आवेश खान को मौके पर मौके! उमरान, नटराजन और नवदीप की अनदेखी क्यों?
स्पोर्ट्स डेस्क, 3 अगस्त: जब हार की कीमत पर किसी गेंदबाज को परखना है तो उमरान मलिक को परखो। भारत हारे तो हारे, कम से कम एक सुपरफास्ट बॉलर तो मिल जाएगा। आवेश खान ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी-20 के आखिरी ओवर में बेहद गैरजिम्मेदाराना बॉलिंग की। उन्होंने एक तरह से वेस्टइंडीज को तोहफे में जीत दे दी। आवेश खान को मौके पर मौके मिल रहे हैं। लेकिन बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी नटराजन को भूला दिया। 90 मील प्रति घंटे की रफ्तार से बॉलिंग करने वाले नवदीप सैनी को नजरअंदाज कर दिया। अगर नये तेज गेंदबाजों को चांस देने की ही बात है तो इन्हें क्यों नहीं आजमाया जा रहा?
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क्या आवेश के कारण मिली हार?
आखिरी ओवर में वेस्टइंडीज को जीत के लिए 10 रन चाहिए थे। एक लो स्कोरिंग (138) मैच को भारतीय गेंदबाज आखिरी ओवर तक खींच कर ले गये थे। ये बहुत बड़ी बात थी। अब सारा दारोमदार आखिरी ओवर पर था। लेकिन इस अहम मौके पर आवेश खान ने क्या किया? पहली गेंद नो बॉल डाली। इस गेंद की रफ्तार भी क्या थी? सिर्फ 132 किलोमीटर प्रति घंटा। इस गेंद पर स्मिथ ने एक रन लिया। गेंद की गिनती भी नहीं हुई और दो रन भी बन गये। अब 6 गेंद पर 8 रन चाहिए थे। फ्री हिट लेने के लिए थॉमस मौजूद थे। उन्होंने फ्री हिट पर छक्का उड़ा दिया। दूसरी गेंद पर थॉमस ने चौका जड़ कर भारत का किस्सा तमाम कर दिया। अगर कोई गेंदबाज विपक्षी टीम को थाली में सजा कर जीत पेश कर दे तो इसे आजमाना नहीं कहते।

नटराजन डेथ ओवरों में प्रभावशाली
आवेश खान दक्षिण अफ्रीका सीरीज से ही भारतीय चयनकर्ताओं की पसंद बने हुए हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले तीन मैचों में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला था। चौथे मैच में उन्हें कामयाबी मिली। आयरलैंड और इंग्लैंड में उन्हें मौके मिले। अगर आवेश के भारतीय टीम में चुने जाने की वजह आइपीएल (2022) की कामयाबी थी तो फिर टी नटराजन को मौका क्यों नहीं मिला? नटराजन ने भी आइपीएल 2022 के 11 मैचों में 18 विकेट लिये थे।

गावस्कर ने की थी वर्ल्ड कप खिलाने की मांग
भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर की राय है कि अगर नटराजन को टी-20 विश्वकप में खेलने का मौका मिला तो वे कमाल कर सकते हैं। उन्हें आइपीएल 2022 में ट्रेडमार्क यॉर्कर डालते देख कर बहुत अच्छा लगा। वे अब पूरी तरह फिट हैं और अच्छी गेंदबाजी कर रहे हैं। उनकी सबसे अच्छी बात ये है कि वे गेंद को देर से स्विंग कराने की कोशिश कर रहे हैं। वे डेथ ओवर के प्रभावशाली गेंदबाज हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में डेब्यू किया था और असर भी डाला था। टी-20 विश्वकप चूंकि ऑस्ट्रेलिया में होने वाला है। इसलिए बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नटराजन वहां उपयोगी साबित होंगे। मुझे उम्मीद है कि वे टी-20 विश्वकप में खेलेंगे।

‘यॉर्कर नटराजन’
पूर्व कोच रवि शास्त्री भी नटराजन की क्षमता से प्रभावित हैं। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था, 2021 के टी-20 वर्ल्ड कप में हम लोगों ने शिद्दत से उनकी कमी महसूस की। अगर वे फिट होते तो भारत को फायदा मिलता। आखिरी ओवरों में वे सधी हुई गेंदबाजी करते हैं। सटीक यॉर्कर डालते हैं। उनकी गेंद स्किड हो कर बल्ले पर इतनी तेजी से आती है कि बैटर को इसकी उम्मीद नहीं रहती। क्रिकेट कमेंटेटर हर्ष भोगले ने आइपीएल 2022 में नटराजन की गेंदबाजी को देख कर उनका नाम ही 'यॉर्कर नटराजन' रख दिया था। वे भी जसप्रीत बुमराह की तरह एक ही ठिकाने पर लगातार यॉर्कर फेंक सकते हैं। लेकिन ऐसे तेज गेंदबाज को टीम से बाहर रखा गया है।

सैनी की भारत में अनदेखी, इंग्लैंड में बरपाया कहर
नवदीप सैनी को भारत का जेनुइन फास्ट बॉलर माना जाता है। वे औसतन 144 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बॉलिंग करते हैं। जब भारतीय टीम में उनका चयन नहीं हुआ तो वे इंग्लैंड में काउंटी मैच खेलने लगे। वे केंट के प्रमुख तेज गेंदबाज के रूप में उभरे। काउंटी चैम्पियनशिप के डेब्यू मैच में ही सैनी ने अपनी रफ्तार से खलबली मचा दी। केंट की तरफ से खेलते हुए उन्होंने वारविकशायर के खिलाफ पहली पारी में पांच विकेट लिये। फिर दूसरी पारी में 2 विकेट लिये। केंट ने यह मैच 177 रनों से जीता था। फिर उन्होंने लंकाशायर के खिलाफ तूफानी गेंदबाजी की। काउंटी चैम्पियनशिप में इंग्लैंड के अलावा अन्य कई देशों के खिलाड़ी खेलते हैं। वहां टीम में बने रहने के लिए कठिन स्पर्धा करनी पड़ती है। जो गेंदबाज इस बड़े मंच पर बेहतर गेंदबाजी कर रहा है फिर उसकी क्षमता पर क्यों नहीं भरोसा किया जा रहा?












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