BCCI Review Meeting: नये साल में नये इरादे, 2023 विश्व कप के लिए टीम तराशेंगे राहुल द्रविड़

बीसीसीआई ने अपनी रिव्यू मीटिंग में तीन बड़े निर्णय लिए हैं। इनमें वनडे वर्ल्ड कप के लिए 20 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया जाना भी शामिल है।

Rohit and Dravid

BCCI Review Meeting: भारतीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़ का विशिष्ट योगदान रहा है। एक खिलाड़ी के रूप में भी और एक कोच के रूप में भी। पहले चर्चा थी कि बीसीसीआइ की रिव्यू कमेटी उनसे टी-20 विश्वकप में हार की वजह पूछेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बैठक में इंजरी और खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनैजमेंट पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा टेस्ट चैंपियनशिप में भारत की संभावनाओं पर भी राय रखी गयी। इस समीक्षा बैठक से पहले खूब हवा भी बनायी गयी थी जो कि गैरजरूरी थी। दोषारोपण से अच्छा है भविष्य के लिए योजना बनाना। इस समीक्षा बैठक में पूर्व के प्रदर्शनों की उतनी ही चर्चा हुई जिससे कि 2023 के विश्वकप के लिए कार्य योजना बनायी जा सके।

राहुल द्रविड़ पर भरोसा कायम

2023 का विश्वकप क्रिकेट (वनडे) भारत में होने वाला है। पिछले 9 साल से भारत कोई आईसीसी टूर्नामेंट नहीं जीत पाया है। इस साल भारत के पास मौका है कि वह विश्व खिताब के सूखे को खत्म कर सके। इसके लिए भारतीय क्रिकेट टीम को अभी से तैयारी करनी होगी। रविवार को हुई समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा की गयी। इसके लिए 20 खिलाड़ियों पहचान की गयी है। इन्हें तैयार कर भविष्य की टीम चुनी जाएगी। राहुल द्रविड़ पर भरोसा बनाये रखा गया। वे खिलाड़ी के रूप में क्रिकेट के कोहिनूर थे। टेस्ट क्रिकेट में 36 शतक यूं ही नहीं मार दिये। अब जौहरी बन चुके हैं। हीरे को पहचानने और उसे तराशने में उनका कोई मुकाबला नहीं। भारत के विस्फोटक बल्लेबाज सुरैश रैना ने अपनी किताब- बिलीव- व्हाट लाइफ एंड क्रिकेट टौट मी- में लिखा है, भारतीय क्रिकेट में जीत का जब्बा भरने और उसे फाइटर बनाने का श्रेय पहले सौरव गांगुली को दिया जाता था और उसके बाद महेन्द्र सिंह धोनी को। लेकिन मेरा ऐसा मानना नहीं है। दादा और एमएसडी ने एक कप्तान के रूप में टीम को जरूर प्रेरित किया लेकिन टीम को असल में तैयार किया राहुल द्रविड़ ने। द्रविड़ विनम्र लेकिन मजबूत हैं। वे युवा खिलाड़ियों के लिए चयनकर्ताओं तक से लड़ जाते थे। इसकी वजह से टीम में कई काबिल खिलाड़ियों को स्थापित होने का मौका मिला।

द्रविड़- निराशा में भी सकारात्मक सोच

राहुल द्रविड़ ने युवा किलाड़ियों को तराश कर भारत का बेंच स्ट्रेंथ मजबूत किया। उनके ही प्रशिक्षण में भारत ने 2019 में अंडर-19 विश्व कप जीता था। द्रविड़ निराशा में भी सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्ति हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी वे अपने साथी खिलाड़ियों का मनोबल बनाये रखने की कोशिश करते थे। उनके बार में इरफान पठान ने एक संस्मरण सुनाया था। 2007 के क्रिकेट विश्व कप (वनडे) में भारतीय टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ थे। उस टीम में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, वीरेन्द्र सहवाग, महेन्द्र सिंह धोनी जैसे दिग्गज खिलाड़ी मौजूद थे। इसके बाद भी भारत पहले दौर में ही प्रतियोगिता से बाहर हो गया था। उसे बांग्लादेंश और श्रीलंका ने ग्रुप मैचों में हरा दिया था। इस करारी हार से भारतीय टीम का मनोबल बिल्कुल गिरा हुआ था। टीम उस समय पोर्ट ऑफ स्पेन में थी। तब राहुल द्रविड़ इरफान पठान और धोनी के पास पहुंचे और कहा, देखो हम लोग बहुत निराश हैं, लेकिन इस हार से सब कुछ खत्म नहीं हो गया। हम वापस लौटेंगे। फिलहाल चलो सिनेमा देखते हैं। त्रिनिदाद की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में उस समय एक हिंदी फिल्म लगी हुई थी।

क्रिकेट के लिए हद से ज्यादा समर्पण

2011 विश्व कप के हीरो गौतम गंभीर ने कहा था, एक कप्तान के रूप में राहुल द्रविड़ के लीडरशिप को उतना श्रेय नहीं मिला जितना कि वो इसके हकदार थे। इसे वक्त की नाइंसाफी ही कहा जाएगा। द्रविड़ कप्तान और कोच के रूप में हमेशा खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए समर्पित रहे। इरफान पठान के मुताबिक, किसी खिलाड़ी के लिए द्रविड़ का दरवाजा रात के दो बजे भी खुला रहता था। उनसे कभी किसी समस्या पर बात करना आसान था। उनकी खासियत और उपलब्धियों को 'अंडर प्ले’ किया गया। राहुल द्रविड़ जैसे बड़े खिलाड़ी को भी चयनकर्ताओं का कोपभाजन बनना पड़ा था। इसका उन्हें मलाल भी रहा। लेकिन फिर उन्होंने अपने प्रदर्शन से फिर टीम में वापसी कर ली थी। एक बार राहुल द्रविड़ ने कहा था, मुझ पर टेस्ट प्लेयर का टैग लगा कर 1998 में वनडे टीम से बाहर कर दिया था। चयनकर्ताओं ने मुझसे कहा था, आपकी बल्लेबाजी वनडे क्रिकेट के अनुकूल नहीं है इसलिए टीम में जगह नहीं मिल सकती। लेकिन द्रविड़ ने एक साल बाद ही अपने खेल से सेलेक्टर्स को वनडे में चयन के लिए मजबूर कर दिया। 1999 के विश्वकप में द्रविड़ ने शानदार बल्लेबाजी की और बता दिया कि उनमें एकदिवसीय मैच खेलने की भी काबिलियत है। वनडे क्रिकेट में भी उन्होंने 10 हजार से अधिक रन यूं ही नहीं बनाये हैं।

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