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'कई हार के बाद उसे हराने का मौका मिला', साइना नेहवाल ने कहा- अपने पैसों से खेलना पड़ता है...

Saina Nehwal Instagram Video: भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल हमेशा अपने खेल से जुड़े मुद्दों पर बात करती रही हैं। हाल ही में प्रतीक के साथ पॉडकास्ट में अपने पति पारुपल्ली कश्यप के साथ उन्होंने भारत में उभरते बैडमिंटन खिलाड़ियों के सामने आने वाली चुनौतियों पर बात की। नेहवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की ख्वाहिश रखने वाले युवा एथलीट अपना खर्चा खुद उठाने को मजबूर हैं।

30-35 लाख रुपये का हो सकता है खर्चा

उन्होंने इस कठोर सत्य को बताते हुए कहा कि 60 या 70 में स्थान पाने के बिना खिलाड़ियों के पास आवश्यक धन तक पहुंच नहीं होती है। जिससे उनके लिए खेल को पेशेवर रूप से आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। नेहवाल के अनुसार प्रतिस्पर्धी स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का वार्षिक खर्च 30-35 लाख रुपये हो सकता है, जिसमें कोचिंग और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त लागत शामिल है।

Saina Nehwal 1

उभरते बैडमिंटन खिलाड़ियों को लेकर कही ये बात

उभरते बैडमिंटन खिलाड़ियों के संघर्षों के बारे में नेहवाल ने चिंता जाहिर करते हुए कई बातों का जिक्र किया। उनका यह बयान बैडमिंटन के बाहर कई लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। सरकारी सहायता के बिना किसी खेल को आगे बढ़ाने का वित्तीय तनाव भारी पड़ सकता है, जो संभावित रूप से युवा प्रतिभाओं को पनपने का मौका मिलने से पहले ही दबा सकता है।

शानदार रहा है साइना का करियर

इस पॉडकास्ट में नेहवाल ने साफ कहा कि भारत में बैडमिंटन में पेशवर करियर बनाना कतई आसान नहीं है। अपने शानदार करियर के दौरान साइना नेहवाल ने न केवल कोर्ट पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है, बल्कि अनगिनत युवा भारतीयों को बैडमिंटन खेलने के लिए प्रेरित भी किया है। आठ साल की उम्र में रैकेट पकड़ने से लेकर दुनिया की शीर्ष रैंक वाली महिला शटलर और बैडमिंटन में ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने तक का उनका सफर शानदार रहा है।

'कई हार के बाद उसे हराने का मौका मिला'

वहीं साइना ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पुराने मैच का वीडियो शेयर किया। इस वीडियो के साथ उन्होंने एक प्यारा सा कैप्शन भी लिखा। साइना ने लिखा कि जब आप किसी इतने मजबूत खिलाड़ी के खिलाफ कई मैच खेलते हैं, जिसमें हेड-टू-हेड स्कोर 9-1 हो और आपने सिर्फ एक मैच जीता हो, तब भी मैं हार मानने वालों में से नहीं थी। लगातार मेहनत करती रही, एक समाधान खोजने के लिए कि कैसे उसे हराया जा सके। और आखिरकार, जब कई हार के बाद उसे हराने का मौका मिला, वो पल बेहद खास और थोड़ा अविश्वसनीय भी था। मेहनत रंग लाती है!

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