BCCI में अनुराग ठाकुर की वापसी? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 9 साल का वनवास खत्म
Anurag Thakur: भारतीय क्रिकेट की बिसात पर एक बार फिर सबसे बड़ा खिलाड़ी लौटने को तैयार है। जी हां, हम बात कर रहे हैं अनुराग ठाकुर की। राजनीति और क्रिकेट के मैदान पर समान पकड़ रखने वाले ठाकुर के लिए आज एक बड़ा दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने उन पर लगे उस 'ताले' को खोल दिया है, जिसने उन्हें करीब एक दशक से बीसीसीआई (BCCI) की चौखट से दूर रखा था।
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया कि अनुराग ठाकुर पर लगा प्रतिबंध अब और नहीं चलेगा। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने माना कि ठाकुर अपनी गलती की माफी मांग चुके हैं और 9 साल का लंबा समय किसी भी सुधार के लिए काफी है। कोर्ट ने 'प्रिंसिपल ऑफ प्रोपोर्शनैलिटी' का जिक्र करते हुए कहा कि किसी को आजीवन क्रिकेट से दूर रखना सही नहीं है।

वो हलफनामा जिसने छीनी थी कुर्सी
कहानी शुरू होती है साल 2017 की कड़वाहट से। लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लेकर मचे घमासान के बीच अनुराग ठाकुर पर आरोप लगा कि उन्होंने आईसीसी से चिट्ठी लिखवाने की कोशिश की थी ताकि बीसीसीआई की स्वायत्तता बरकरार रहे। इसी के बाद 2 जनवरी 2017 को कोर्ट ने उन्हें पद से हटा दिया था और बोर्ड की गतिविधियों से 'तौबा' करने का आदेश दिया था। तब से लेकर अब तक, भारतीय क्रिकेट में बहुत कुछ बदला, लेकिन ठाकुर के लिए बोर्ड के दरवाजे बंद रहे। 9 साल पहले कोर्ट ने अवमानना की बात कहते हुए अनुराग ठाकुर पर बैन लगा दिया था।
क्रिकेट गलियारों में हलचल तेज
इस फैसले के आते ही बीसीसीआई के गलियारों में सस्पेंस बढ़ गया है। ठाकुर को मिली यह राहत महज़ एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह बोर्ड के पावर स्ट्रक्चर को बदलने का संकेत है, कुछ सवाल भी सामने आ रहे हैं।
- क्या अनुराग ठाकुर फिर से चुनाव लड़ेंगे?
- क्या बीसीसीआई के मौजूदा समीकरणों में कोई बड़ी उठापटक होगी?
यह तो वक्त बताएगा, लेकिन एक बात तय है कि ठाकुर की वापसी से क्रिकेट प्रशासन की राजनीति में एक नया रोमांच आने वाला है। फ़िलहाल तो बीसीसीआई अध्यक्ष के तौर पर मिथुन मिन्हास काम कर रहे हैं।












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