IND vs AUS: टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई ने 6 साल बाद उतारा है ऐसा बॉलिंग कॉम्बिनेशन

ऑस्ट्रेलिया करीब छह साल के बाद तीन स्पिनरों और एक तेज गेंदबाज के साथ उतरा है। नागपुर टेस्ट में हार के बाद वह दबाव में है। भारत को जवाब देने के लिए उसे भी स्पिन आक्रमण पर आश्रित होना पड़ा है।

India vs Australia 2nd Test

ऑस्ट्रेलिया की टीम में सिर्फ एक तेज गेंदबाज और तीन स्पिनर ! जिस देश का तेज गेंदबाजी में जलवा रहा हो उसके इस बॉलिंग कम्बिवेशन पर हैरान होना लाजिमी है। ऑस्ट्रेलिया करीब छह साल के बाद तीन स्पिनरों और एक तेज गेंदबाज के साथ उतरा है। नागपुर टेस्ट में हार के बाद वह दबाव में है। भारत को जवाब देने के लिए उसे भी स्पिन आक्रमण पर आश्रित होना पड़ा है। दिल्ली टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने नाथन लियोन, टॉड मर्फी और मैथ्यू कुहनेमेन को मौका दिया है। तेज गेंदबाज के रूप में केवल कप्तान पैट कमिंस खेल रहे हैं। इसके पहले 2017 के चटगांव टेस्ट में ऐसी स्थिति बनी थी। उस टेस्ट में मैच में भी कमिंस अकेले तेज गेंदबाज थे जब कि स्पिनर के रूप में नाथन लियोन, एस्टन एगर और स्टीव ओ कीफ और ग्लेन मैक्सवेल खेले थे।

डेब्यू करने वाले स्पिनर को मैच का दूसरा ओवर

कभी ऑस्ट्रलिया के जेफ थॉम्सन, डेनिल लिली, ग्लेन मैकग्रा की तेज गेंदबाजी का जलवा था। आज भी इस टीन में कमिंस, स्टार्क और हेजलवुड की खतरनाक तिकड़ी है। लेकिन इंजरी के चलते स्टार्क और हेजलवुड टीम में नहीं है। नयी सनसनी कैमरून ग्रीन भी चोटिल होने के चलते नहीं खेल रहे हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय पिचों पर ऑस्ट्रेलिया ने अपनी रणनीति बदल दी। अब दिल्ली टेस्ट में स्पिनरों पर ही उसकी गेंदबाजी का दारोमदार है। नागपुर टेस्ट में मर्फी ने पहले टेस्ट में ही सात विकेट लेकर अपने चयन को सही साबित किया था। लेकिन नाथन लियोन अपने नाम के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाये थे। दिल्ली टेस्ट में कुहनेमेन ने डेब्यू किया है। टीम में एस्टन एगर एक और स्पिनर थे। लेकिन कुहनेमेन को खास तौर से ऑस्ट्रलिया से बुलाया गया। अब स्पिन की मददगार पिच पर उनकी काबिलित का इम्तहान होना बाकी है। मैच का दूसरा ओवर ही उन्होंने डाला। एकदम नयी चमचमाती हुई गेंद से। पहले से तय था कि कुहनेमेन ही नयी गेंद के साथ कमिंस के जोड़ीदार होंगे। यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट का नयी सोच है।

पांच साल पहले 4 स्पिनर खेले थे ऑस्ट्रेलिया से

जब 2017 में ऑस्ट्रेलिया की तरफ से चार स्पिनर खेले तब पह पिच भी स्पिनरों की मददगार थी। नाथन लियोन ने पहली पारी में 7 विकेट लिये थे। एस्टन एगर को 2 विकेट मिले थे। लेकिन स्टीव ओ कीफ और ग्लेन मैक्सवेल को कोई विकेट नहीं मिला था। पैट कमिंस ने 22 ओवर गेंदबाजी की थी लेकिन वे भी खाली हाथ रहे थे। बांग्लादेश ने 305 रन बनाये थे। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने डेविड वार्नर के शतक की बदौलत 377 रन बनाये। दूसरी पारी में भी लियोन का जादू सिर चढ़ कर बोला। उन्होंने 6 विकेट लिये थे। स्टीव ओ कीफ को 2 और कमिंस को 2 विकेट मिले थे। इस घातक गेंदबाजी के कारण बांग्लादेश की टीम सिर्फ 157 रनों पर आउट हो गयी। ऑस्ट्रेलिया ने 3 विकेट पर 87 रन बना कर यह टेस्ट मैच 7 विकेट से जीत लिया था। इस तरह चार स्पिन (नाथन लियोन, ओ कीफ, एगर और मैक्सवेल) के साथ खेल कर ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश में टेस्ट विजय हासिल की थी।

दिल्ली टेस्ट में कांगारू स्पिनर

मैच के पहले दिन भारत को केवल 9 ओवर खेलने थे। पहला ओवर पैट कमिंस ने फेंका। दूसरी ओवर कुहनेमेन ने। वे लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं। किसी स्पिनर के लिए नयी गेंद को ग्रिप करना थोड़ा कठिन होता है क्यों कि आम तौर पर वह पुरानी गेंद से बॉलिंग का अभ्यस्त होता है। पहला टेस्ट खेल रहे कुहनेमेन ने इत्मिनान से सही लाइन पर बॉलिंग की। उन्हें उछाल भी मिल रही थी। लेकिन रोहित शर्मा ने सधी हुई रक्षात्मक बल्लेबाजी की। वे बिल्कुल गेंद की लाइन में आ कर खेल रहे थे। यह उनकी छवि के विपरित है। अब वे टेस्ट मैच के अनुरूप बैटिंग कर रहे हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई स्पिनरों को बहुत आत्मविश्वास से खेला। हालांकि आखिरी लम्हों में लियोन और कुहनेमेन ने रोहित और राहुल को काफी परेशान किया। लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाज अपने विकेट को सुरक्षित रखने में कामयाब रहे।

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