IND vs SL T20 : जयूसर्या और संगकारा के दौर में श्रीलंका को कैसा जवाब दिया था भारत ने ?
नए साल में भारत और श्रीलंका के बीच टी-20 मुकाबले से क्रिकेट की शुरुआत हो रही है। एक जमाने में श्रीलंका की क्रिकेट में तूती बोलती थी। 1996 में वह विश्व विजेता बना था। उसके पास धाकड़ खिलाड़ियों की फौज थी।

नए साल में भारत और श्रीलंका के बीच टी-20 मुकाबले से क्रिकेट की शुरुआत हो रही है। एक जमाने में श्रीलंका की क्रिकेट में तूती बोलती थी। 1996 में वह विश्व विजेता बना था। उसके पास धाकड़ खिलाड़ियों की फौज थी। 2005 में जब टी-20 इंटरनेशनल की शुरुआत हुई तो उस समय इस फॉरमेट को लेकर बहुत गंभीरता नहीं दिखायी गयी। लगभग सभी देश टी-20 के ढांचे में खुद को फिट करने की कोशिश कर रहे थे। तब श्रीलंका की टीम में सनथ जयसूर्या, कुमार संगकारा, माहेला जयवर्धने और लसिथ मलिंगा जैसे विश्व विख्यात खिलाड़ी थे। इन खिलाड़ियों से लैस श्रीलंका की टीम का जब भारत के साथ टी-20 इंटरनेशनल मैच हुआ तब क्या हुआ था ? क्या जयसूर्या भारतीय खेमे में तबाही मचा पाए थे ? भारत ने श्रीलंका की इस मजबूत टीम को कैसे जवाब दिया था ?
सनथ जयसूर्या वाली श्रीलंका की टी-20 टीम
2 दिसम्बर 2009, मोहाली का क्रिकेट मैदान। भारत और श्रीलंका के बीच टी-20 मैच। श्रीलंका की टीम में कप्तान कुमार संगकारा के अलावा सनथ जयसूर्या, दिलकरत्ने दिलशान, माहेला जयवर्धने जैसे बड़े बैटर खेल खेल रहे थे। लसिथ मलिंगा, नुआन कुलसेकरा, दिलहारा फर्नांडो तेज गेंदबाज थे। जयसूर्या उस समय दुनिया के सबसे विध्वंसक बल्लेबाज थे। जयसूर्या और रोमेश कालूवितरना ही वह सलामी बल्लेबाज थे जिन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से एकदिवसीय क्रिकेट का ग्रामर बदल दिया था। विश्व में पहली बार इन दोनों ने वनडे क्रिकेट के पहले 15 ओवर में फील्डिंग रिसट्रिक्शन का फायदा उठा कर ताबड़तोड़ रन बनाने का फारमूला सेट किया था। बाद में दुनिया के बाकी देशों ने जयसूर्या और कालूवितरना की नकल की थी। एक समय जयसूर्या के नाम पर सबसे तेज वनडे शतक का रिकॉर्ड भी था जिसे आफरीदी ने तोड़ दिया था।
श्रीलंका 20 ओवर में 206/7
श्रीलंका ने पहले बैटिंग की और अपने नाम के अनुरूप धांसू प्रदर्शन किया। जयसूर्या अभी रंग में आ ही रहे थे कि युसूफ पठान ने उन्हें आउट कर दिया। तब तक उन्होंने 21 गेंदों पर 31 रन बनाये थे। उनकी कमी कुमार संगकारा ने पूरी कर दी। संगकारा ने 31 गेंदों पर 59 रनों की पारी खेली जिसमें 8 चौके और 2 छक्के शामिल थे। आखिरी ओवरों में एंजेलो मैथ्यूज ने 13 गेंदों पर नाबाद 26 रन बनाये। श्रीलंका ने 20 ओवरों में 7 विकेट पर 206 रन बनाये। उस समय टी-20 में 200 प्लस का स्कोर बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। एक हद तक जीतने लायक स्कोर माना जाता था। भारतीय तेज गेंदबाजों की जबर्दस्त पिटाई हुई थी। आशीष नेहरा ने 4 ओवर में 44, इशांत शर्मा ने चार ओवर में 42 रन दिये थे। युवराज सिंह ने 3 ओवर में 23 रन देकर 3 विकेट लिये थे।
युवराज सिंह- 25 गेंदों पर 60 रन
जवाब में भारतीय टीम ने श्रीलंका से ज्यादा धमाकेदार पारी खेली। गंभीर और सहवाग ने पहले विकेट के लिए 58 रन जोड़े। गंभीर 21 रन बना कर आउट हुए। लेकिन सहवाग रौद्र रूप धारण किये हुए थे। उन्होंने तूफानी अंदाज में 36 गेदों पर 64 रन बनाये। 7 चौकों और 3 छक्कों से सजी इस पारी ने श्रीलंका के खेमें में दहशत फैला दी। इस मोमेंटम को कप्तान धोनी और युराज सिंह ने भी कायम रखा। धोनी ने 28 गेंदो पर 46 रन बनाये। युवराज सिंह तो श्रीलंकाई गेंदबाजों पर कहर बन कर टूट पड़े। उन्होंने केवल 25 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाये। 5 छक्कों और 3 चौकों की मदद से उन्होंने ये रन बनाये। इस मैच में युवराज ने 240 की स्ट्राइ रेट से बैटिंग की थी। दिनेश कार्तिक 4 रनों पर नाबाद रहे। भारत ने पांच गेंद रहते 4 विकेट पर 2011 का स्कोर खड़ा कर मैच जीत लिया। युवराज सिंह को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला
पहले टी-20 में 215 रन बना कर जीत गया था श्रीलंका
2009 में भारत और श्रीलंका के बीच दो टी-20 मैच खेले गये थे। पहले मैच में श्रीलंका ने भारत को 29 रनों से हरा दिया था। इस मैच में भी श्रीलंका ने 200 प्लस का स्कोर बनाया था। कुमार संगकारा ने 37 गेंदों पर 78 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी। कापूगेदरा ने केवल 20 गेंदों पर 47 रन ठोक दिये थे। दिलशान ने 34, जयसूर्या ने 26 रन बनाये। श्रीलंका ने 20 ओवरों में 5 विकेट पर 215 का बड़ा स्कोर खड़ा किया था। जवाब में भारतीय टीम की बल्लेबाजी बिखर गयी। केवल गंभीर ने ही दम दिखाया। उन्होंने 26 गेंदों में 55 रन बनाये जिसमें 11 चौके शामिल थे। सहवाग 14 गेंदों पर 26 रन बना कर आउट हो गये। इसके बाद कोई बल्लेबाज जम नहीं सका। भारत की टीम 9 विकेट पर 189 रन ही बना सकी और वह 29 रनों से मैच हार गयी। दो टी-20 मैचों की यह श्रृंखला 1-1 से बराबर रही थी।












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