ऊंचाई पर थी और कायदे में नोबेल होनी चाहिए थी लेकिन मैदानी अंपायर नितिन मेनन ने इसको नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने थर्ड अंपायर का भी सहारा लेना उचित नहीं समझा।

गुस्सा समझ में आता है लेकिन यह नियमों के दायरे से बाहर था
अगर यह नो-बॉल हो चुकी होती तो दिल्ली कैपिटल्स की टीम 2 गेंदों में 19 रन ठोक चुकी थी और बाकी की 4 गेंदों पर 17 रन बनाने थे। इसलिए पंत का गुस्सा समझ में आता है लेकिन यह नियमों के दायरे से बाहर था। इसलिए उन पर, शार्दुल ठाकुर पर और कोच प्रवीण आमरे पर मोटा जुर्माना व सजा लगा दी गई है।
इसके बाद जब आखिरी तीन गेंद फेंकी गई तो पॉवेल कुछ नहीं कर पाए और दिल्ली कैपिटल्स टीम 15 रनों से मुकाबला हार गई और उनको बेहद महत्वपूर्ण 2 अंक भी गंवाने पड़े। मैच के बाद पंत मानते हैं कि अंपायर को नो-बॉल पर ध्यान देना चाहिए था क्योंकि यह करीबी मामला भी नहीं था और यह साफ तौर पर नो-बॉल ही थी।












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