DDCA Election: रोहन जेटली फिर बने अध्यक्ष, कीर्ति आजाद को 800 वोटों से हराया
DDCA Election: अरुण जेटली के बेटे रोहन जेटली को दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अध्यक्ष के रूप में एक और कार्यकाल के लिए चुना गया है। यह उनके लिए तीसरी बार इस पद पर काबिज होने का अवसर है। रोहन जेटली ने इस चुनाव में भारत के पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद को बुरी तरीके से हराया है। रोहन ने 1577 वोट हासिल किए, जबकि कीर्ति आजाद को केवल 777 वोट ही प्राप्त हुए।
रोहन जेटली फिर बने अध्यक्ष
इस चुनाव में कुल 2413 वोट डाले गए थे, और जीतने के लिए 1207 वोट की आवश्यकता थी। इस जीत के साथ रोहन जेटली ने एक बार फिर साबित किया है कि उनकी पकड़ क्रिकेट प्रशासन में मजबूत है और उन्हें खिलाड़ियों एवं प्रशासकों का समर्थन प्राप्त है। यह चुनावी परिणाम रोहन जेटली की नेतृत्व क्षमता और दिल्ली क्रिकेट में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को और पुख्ता करता है।

रजत शर्मा के बाद रोहन को मिली थी जिम्मेदारी
रोहन जेटली 2020 में दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए थे, जब रजत शर्मा ने पद छोड़ दिया था। रजत शर्मा ने अचानक पद से इस्तीफा दिया, जिसके बाद रोहन जेटली को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। एक साल बाद, उन्होंने एडवोकेट विकास सिंह को हराकर अध्यक्ष पद पर अपनी स्थिति बनाए रखी। रोहन जेटली का यह पद उनके पिता दिवंगत अरूण जेटली के बाद आया जो 14 साल तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे थे और दिल्ली क्रिकेट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
तृणमूल कांग्रेस के नेता कीर्ति आजाद ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के प्रशासक रोहन जेटली पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि पिछले वित्तीय वर्ष में डीडीसीए को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से 140 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, लेकिन इनमें से बहुत कम पैसा खर्च किया गया। आज़ाद ने आरोप लगाया कि रोहन जेटली के नेतृत्व में डीडीसीए ने 17.5 करोड़ रुपये फ्लडलाइट्स लगाने पर खर्च किए, जबकि अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम, जो दिल्ली के स्टेडियम से काफी बड़ा है, उसमें फ्लडलाइट्स लगाने का खर्चा केवल 7.5 करोड़ रुपये आया।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि डीडीसीए ने 8 लिफ्ट बनाने के लिए 19 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे, जो अत्यधिक राशि थी। ये आरोप डीडीसीए के वित्तीय प्रबंधन और खर्चों पर सवाल खड़ा करते हैं, और कीर्ति आजाद ने इसे लेकर रोहन जेटली के प्रशासन की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।












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