IS Bindra: क्रिकेट जगत में शोक की लहर, जिसने बदला था भारतीय क्रिकेट का नसीब, वो दिग्गज अब नहीं रहा
BCCI president IS Bindra: भारतीय क्रिकेट प्रशासन को पूरी दुनिया में पहचान दिलाने में पूर्व बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा (I.S. Bindra) का बड़ा हाथ रहा है। रविवार को इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का निधन हो गया। 84 वर्षीय बिंद्रा पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। उनके निधन पर आईसीसी (ICC) के चेयरमैन जय शाह सहित खेल जगत की तमाम हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
बिंद्रा के करियर का सबसे ऐतिहासिक क्षण (BCCI president IS Bindra)
बिंद्रा के करियर का सबसे ऐतिहासिक क्षण 1987 का वर्ल्ड कप (रिलायंस कप) था। यह पहला मौका था जब क्रिकेट का सबसे बड़ा आयोजन इंग्लैंड की सीमाओं से बाहर निकलकर भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचा था। उन्होंने अपने करीबी सहयोगी दिवंगत जगमोहन डालमिया और तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष एन.के.पी. साल्वे के साथ मिलकर इस असंभव कार्य को संभव कर दिखाया।

भारतीय क्रिकेट बोर्ड को पहचान दिलाने में निभाई थी अहम भूमिका
बिंद्रा को भारतीय क्रिकेट के प्रसारण अधिकारों (Broadcasting Rights) में क्रांति लाने का श्रेय दिया जाता है। 1994 में उन्होंने दूरदर्शन के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत से पक्ष में फैसला आने के बाद ही ESPN और TWI जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारतीय बाजार खुला। इसी दूरदर्शिता के कारण आज भारतीय क्रिकेट बोर्ड दुनिया का सबसे अमीर खेल संगठन बन सका है।
हासिल की ये बड़ी उपलब्धियां
उन्होंने BCCI अध्यक्ष के रूप में 1993 से 1996 तक बोर्ड का नेतृत्व किया। 1978 से 2014 तक वह पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) के अध्यक्ष रहे। मोहाली के विश्वस्तरीय स्टेडियम का निर्माण उन्हीं की देखरेख में हुआ, जिसका नाम बाद में उन्हीं के सम्मान में 'आईएस बिंद्रा स्टेडियम' रखा गया। वह शरद पवार के कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के मुख्य सलाहकार भी रहे।
विवादों से भी रहा नाता
बिंद्रा का कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग कांड के बाद ललित मोदी का समर्थन करने के कारण उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, साउथ अफ्रीका क्रिकेट के सीईओ के रूप में हारून लोर्गट की नियुक्ति में उनकी भूमिका को लेकर भी बोर्ड के भीतर मतभेद देखे गए थे।












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