टेस्ट मैच का अंतिम ओवर: भारत को जीत के लिए चाहिए थे 4 रन और ऑस्ट्रेलिया को 1 विकेट, फिर क्या हुआ?

भारत दौरे पर ऑस्ट्रेलिया की टीम आने वाली है। फरवरी में दोनों टीमों के बीच चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जानी है। इसे लेकर चर्चा अभी से शुरू हो गई है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच काफी सालों पहले और रोमांचक टेस्ट हुआ था।

Kapil Dev

IND vs AUS: 9 फरवरी से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट श्रृंखला शुरू हो रही है। ऑस्ट्रेलिया के स्टार ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन शायद चोट की वजह से इस टेस्ट श्रृंखला में नहीं खेल पाएं। उन्होंने खुद अपने खेलने को लेकर संदेह जाहिर किया है। लेकिन क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ग्रीन अपनी पूरी क्षमता के साथ टेस्ट श्रृंखला में उपलब्ध रहेंगे। आखिर ग्रीन की इतनी चर्चा क्यों हो रही है ? दरअसल भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट श्रृंखला में हमेशा से ऑलराउंडर निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। अभी टी-20 और वनडे में ऑलराउंडर्स की अहमियत पर चर्चा होती है। लेकिन आज से 36 साल पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडरों ने टेस्ट मैच में जो ऐतिहासिक खेल दिखाया था उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। (Photo: Twiter)

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भारत की तरफ से कपिल देव और ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ग्रेग मैथ्यूज ने इस टेस्ट को रोमांच की पराकाष्ठा पर पहुंचा दिया था। माना जाता है कि कपिल देव ने इस टेस्ट में अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजी की थी। लेकिन किस्मत ने इस टेस्ट के लिए कुछ अलग तय कर रखा था। भारत को जीत के लिए चौथी पारी में 348 रन बनाने थे। लेकिन वह 347 पर ऑलआउट हो गया था। न भारत जीता, न ऑस्ट्रेलिया। टेस्ट मैच टाई हो गया।

146 साल के टेस्ट इतिहास में सिर्फ 2 टेस्ट ही टाई

टेस्ट मैच का टाई होना एक दुर्लभ घटना है। टेस्ट इतिहास के 146 साल के इतिहास में आज तक केवल दो टेस्ट मैच ही टाई हुए हैं। इसमें से एक टाई टेस्ट का गवाह भारत बना था। 1960 में ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीज के बीच और 1986 में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया टेस्ट टाई हो गया था। कहा जाता है कि अगर रवि शास्त्री ने सोच समझा कर फैसला लिया होता और अम्पायर वी विक्रम राजू दबाव में नहीं आते तो भारत ये टेस्ट मैच जीत सकता था। इस टैस्ट मैच को भारत क्यों नहीं जीत सका था ?

1986 का चेन्नई टेस्ट

18 सितम्बर 1986, एमए चिदम्बरम स्टेडियम, मद्रास (चेन्नई). भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच शुरू हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए विशाल स्कोर खड़ा किया। उसने 7 विकेट पर 574 रन बना कर पारी समाप्ति की घोषणा कर दी। कप्तान एलन बॉर्डर (106) और डेविड बून ने (122) शतक लगाये। जीन जोंस ने दोहरा शतक (210) लगाया। उस समय वातावरण में भयंकर गर्मी और उमस थी। चेन्नई में सितम्बर की गर्मी परेशान करने वाली होती है। जोंस को गर्मी के कारण मैदान पर दो बार उल्टियां हुईं। लेकिन उन्होंने बल्लेबाजी जारी रखी। जब वे 210 रन बना कर आउट हुए तो डिहाइड्रेशन के कारण उन्हें अस्पताल में भरती कराना पड़ा। बहरहाल भारत के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य फॉलोऑन को बचाना था। इस अहम मौके पर कप्तान कपिल देव ने यादगार पारी खेली थी।

