ट्रेंट बोल्ट की वापसी: कौन होते हैं फ्रीलांस क्रिकेटर, जानिए दुनिया के सबसे चर्चित ऐसे खिलाड़ियों के बारे में
क्रिकेट में फ्रीलांसिंग: न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट ने वनडे विश्व कप के बाद भी फ्रीलांसर क्रिकेटर के रूप में खेलना जारी रखेंगे। भारत में होने वाले इस प्रमुख वनडे इवेंट से पहले, न्यूजीलैंड के चयन समिति ने इंग्लैंड के खिलाफ चार वनडे मैचों के लिए 15 सदस्यीय टीम में बोल्ट को शामिल किया है।
बोल्ट न्यूजीलैंड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर होने के बाद दुनिया भर में टी20 लीगों में खेल रहे हैं। उन्होंने हाल ही में संपन्न मेजर लीग क्रिकेट (एमएलसी) में एमआई न्यूयॉर्क के लिए खेला और प्रतियोगिता के सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बने।

बोल्ट ने फ्रीलांस क्रिकेटर होने के बारे में बात करते हुए कहा, मैं पहले एक पिता हूं और बाद में एक निचले क्रम का ऑलराउंडर हूं। मैं निश्चित रूप से देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए उतना ही भूखा हूं और उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में टीम के साथ कुछ खास कर सकूंगा।"
पिछले साल सितंबर में अपना अंतिम वनडे मैच खेलने वाले बोल्ट ने फ्रीलांसर क्रिकेटर होने के बारे में कहा कि अपने करियर के इस पड़ाव पर अपने फैसलों के बारे में आजादी चाहते थे। यानी वे अब ये खुद तय करना चाहते थे कि कहां खेलेंगे और कहा नहीं। फ्रीलांसर क्रिकेटर का मूल फंडा यही होता है।
एक फ्रीलांस क्रिकेटर वह क्रिकेटर होता है जो किसी भी नेशनल बोर्ड द्वारा सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बंधा नहीं होता है और एक पेशेवर के रूप में दुनिया भर में विभिन्न टी20 लीगों में खेलना चुन सकता है। फ्रीलांस क्रिकेटरों को अपना प्रोग्राम और वर्कलोड खुद तय करने की छूट है, लेकिन उन्हें नेशनल टीम में अपना स्थान खोने या महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों से चूकने का जोखिम भी उठाना पड़ता है। सबसे प्रसिद्ध फ्रीलांस क्रिकेटरों में से क्रिस गेल, एबी डिविलियर्स, कीरोन पोलार्ड, लसिथ मलिंगा जैसे खिलाड़ी रहे हैं।
भले ही भारतीय बोर्ड अभी तक इसे अनुमति नहीं देता है, लेकिन क्रिकेट में फ्रीलांसिंग नई नहीं है। इसे केरी पैकर की ऑस्ट्रेलिया में सीरीज और टी20 इंडियन क्रिकेट लीग में देखा गया था, फिर यह इंडियन प्रीमियर लीग में फल-फूल रही है। इससे जिन क्रिकेटरों को सबसे अधिक फायदा हुआ वे वो थे, जो अपनी कम उम्र में फ्रीलांसिंग शुरू कर चुके थे।
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गेल, डिविलियर्स, लसिथ मलिंगा, कीरोन पोलार्ड इनमें से कुछ ऐसे नाम हैं। लगातार अच्छे प्रदर्शन से एक फ्रीलांसर उससे कहीं ज्यादा कमा सकता है, जितना की उसको अपने बोर्ड के सेंट्रल कॉन्टैक्ट से मिल रहा है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट अभी के लिए फ्रीलांस कल्चर के उभार से बचा हो सकता है, क्योंकि यहां बीसीसीआई खिलाड़ियों की वित्तीय जिम्मेदारियों की गारंटी लेता है। बोर्ड के सख्त कानून खिलाड़ियों को किसी भी अन्य टी20 लीग में खेलने से रोकते हैं।
लेकिन, कौन जानता है कि खिलाड़ियों की एक मजबूत यूनीयन के गठन से भारत में भी आसानी से इन कानूनों को ध्वस्त किया जा सके। क्योंकि भले ही टॉप फ्रीलांसर एक बार को अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं भी करें, तो भी वे लीगों द्वारा चुने जाते हैं, लीग उनको जोड़कर अपने ब्रांड को और विश्वसनीय बनाना चाहती है। यही कारण है कि गेल पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका यहां तक कि कनाडा की लीगों में भी सबसे पहले विदेशी खिलाड़ी के रूप में साइन किए जाते थे।












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