कपिल देव का यादगार शतक

भारत की पहली पारी शुरू हुई । फॉलोऑन बचाने के लिए भारत को कम से कम 375 रन बनाने थे। श्रीकांत 53, अजहरुद्दीन 50 और रवि शास्त्री 62 रन बना कर आउट हो गये। 206 के स्कोर पर 5 विकेट गिर चुके थे। तब कपिल देव मैदान पर उतरे। भारत पर फॉलोऑन का खतरा मंडरा रहा था। स्थिति तब और खराब हो गयी जब 245 रन पर ही भारत के 7 विकेट गिर गये। अब कपिल का साथ देने चेतन शर्मा आये ( मौजूदा चयन समिति के अध्यक्ष)। कपिल ने चेतन से कहा, अभी स्ट्राइक रोटेट करना, जब नजर जम जाए तब शॉट खेलना। चेतन ने कपिल की बात गांठ बांध ली। पहले संभल कर खेले फिर करारे शॉट्स भी लगाये। उन्होंने 55 गेंदों पर 30 रन बनाये जिसमें 2 चौके और एक छक्का शामिल था। कपिल और चेतन के बीच 85 रनों की साझेदारी हुई। चेतन के रूप में आठवां विकेट 330 पर गिरा। 375 का आंकड़ा अभी भी दूर था। कपिल ने शिवलाल यादव के साथ मिल कर भारतका स्कोर 387 तक पहुंचाया। आखिरी खिलाड़ी के रूप में कपिल आउट हुए। तब तक वे 138 गेंदों पर 119 रनों की पारी खेल चुके थे। इस तरह कपिल के पराक्रम से भारत ने फॉलोऑन बचा लिया।

ऑस्ट्रेलिया ने खेला जुआ

ऑस्ट्रेलिया ने 5 विकेट पर 170 रना बना कर दूसरी घोषित कर दी तो हर कोई अचरज में पड़ गया। यह एक साहसिक फैसला था। भारत को जीत के लिए अंतिम दिन 87 ओवरों में 348 रन बनाने थे। ऑस्ट्रेलिया यही समझ रहा था कि भारत चौथी पारी में इतने रन नहीं बना पाएगा और वह मैच जीत सकता है। लेकिन एलन बॉर्डर की ये चाल उल्टी पड़ गयी। अंतिम ओवर (87वां ओवर) तक भारत जीत रहा था। लेकिन ऐन मौके पर रवि शास्त्री ने एक बड़ी गलती कर दी।

भारत ने 87 ओवर में 348 रन की चुनौती स्वीकार की

अंतिम दिन चाय के बाद जब 20 मेंडडेटरी ओवर की शुरुआत हुई तो भारत का स्कोर था 2 विकेट के नुकसान पर 193 रन। भारत मजबूत स्थिति में था। लेकिन तभी ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज और रे ब्राइट ने कहरा ढाना शुरू कर दिया। मैथ्यूज ने पहली पारी में 44 रन बनाये थे। भारत की पहली पारी में 5 विकेट ले चुके थे। अंतिम दिन भी मैथ्यूज का कमाल जारी रहा। भारत ने 86 ओवर में 9 विकेट पर 344 बना लिये थे। बॉर्डर ने आखिरी ओवर फेंकने की जिम्मेदारी ग्रेग मैथ्यूज को सौंपी। जब कि उस समय उनके पास क्रेग मैकडरमॉट और ब्रूस रीड जैसे घातक तेज गेंदबाज मौजूद थे। भारत को आखिरी ओवर में जीत के लिए केवल 4 रन बनाने थे। स्टाइक रवि शास्त्री के पास थी। भारत के नम्बर 11 बल्लेबाज मनीन्दर सिंह उनका साथ दे रहे थे। दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए अंतिम ओवर में कवल एक विकेट चाहिए था।

टेस्ट मैच में आखिरी ओवर का रोमांच

जब तक शास्त्री के पास स्ट्राइक थी तब तक भारत की जीत आसान लग रही थी। वे आसानी से 6 गेंद पर 4 रन बना सकते थे। लेकिन दो रन बनाने के बाद चौथी गेंद पर उन्होंने सिंगल दौड़ लिया। इस निर्णायक मोड़ पर उन्हें हर हाल में मनीन्दर सिंह को स्ट्राइक से बचाना था। लेकिन शास्त्री ने न जाने क्या सोच कर सिंगल ले लिया। वे चाहते तो 3 गेंदों में 2 बना सकते थे। भारत का स्कोर 347 पर पहुंचा। यानी स्कोर टाई हो चुका था। मैथ्यूज ने पांचवीं गेंद मनीन्दर सिंह को डाली। गेंद उनके पैड से टकरायी। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जोर-जोर से चिल्ला कर अपील करने लगे। अंपायर विक्रम राजू इस हंगामेदार अपील से दबाव में आ गये और उन्होंने उंगली उठा कर मनीन्दर को पगबाधा आउट दे दिया। इस तरह टेस्ट इतिहास का दूसरा मैच टाई हो गया।

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